एक गांव में तीन वर्ष से पेड़ के नीचे गुजर बसर कर रहे बुजुर्ग मां-बेटा

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बड़वानी/ठीकरी। एक ओर शासन-प्रशासन गरीबों व जरूरतमंदों के लिए तमाम योजनाओं का बखान करते नहीं थकते, वहीं कई जरूरतमंद अब भी सहयोग की आस लगाए बैठे हैं। ऐसा ही एक मामला ठीकरी तहसील के ग्राम टेमला का है। वहां बेसहारा वृद्ध मां-बेटा करीब तीन वर्ष से पेड़ के नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। उनका झोपड़ा जर्जर होने से न तो सिर पर छत है, न भोजन की उचित व्यवस्था। उन्हें किसी भी शासकीय योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा। गांव वाले रहम खाकर जो रूखा-सूखा दे देते हैं, वही खाकर जीवन गुजार रहे हैं।
टेमला के 58 वर्षीय अशोक तिवारी ने बताया उनका वर्षों पुराना झोपड़ा जर्जर अवस्था में है। छत गिर चुकी है और दीवारें क्षतिग्रस्त है। डर के कारण तीन साल से 90 वर्षीय मां को लेकर ग्राम के मंदिर के समीप पेड़ के नीचे रह रहे हैं। मां को दिखाई नहीं देता और दिव्यांग भी है। सिर छुपाने के लिए गांव वालों ने तंबू बना दिया है। खुले में जीव-जंतु का डर रहता है। गांव के लोग थोड़ी-बहुत मदद कर देते हैं।
मत करवाओ इलाज
तिवारी की शादी हुई थी और पत्नी का 30 वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उनकी कोई संतान नहीं है। मां के इलाज के लिए रुपये नहीं हैं और लोग कहते हैं कि इतनी उम्र हो गई है, क्यों इलाज में पैसे बिगाड़ते हो। मां ने पेट काटकर मुझे पाला है, तो मैं उनको मरने के लिए कैसे छोड़ सकता हूं। एक भाई इंदौर में परिवार सहित रहता है। पहले पांच एकड़ जमीन थी, जो गिरवी रखकर पिता का उपचार कराया था। पिता की भी नौ वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है।
इस मामले में टेमला ग्राम पंचायत के सचिव भारत पटेल ने बताया तिवारी व उनकी मां के कोई भी दस्तावेज नहीं है, इसलिए उन्हें किसी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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