संयुक्त राष्ट्र। आतंकी संगठन आइएस सीरिया में एक बार फिर से संगठित हो रहा है। धार्मिक कट्टरता बढ़ाकर वह चंदा एकत्रित कर रहा है। साथ ही अपना प्रशिक्षण और तंत्र भी विकसित कर रहा है। हिंसाग्रस्त सीरिया को लेकर यह चिंता में डालने वाली स्थिति है। इस स्थिति में सीरिया को अलग नहीं रखा जा सकता। यह बात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद दरवाजे के पीछे सीरिया पर हुई बैठक में भारत ने कही है।
बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने ट्वीट कर कहा, बाहरी ताकतों को सीरिया की संप्रभुता के उल्लंघन की छूट नहीं दी जा सकती। वहां पर चल रही राजनीतिक प्रक्रिया की दुनिया अनदेखी नहीं कर सकती। वहां की राजनीतिक व्यवस्था में आपसी विश्वास की कमी बड़ी समस्या पैदा कर रही है। आतंकवाद को इसी का फायदा मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 12वीं रिपोर्ट में सीरिया की स्थिति पर चिंता जताई गई है। कहा गया है कि उत्तर-पूर्वी सीरिया में आइएस के करीब 11 हजार आतंकी मौजूद हैं। जो संगठित होकर गतिविधियां शुरू करने के लिए मौके का इंतजार कर रहे हैं। इन आतंकियों में 5000 सीरिया के, 1600 इराक के, 1700 विदेशी लड़ाके और 2500 ऐसे हैं जिनकी नागरिकता के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सीरिया पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत जेयर पेडर्सन ने भी कहा कि सीरिया में शांति प्रयासों के लिए रचनात्मक अंतरराष्ट्रीय प्रयास की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय स्थितियों पर नजर रखने वाले कार्यालय के अनुसार सीरिया में करीब 80 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे रह रही है। वहां लोग कई तरह के खतरे, अस्थिरता, अवैध हिरासत, अपहरण जैसी समस्याएं झेल रहे हैं। यह सब विभिन्न इलाकों में कब्जा जमाए कई समूह कर रहे हैं। सीरिया को इन सबसे निजात दिलाने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास की जरूरत है।
लीबिया में राजनीतिक प्रक्रिया का स्वागत
हिंसा से बर्बाद हो चुके उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू होने का भारत ने स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की लीबिया पर प्रतिबंधों की कमेटी की अध्यक्षता करते हुए भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने वहां गठित अंतरिम एक्जीक्यूटिव अथॉरिटी का स्वागत किया। इस अथॉरिटी में देश के सभी समूहों का प्रतिनिधित्व है। तिरुमूर्ति ने ट्वीट किया- हम लीबिया में शुरू हुई राजनीतिक प्रक्रिया का मजबूती के साथ समर्थन करते हैं। उल्लेखनीय है कि लीबिया में आगामी 24 दिसंबर को चुनाव प्रस्तावित हैं। उसी में नई सरकार को चुना जाएगा।

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