कोरोना के चलते मांग बढ़ने पर एनपीपीए ने मेडिकल ऑक्सीजन की अधिकतम कीमत निर्धारित की

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नई दिल्ली, प्रेट्र। कोविड-19 महामारी के चलते मांग बढ़ने के कारण मेडिकल ऑक्सीजन की अधिकतम कीमत निर्धारित कर दी गई है। उचित दर पर ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने छह महीने के लिए इसकी अधिकतम कीमत निर्धारित की है।
चार गुनी बढ़ चुकी है ऑक्सीजन की मांग-रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि यह स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि ऑक्सीजन की मांग लगभग चार गुनी बढ़ चुकी है। पहले 750 टन प्रतिदिन ऑक्सीजन की खपत थी, जो अब बढ़कर 2,800 टन प्रतिदिन हो गई है।
सरकार ने एनपीपीए से उचित दाम निर्धारित करने के लिए कहा था-ऑक्सीजन की उपलब्धता और इसकी कीमत निर्धारित करने का मामला भारत सरकार की अधिकार प्राप्त समिति के अंतर्गत आता है। इसने एनपीपीए से उचित दाम पर तरल मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इसका अधिकतम उत्पादन मूल्य निर्धारित करने के लिए कहा था। इसने ऑक्सीजन सिलेंडरों का भी अधिकतम उत्पादन मूल्य निर्धारित करने का अनुरोध किया था।
कोरोना के चलते मांग बढ़ने पर उठाया कदम-एनपीपीए ने 25 सितंबर को हुई अपनी बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया था। इसने महामारी के कारण उत्पन्न आपातकालीन स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत जनहित में असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करने का फैसला किया। इसने तरल मेडिकल ऑक्सीजन और मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता और उसकी कीमत को तत्काल नियमित करने का फैसला किया।
तरल मेडिकल ऑक्सीजन की अधिकतम कीमत 15.22 रुपये प्रति हजार लीटर-एनपीपीए ने उत्पादनकर्ता के लिए तरल मेडिकल ऑक्सीजन की अधिकतम कीमत 15.22 रुपये प्रति हजार लीटर निर्धारित की है, जिसमें जीएसटी शामिल नहीं है। सिलेंडर भरने वाले के लिए ऑक्सीजन की अधिकतम कीमत 25.71 रुपये प्रति हजार लीटर होगी। इसमें भी जीएसटी शामिल नहीं है। परिवहन की लागत राज्य स्तर पर निर्धारित होगी।

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