कचरे के ढेर पर फेंक गई थी मां, 17 घंटे बाद अस्पताल में मौत

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वीआईपी रोड पर मिली नवजात इंफेक्शन का शिकार हुई, उसके नाक और मुंह से बहने लगा था खून
भोपाल- जन्म देने के 4-5 घंटे बाद ही मां ने कचरे के ढेर पर छोड़ दिया। वीआईपी रोड पर जहां फेंका वहां घुप अंधेरा था। नवजात रोते-रोते इतनी थक गई थी कि वो कराहने लगी थी। मंगलवार रात करीब 9 बजे कुछ राहगीरों ने आवाज सुनी तो कचरे के ढेर तक पहुंचे। देखा एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी हुई थी। राहगीरों ने डायल-100 और एंबुलेंस 108 को फोन लगाया। पुलिस पहुंची और नवजात को हमीदिया पहुंचाया। मगर, अफसोस करीब 17 घंटे बाद ही बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई।
डाॅक्टराें के मुताबिक नवजात इंफेक्शन का शिकार हुई थी। उसकी नाक और मुंह से खून बहने लगा था। बच्ची काे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। ऐसे में उसे काेराेना का सस्पेक्ट मानकर सैंपल भी लिया गया है। हालांकि, उसकी जांच रिपाेर्ट निगेटिव आई है।
कॉड लगाने के तरीके से पता चल रहा था कि यह किसी डाॅक्टर या स्टाफ ने ही लगाई हाेगी
जीएमसी के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट की एचओडी डाॅ. ज्याेत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि नवजात का वजन सिर्फ 1.3 किलाे था। डाॅक्टराें का कहना है कि नवजात कमजाेर थी। भूख और इंफेक्शन भी उसकी माैत की वजह हाे सकती है। जब बच्ची काे हमीदिया अस्पताल लाया गया ताे उसके अमलाइकल काॅड (गर्भनाल) में प्लास्टिक की नीले रंग की क्लिप लगी हुई थी। यह क्लिप सामान्यत: अस्पताल और नर्सिंग हाेम में डिलीवरी के दाैरान बच्चे की अमलाइकल काॅड काटने के दाैरान लगाई जाती है। काॅड लगाने के तरीके से ही पता चल रहा था कि यह किसी प्रशिक्षित डाॅक्टर या स्टाफ ने ही लगाई हाेगी। सूत्राें की मानें ताे बच्ची के पैर हल्के नीले थे, इससे यह आशंका है कि बच्चे का फुट प्रिंट लेने के बाद कलर पाेंछ दिया गया हाेगा।
इधर, बीआरटी कॉरिडोर बस स्टाॅप पर मिले नवजात की नहीं मिली मां
बीआरटीएस बस स्टॉप के पास छोड़े गए शिशु की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उसकी मां को ढूंढने की जिम्मेदारी बाल कल्याण समिति ने चाइल्ड लाइन को सौंपी थी। चार दिन बाद चाइल्ड लाइन ने रिपोर्ट में बताया कि उनकी टीम और लोकल वॉलेटियर की मदद से बच्चे की मां को ढूंढा गया, लेकिन वह नहीं मिली। पुलिस भी मां को ढूंढने में असफल रही। समिति के राजीव जैन ने बताया कि चाइल्ड लाइन ने बताया कि जहां बच्चा छोड़ा गया था, वह स्थान न तो दुकानों के और न ही बस स्टॉप के सीसीटीवी कैमरे की रेंज में आ रहा है। यहीं बात बागसेवनियां पुलिस भी कह रही है। एसआई रमेश सिंह का कहना है कि जिस हुलिए की महिला के विषय में बताया गया है वह मिसरोद से लेकर एमपी नगर तक कहीं भी दिखाई नहीं दी है।

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