सिवनी – सरकार के द्वारा किसानो की खेती को फायदे की खेती बनाने के लिए अनेको प्रयास किये जा रहे है जिसके तहत सरकार के द्वारा कई सारी कल्याणकारी योजनाये कृषि विभाग के माध्यम से चलाई जा रही है जिसमें किसानो के द्वारा उन्नत और फायदे की खेती बनाने के लिए खेती में फसलो में डाली जाने वाली यूरिया डीएपी जैसी खादो को आपूर्ति सहकारी समीतियो और कृषि विभाग के अधीन डबललाॅक सेंटर के माध्यम से नगद खाद की आपूर्ति करने की व्यवस्था की गई है लेकिन डबल लाॅक सेंटर में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियो द्वारा किसानो को पर्याप्त खाद ना देेकर उसकी कालाबाजारी का काला सच उजागर करने जा रहे है।
266 में मिलने वाली खाद अािखर कैसे मिल रही 500 और 550 में
इस समय लखनादौन और केवलारी के देवघाट में डबललाॅक सेंटर के माध्यम से किसानो को खाद की आपूर्ति की जा रही है लेकिन कैसे की जा रही है वह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि कैसे किसानो को परेशान कर सडको पर सरकार के खिलाफ प्रर्दशन करने का असफल षडयंत्र अधिकारियो और डबल लाॅक सेंटर के अधिकारियो के द्वारा किया जा रहा है उसे बताने का प्रयास हम कर रहे है।
विश्‍वस्‍त जानकारी के अनुसार कैेसे दो सौ छियासठ में मिलने वाली खाद को किसान मजबूर होकर तीन सौ से लेकर पाॅच सौ और साढे पाॅच सौ रूपये में लेने को मजबूर है उसका काला सच आपके सामने उजागर कर रहे है।

एक किसान के नाम पर पच्चीस बोरी खाद लेकिन उसे मिल रही सिर्फ पाॅच बोरी
विश्वस्त सूत्रो से प्राप्त जानकारीे अनुसार सबसे पहले बताते है कि पीओएस मशीन अर्थात प्वाईंट आॅफ सेल मशीन में अपना आधार कार्ड देना होता है जिससे सत्यापन के बाद खाद दिया जाता है। डबललाॅक सेंटर बैठे इन लोगो के पास हजारो लोगो के आधार कार्ड नंबर है कई व्यापारी जो खाद की कालाबाजारी में लिप्त है जिन्हे ये खाद देते है यह नेटवर्क बहुत ही विस्तृत है। किसानो को ये लोग लाईन में लगवाते है जिनसे ये लोग आधार कार्ड के अलावा पावती मांगते है लेकिन पावती लेने का ऐसा कोई भी प्रावधान नही है एक किसान को पच्चीस से तीस बोरी खाद दे सकते है जमीन नही भी है तो भी बीस पच्चीस बोरी खाद दे सकते है लेकिन लाईन में लगे किसान को अपनी मशीन में अंगूठा लगवाकर पच्चीस बोरी की बजाए पाॅच बोरी खाद देते है शेष बीस बोरी खाद इनके स्टाक में शेष रह जाती है मान लिया एक दिन में पाॅच सौ किसानो से थम्ब मशीन के माध्यम से खाद दिया और प्रत्येक किसान को पाॅच बोरी देकर शेष बीच बोरी प्रति किसान के माध्यम से इनके पास स्टाक हो जायेगा दस हजार बोरी खाद की शाम के बाद मूल्यांकन कर उसकी कालाबाजारी की जाती है।
कैसे होती है कालाबाजारी
विश्वस्त सूत्रो से प्राप्त जानकारीे अनुसार आपको बता दें यहा पर एक अधिकारी जिसका नाम दीपेश बताया जा रहा है उसके द्वारा अधिनस्थ कर्मचारी चाहे वे संविदा वाले हो चाहे निजी कर्मचारी सबके नाम से दो – दो चार – चार पिकअप खरीदकर यहा लगा दी गई है जिसका उपयोग खाद की कालाबाजारी याने व्यापारियो के यहा खाद पहुॅचाने का काम किया जाता है डबललाॅक सेंटर में 266 रूपये में मिलने वाली खाद इस व्यापारियो के यहा तीन सो से लेकर साढे पाॅच सौ रूपये तक मे पहुॅचाई जाती है जिसकी व्यापारी कालाबाजारी करते है। रिश्तेदारो के नाम पर भी अधिकारी के द्वारा गाडिया खरीद दी गई है अधिकारी का चपरासी विनेश नामक के नाम पर भी एक गाडी है जिसमें ओम सांई अमरवाडा लिखा हुआ है। इस सब गाडियो के माध्यम मुख्यालय की सीमाओ से दूर जाकर फैले मकडजाल या सिंडिकेट को माल सप्लाई किये जाने का कार्य किया जाता है।
