ऑपरेशन जैकबूट 2 में मारा गया आतंकी सरगना रियाज नाइकू, एनएसए अजित डोभाल ने की थी व्यूह रचना

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श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर घाटी में आतंक के पर्याय बने हिजबुल कमांडर रियाज नाइकू को मार गिराना ऑपरेशन जैकबूट की बड़ी सफलता है। स्वयं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने इस अभियान की व्यूह रचना की थी। सुरक्षा बल छह माह से इस अभियान पर जुटे थे। ऑपरेशन जैकबूट का दूसरा चरण पिछले साल अक्टूबर माह में शुरू किया गया था, जबकि इसका पहला चरण पुलवामा हमले के तुरंत बाद 18 फरवरी 2019 को आरंभ होकर जून में समाप्त कर दिया गया था। एनएसए डोभाल ऑपरेशन जैकबूट की गतिविधियों की साप्ताहिक समीक्षा करते हैं।डोभाल ने इस अभियान में अपने उन मित्रों का सहारा लिया जिन्हें कश्मीर में उनके ‘आंख-कान’ कहा जाता है। बताया जा रहा है कि नाइकू को मार गिराने के अभियान के दौरान उन्होंने तीन बार पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की है। उन्होंने ही जैकबूट-1 और जैकबूट-2 में शामिल अधिकारियों को खुद चिह्नित किया था। इसके साथ ही डीआइजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में ऑनग्राउंड सर्विलांस व एक्शन टीम को गठित किया गया। 

इस वर्ष 11 जनवरी को श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर डीएसपी देवेंद्र सिंह के साथ हिजबुल के मोस्टवांटेड आतंकी नवीद बाबू की गिरफ्तारी भी जैकबूट-2 का ही कमाल है। इसके अलावा पुलवामा का मुख्य साजिशकर्ता जैश कमांडर कारी यासिर त्राल में 25 जनवरी को अपने दो अन्य साथियों संग मारा गया। 

कब शुरू हुआ जैकबूट 2 

सूत्रों ने बताया कि अगर रियाज नाइकू एंड कंपनी अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद दूसरे राज्य के श्रमिकों, ट्रक चालकों और सेब व्यापारियों को निशाना न बनाते तो जैकबूट 2 शुरू नहीं होता। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दक्षिण कश्मीर में पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग का दौरा कर वहां लोगों से खुद बातचीत की थी। जैकबूट-2 में दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को दो वर्गों में रखा गया। पहले वर्ग में पूरे दक्षिण कश्मीर में गतिविधियों चला रहे आतंकी थे जो सोशल मीडिया में भी सक्रिय थे। दूसरे वर्ग में वह शामिल थे जो कमांडरों के आदेश पर वारदात अंजाम दे रहे थे और अपने-अपने इलाके में पोस्टर ब्वाय बन रहे थे। इसके तहत ही त्राल मे हमादखान, बुरहान कोका, आसिफ और लतीफ दास जैसे आतंकियों का सफाया किया गया। 

सूची में सबसे ऊपर था नाइकू 

जैकबूट-2 में नाइकू सबसे ऊपर था। ऐसे में पहले उसके ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए उसके 30 खबरियों को पकड़ा गया। इसके साथ ही उसके सभी प्रमुख ठिकानों को नष्ट किया गया। ठिकाने नष्ट होने के बाद वह अपने गांव में मां से मिलने गया और यहीं वह जाल में फंस गया। 

कब शुरू हुआ जैकबूट 2 

सूत्रों ने बताया कि अगर रियाज नाइकू एंड कंपनी अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद दूसरे राज्य के श्रमिकों, ट्रक चालकों और सेब व्यापारियों को निशाना न बनाते तो जैकबूट 2 शुरू नहीं होता। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दक्षिण कश्मीर में पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग का दौरा कर वहां लोगों से खुद बातचीत की थी। जैकबूट-2 में दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को दो वर्गों में रखा गया। पहले वर्ग में पूरे दक्षिण कश्मीर में गतिविधियों चला रहे आतंकी थे जो सोशल मीडिया में भी सक्रिय थे। दूसरे वर्ग में वह शामिल थे जो कमांडरों के आदेश पर वारदात अंजाम दे रहे थे और अपने-अपने इलाके में पोस्टर ब्वाय बन रहे थे। इसके तहत ही त्राल मे हमादखान, बुरहान कोका, आसिफ और लतीफ दास जैसे आतंकियों का सफाया किया गया। 

सूची में सबसे ऊपर था नाइकू 

जैकबूट-2 में नाइकू सबसे ऊपर था। ऐसे में पहले उसके ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए उसके 30 खबरियों को पकड़ा गया। इसके साथ ही उसके सभी प्रमुख ठिकानों को नष्ट किया गया। ठिकाने नष्ट होने के बाद वह अपने गांव में मां से मिलने गया और यहीं वह जाल में फंस गया। 

मकान की छत पर बना रखा था ठिकाना

 उसने एक रिश्तेदार के मकान में टिन की छत के नीचे अपना ठिकाना बना रखा था। ऐसी जगह आमतौर पर कश्मीरी घर का बेकार सामान रखते हैं। यहां से मकान के आस-पास के घरों और गलियों में आसानी से निगाह रखी जा सकती थी। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि हम छह माह से रियाज नाइकू के पीछे पड़े हुए थे।  उसने एक रिश्तेदार के मकान में टिन की छत के नीचे अपना ठिकाना बना रखा था। ऐसी जगह आमतौर पर कश्मीरी घर का बेकार सामान रखते हैं। यहां से मकान के आस-पास के घरों और गलियों में आसानी से निगाह रखी जा सकती थी। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि हम छह माह से रियाज नाइकू के पीछे पड़े हुए थे। 

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