जबलपुर के सुरक्षा संस्थान 506 आर्मी बेस वर्कशाॅप में बोफोर्स तोप में देशी कलपुर्जे लगाए जाएंगे। अभी चार तोप मरम्मत के लिए मिली हैंं।
जबलपुर,। सुरक्षा संस्थान 506 आर्मी बेस वर्कशॉप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के प्रयास चल रहे हैं। इसे लेकर संस्थान ने ‘बोफोर्स तोप (155एमएम/39 कैलिबर गन) में देशी कलपुर्जे लगाने की तैयारी की है। विदेशी तोप में देश के संस्थानों में बने कलपुर्जे लगाने का काम जल्द होने की उम्मीद है। सैन्य प्रशासन के अधीन 506 आर्मी बेस वर्कशॉप में विदेशी तोप में देशी कलपुर्जे लगाने का मुख्य कारण देश की तकनीक का विकास व सैन्य खर्च में कमी लाना है। वैसे 506 आर्मी बेस वर्कशॉप के कर्मचारी स्वीडन व इजराइल में बनीं तोप सुधारने में पारंगत हैं। इस संस्थान को सेना ने 4 बोफोर्स तोप मरम्मत के लिए भेजीं हैं। इन तोपों को खोलने पर कुछ कलपुर्जे खराब पाए गए, जिन्हें विदेश से खरीदी करने व लगाने में बड़ी राशि खर्च होगी।
यह कलपुर्जे बदले जाएंगे-संस्थान प्रबंधन ने बोफोर्स तोप का इंजन चलाने वाले ड्राइविंग वाल्व बदलना तय किया है। यह कलपुर्जा तोप को चारों ओर घूमने व विभिन्न कोण पर लक्ष्य साधने की शक्ति देता है।
अपग्रेड नहीं सिर्फ मरम्मत-आर्मी बेस वर्कशॉप में बोफोर्स तोप को अपग्रेड नहीं बल्कि देशी कलपुर्जे लगाकर सिर्फ मरम्मत की जा रही है। यह काम होने पर भी बोफोर्स तोप के संचालन व मारक क्षमता में कोई बदलाव नहीं होगा। जबकि गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने वर्ष 2011-12 में तत्कालीन महाप्रबंधक एसपी यादव के कार्यकाल में बोफोर्स तोप की तकनीक व कुछ हिस्सों को अपग्रेड करके इससे और भी बेहतर ‘धनुष तोप (155एमएम/45 कैलिबर गन) बनाई है।
35 साल पुरानी तोप-वर्ष 1985-86 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में भारत ने स्वीडन से 400 बोफोर्स तोप की खरीदी की थी। रक्षा मंत्रालय ने सेना को यह 29 किलोमीटर मारक क्षमता वाली तोप उपयोग के लिए सौंप दी।
पहले भी कराई मरम्मत-सेना लगभग 35 साल से बोफोर्स तोप (155एमएम/39 कैलिबर) का उपयोग कर रही है। इस दौरान कुछ तोपों में खराबी या टूट-फूट हुई, जिन्हें आर्मी बेस वर्कशॉप में भेजकर मरम्मत कराई जा चुकी है।
कारगिल में दिखाया था कमाल-भारतीय सेना ने देश की सीमा कारगिल में बोफोर्स तोप की मदद से दुश्मनों के परखच्चे उड़ाने का कमाल दिखाया था। यह तोप आज भी भारतीय सेना के बेड़े में रहते हुए दुश्मनों पर आग बरसाने तैयार है।
बोफोर्स तोप की मरम्मत में देशी कलपुर्जे लगाने से सेना का खर्च कम हो सकता है। आर्मी बेस वर्कशॉप इसी मंशा से काम कर रहा है। – अनिल शर्मा, लीडर स्टाफ साइड, आर्मी हेडक्वार्टर, जेसीएम-3 सदस्य

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