व्यापारियो के यहा पूरा ट्रक का ट्रक पहॅुच रहा
विश्वस्त सूत्रो से प्राप्त जानकारीे अनुसार किसानो को लाईन लगवाकर एक किसान को पाॅच बोरी दिया लेकिन उसके नाम पर अतिरिक्त बीस बोरी दर्शाकर उसकी कालाबाजारी की जाती है अब तक कोई ऐसा टेक्निकल सिस्टम नही था जिससे चैक किया जा सके कि किसके नाम पर कितनी खाद दी गई। बाकी बचा शेष माल कहां जा रहा है जिसको खाद दी गई उसकी जमीन है या नही। साथ ही यदि कोई किसान बही लेकर लाईन में रोज भी लग रहा है तो उसे ये कालाबाजारी करने वाले पाॅच बोरी खाद दे रहे है लेकिन लाईन में लग रहे किसान को कम माल देकर बाकी माल को ये लोग उपर की उपर गला देते है। याने व्यापारी के यहा सीधे ट्रक की ट्रक माल पहुॅचा दिया जाता है। और पीओएस से नील कर देते है।
नगद खाद जहां से मिल रही है वहा से हो रही खाद की कालाबाजारी
किसानो का खाता सहकारी समीति में होता है जहां से किसानो को खाद की आपूर्ति की जाती है जहां खाद की कालाबाजारी होने की संभावना कम होती है लेकिन डबल लाॅक के माध्यम से नगद खाद मिलने से खाद की कालाबाजारी हो रही है।
भीड का बहाना बनाकर हो रही खाद की कालाबाजारी
इनके पास कोई रिकार्ड मेंटेन नही करते है साथ ही भीड अनियंत्रित होने का बहाना बनाकर रिकार्ड नही रखने और ना देखने का बहाना बना दिया जाता है। जहां फसल लगी होती है जैसे केवलारी जनपद के देवधाट और लखनादौन जहां फसले लगाई गई है वहा खाद देने का प्रावधान है जहा से खाद की कालाबाजारी होती है।
संविदा कर्मी के जेब में लाखो का मोबाईल और मुख्यालय से लक्जरी गाडी से अपडाउन
विश्वस्त सूत्रो से प्राप्त जानकारीे अनुसार कालाबाजारी करने वाले अधिकारी कर्मचारियों की अचल संम्पत्ति की जाॅच उच्चस्तरिय जाॅच एंजेसी द्वारा की जानी चाहिए जिसमें इनकी सर्विस लगने से पहले इनके एवं इनके करीबी रिश्तेदारो के पास कितनी खेती थी कितने प्लाट थे मकान कैसा था इनके एवं इनकी पत्नियो के पास पास कितने जेवरात थे और अब इनके पास कहां – कहां कितना पैसा है और चंद बरसो में इनका बैक बैलेस कैसे बढ गया इनकी अचल संम्पत्ति कैसे बन गई साथ ही एक संविदा कर्मचारी जिसकी तनख्वाह अठारह हजार से बीस बाईस हजार रूपये होगी वह व्यक्ति मंहगी और लक्जरी गाडी से मुख्यालय से रोज अपडाउन करता हो साथ ही लाखो रूपये कीमती मोबाईल आखिर किसके दम पर और कैसे मेंटेन कर रहा है यह भी जाॅच का विषय है। इसके अलावा छिंदवाडा पांसिग की गाडियो के माध्यम से खाद ढुलाई का काम किया जा रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां क्या चल रहा है। इसके अलावा सोसायटी के कर्मचारियो के भी यही हालात है जिनके पास दस एकड जमीन नही लेकिन दो – दो सौ एकड दूसरे की जमीन ठेके पर लिया जा रहा है। दो – दो चार फोरव्हीलर आखिर कैसे मेंटेन किया जा रहा है।
गाडी छिदंवाडा की और माल सप्लाई किया जा रहा देवघाट सेंटर से
विश्वस्त सूत्रो से प्राप्त जानकारीे अनुसार इस काले धंधे का कालाकारोबार जिले के अंदर ही जनपदो और जिलो में फैला हुआ है इनके पास व्‍यापारियो के दसो हजार आधार कार्ड नंबर होते जिसके माध्‍यम से खाद की कालाबाजारी विगत अनेक वर्षो से होती आ रही है साथ ही जिनकी पन्द्रह हजार तनख्वाह नही उनके पास लाखो की सम्पत्ति कैसे आ गई। जिसमे दीपेश विनेश नायक और सुनील यादव ये मुख्य सरगना देवघाट डबल लाॅक सेंटर के बताये जा रहे है। जिनके पास भ्रष्टाचार कर काला धन इकटठा कर किस – किस को बांटा गया है या इसके पीछे किसका हाथ है उसकी जाॅच सबसे बडा प्रश्न है।