ब्रह्माकुमारी संस्थान के 90 वर्ष पूर्ण होने पर पत्रकारों का हुआ सम्मान’
अब सिवनी में देखोगे राधे कृष्ण की चलित झाकियां’
सिवनी। आध्यात्मिक क्रांति और मानवीय मूल्यों के अग्रदूत संस्थान प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के गौरवशाली 90 वर्ष (नवदशकोत्सव) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज स्थानीय केंद्र शांति शिखर (पीजी कॉलेज रोड) में एक विशाल मीडिया परिचर्चा एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिले के प्रबुद्ध पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने 90 साल के दिव्य संदेश और स्वर्णिम समाज के निर्माण पर गहन मंथन किया

ऐतिहासिक यात्रा और उपलब्धियों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान संस्थान की 90 वर्षों की स्वर्णिम एवं वैश्विक यात्रा पर प्रकाश डाला गया। ब्रह्मा कुमारीज की जिला प्रमुख ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी ने बताया कि सन् 1936 में हैदराबाद (सिंध) से शुरू हुई यह दिव्य यात्रा आज विश्व के 140 से अधिक देशों में एक विशाल आध्यात्मिक आंदोलन बन चुकी है。 संस्थान की मुख्य प्रशासिका दादियों के अतुलनीय त्याग और कुशल नेतृत्व ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा महिला नेतृत्व वाला संगठन बनाया है, जो नारी को ’शक्ति स्वरूपश् के रूप में प्रतिष्ठित करता है ।
मीडिया की भूमिका और सामाजिक संकल्प
परिचर्चा का मुख्य केंद्र समाज में सकारात्मक सोच का संचार रहा। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी जी ने अपने संबोधन में कहा कि परिवर्तन का आरंभ स्वयं से होता है और जब हम स्वयं को बदलते हैं, तो युग बदल जाता है। उन्होंने मीडिया जगत से एक सतयुगी दुनिया की नींव रखने में सहभागी बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण
पत्रकार भाई बहनों का सम्मान समाज को दिशा देने वाले मीडिया कर्मियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
’सांस्कृतिक प्रस्तुति’रू श्री राधे-कृष्ण और लक्ष्मी-नारायण की मनमोहक चलित झाँकियों ने उपस्थित जनों का मन मोह लिया। पत्रकार भाइयों ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की तारीफ करते हुए कहा कि आपने तो सिवनी में वृंदावन बना दिया ऐसे मनमोहक राधे कृष्ण की चलित झांकी के दर्शन लाभ सभी शहरवासियों को लेना चाहिए।
’पर्यावरण संकल्प’ संस्थान द्वारा 90 वें वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में 2026 से 27 तक 90 लाख पौधे लगाने के महा-अभियान के बारे में जानकारी दी गई।
’राजयोग प्रदर्शनी’ तनावमुक्त जीवन जीने के लिए राजयोग शिक्षा और कर्म सिद्धांत ष्जैसा कर्म करोगे, वैसा फल पाओगे फिर कब करोगे एवं राजयोग द्वारा अष्ट सिद्धियां की प्राप्ति, साथ ही भारत के उत्थान पतन की सत्य कहानी पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया । थ्रीडी शो के माध्यम से गहन शांति (मेडिटेशन) का अभ्यास कराया गया।
’विश्व में संस्थान द्वारा सेवा कार्य’
विज्ञप्ति में बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र ( यूएन ) द्वारा मैसेंजर ऑफ पीस से सम्मानित यह संस्थान वर्तमान में 8500 से अधिक सेवा केंद्रों के माध्यम से करोड़ों लोगों को नशामुक्ति, मूल्यनिष्ठ शिक्षा और राजयोग के मार्ग पर ला चुका है। माउंट आबू स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा रसोई घर संस्थान की तकनीक और आध्यात्म के संगम का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इस अवसर पर एक प्रयोग किया गया जिसमें एक चिट दी गई जिसमें पूछा गया कि अपनी – अपनी समस्याये लिखकर इस टेª में अपनी पर्ची रख दीजिए जिसके बाद हर एक को दूसरे की पर्ची उठाकर उसके सवालो के जवाब देने के लिए कहा गया सबने कुछ ना कुछ जवाब लिखकर दे दिया जिसके बाद अपनी पर्ची खुद उठाने को कहा गया जिसमें आपस में ही आपसी मंथन से सबको सबके सवालो के जवाब मिल गये अर्थात समस्या है तो उसका हल और जवाब भी हमारे पास ही है लेकिन हमें उस बात का आभास नही होता है या उस बात का अभाव है उस प्रज्ञा का अभाव है जो हमें ज्ञान नही करा रही है हमारी समस्यायो का जवाब नही दे पा रही है इसलिए पहले उस प्रज्ञा को इतना मजबूत कर लो कि वह प्रज्ञा समस्याओ से पहले ही समस्याओ का हल बता सकें।







