सिवनी : दोपहर तक पेड़ों पर बैठी रहीं करोड़ों टिड्डियों ने चट कीं पत्तियां

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सिवनी । सिवनी जिले में टिड्डी दल को नियंत्रित करने में प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। शुक्रवार को रातभर कृषि, राजस्व व कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ बरघाट के नांदी, कल्याणपुर गांव में डेरा डाले रहे। क्षेत्र में सब्जी व उड़द, मूंग की फसलें तो कम लगी है। इसलिए करोड़ों टिड्डियों ने पेड़ों और हरी वनस्पतियों को अपना निशाना बनाया। रात करीब 2 बजे से टिड्डियों पर दवाइयों का छिड़काव फायर बिग्रेड से किया गया। सुबह तक छिड़काव की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन इसका ज्यादा असर टिड्डियों पर नहीं पड़ा। पेड़ों पर दवाओं की बौछार होते ही टिड्डियां दूसरे पेड़ों पर पहुंच जाती थी। हालांकि जिन पेड़ों पर छिड़काव किया गया वहां बैठी 40 से 50 प्रतिशत टिड्डियों के नष्ट होने का दावा प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। वहीं प्रत्यक्ष दर्शियों की मानें तो दवा के स्पे्र का टिड्डियों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ रहा है। टिड्डियों ने रात भर में हरे भरे सैकड़ों पेड़ों की पत्तियों को खाकर उजाड़ दिया है।
पेड़ों से पत्तियां गायब : टिड्डियों के हमले से बरघाट क्षेत्र के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। सुबह जिन पेड़ों पर टिड्डियां बैठी थीं वे पत्ती विहीन हो गए। राहत की बात यह है कि फसलों को टिड्डियों ने ज्यादा प्रभावित नहीं किया है।
दोपहर होते-होते टिड्डी दल सिंगपुर, चीचबंद, ईंदाबाड़ी, भोमा क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए बंडोल के चोरगरठिया तक पहुंच गया। शाम करीब 5 बजे चोर गरठिया के आसपास टिड्डियों का समूह दिखाई दिया। वर्तमान में टिड्डी दल करकोटी, मेहरा खापा, विजयपानी, उड़ेपानी, झीलपिपरिया, कंडीपार, नरेला, जमुनिया, मारबोड़ी के क्षेत्र में पहुंचा है।
संयुक्त दल ने कार्रवाई कर रात करीब 2 बजे से पेड़ों पर बैठीं टिड्डियों को नष्ट करने दवा का छिड़काव कराया। छिड़काव से कुछ प्रतिशत टिड्डियां नष्ट भी हुई हैं। लेकिन इनकी संख्या करोड़ों में है। अमूमन टिड्डियां सुबह उड़ने लगती हैं लेकिन दोपहर तक टिड्डियों का दल पेड़ों पर बना रहा। बाद में यह हवा के साथ आगे बढ़ गया।
डॉ एनके सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी।

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