मन घोड़े की तरह होता है,उसे लगाम लगाने की आवश्यकता पड़ती है – चहल

मन घोड़े की तरह होता है,उसे लगाम लगाने की आवश्यकता पड़ती है। मनुष्य में बुद्धि नामक ऐसा तंत्र है जो शक्ति शाली होता है। व्यक्ति को एक लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है। आपके लिए आगे बढ़ने की वजह होती है,तो आपको उस कार्य में उत्साह नजर आता है।
सिवनी। मन घोड़े की तरह होता है,उसे लगाम लगाने की आवश्यकता पड़ती है। मनुष्य में बुद्धि नामक ऐसा तंत्र है जो शक्ति शाली होता है। व्यक्ति को एक लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है। आपके लिए आगे बढ़ने की वजह होती है,तो आपको उस कार्य में उत्साह नजर आता है। चाहे हम किसी नौकरी में जाएं या व्यापार के क्षेत्र में जब हमें लंबे समय तक अपने कार्य को करने के लिए मौका मिलता है तो हम अपनी शत-प्रतिशत ऊर्जा उस कार्य में लगा देते है। यह बात बात गर्ल्स कॉलेज बिछुआ से स्व-रोजगार विषय पर व्याख्यान देने पहुंची कविता चहल ने मप्र विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्थानीय गर्ल्स कॉलेज में आयोजित सेमीनार के दौरान छात्राओं को संबोधित करते हुए कही।
कविता चहल ने कहा कि अगर हम जो व्यवसाय कर रहे है, उसमें हमारे द्वारा बेची जानी वाली वस्तु का हमारे पास स्टाक हो,और बाजार में अधिक मांग हो तो निश्चित ही उसका लाभ हमें मिलता है। वर्तमान में हम स्व-रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर तभी बन सकते है,जब हम अपने व्यवसायिक ब्रांडिग और बिक्री को लेकर जागरूक होंगे। वर्तमान में नाबार्ड डेरी योजना वा ड्राईफूड के लिए हमे विदेशों पर आश्रित रहते थे। लेकिन अब हमारा देश स्वयं आत्मनिर्भर हो गया है। इसी तरह जीवन को लेकर लाइफकोचर जैसे विषय को लेकर भी अनेक अवसर मिल सकते है।
इसी तारतम्य में जिला अस्पताल डिंडौरी के मलेरिया अधिकारी डॉक्टर ब्रजेश पटेल ने राष्ट्रीयवाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत कहा कि मैने छोटे से कस्बे से अपनी शिक्षा प्रारंभ की,और कभी भी हिम्मत नही हारा। जिसका परिणाम है कि मैं अपने लक्ष्य पर निरंतर अग्रसर हो रहा हूं। मलेरिया रोग होने से व्यक्ति कमजोर हो जाता है,और ऐसी स्थिति में लोगों को इस रोग से मुक्त कराने के लिए हमें यह जानना जरूरी है कि क्यूलेक्स नामक मच्छर से मलेरिया व एंडीज नामक मच्छर से डेंगू, चिकनगुनिया, जीवा रोग व शेडफ्लाई से कालाजर रोग होते है। क्यूलेक्स नामक मच्छर में मादा जाति अंडे देती है। जिसके कारण यह रोग फैलता है। इसी तरह इनका समय निर्धारित होता है। नर जाति के काटने से यह रोग नहीं होता। इसके लिए अनेक प्रकार के बचाव दिए गए है। जैसे ज्यादा दिनों तक बर्तन व टंकी में पानी खुला ना रखा जाए। ग्रामीण अंचलों में इस रोग को रोकने के लिए मेडीटेशन मच्छरदानी व डीडीटी छिड़काव किया जाता है। यह रोग बारिश में अधिक होता है। जिससे बचने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते है। इस अवसर पर प्राचार्य अमिता पटेल ने कहा कि स्व-रोजगार व मलेरिया रोग से बचने के लिए दिए जा रहे व्याख्यान को ना केवल सुने, बल्कि अपने जीवन में भी अपनाएं। इसी उद्देश्य से यहां पर यह व्याख्यान श्रृंखला चल रही है।

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