सिवनी – ब्रह्माकुमारी संस्थान के बारापत्थर में स्थित दिव्य ज्योति धाम सेवा केंद्र पर डॉक्टर ज्योत्सना नावकर,बहन सविता गौतम, बहन गीता ठाकुर, बीके ज्योति दीदी के आतिथ्य में मातृ दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। मातृ शक्तियों के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए डॉक्टर ज्योत्सना नावकर ने कहा कि जो स्त्री की रक्षा करता है वह युगों युगों तक हर किसी के दिल में अपना स्थान बना लेता है। रामायण का उदाहरण देते हुए कहा जब सीता माता अपने सम्मान की सुरक्षा के लिए चारों तरफ गुहार लगा रही थी तब एक मूक प्राणी गरुण ने आकर उनकी रक्षा की, अंतिम श्वास तक उनकी रक्षा के लिए लड़ते रहे, उनके इस संघर्ष की वजह से गरुण जी आज सभी के लिए सम्माननीय है। ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने कहा मां सुखी परिवार की आधारशिला विषय पर बात करते हुए यह बताया कि ज्यादातर परिवार में सास बहू के झगड़े देखने को मिलते हैं ,सभी यही चाहती है कि हमारी बहू संस्कारी हो। इस झगड़े से निजात पाने के लिए हर मां को अपनी बेटी को संस्कार देना पड़ेगा, तब वह बेटी जब किसी के घर बहू बनकर जाएगी तब संस्कारी रहेगी।

तो वही एक और महिला डाक्टर ने कहा मां अपने बच्चों में गर्भावस्था में ही अपनी सोच बोल और कर्म द्वारा संस्कार डाल सकती है ,यह संस्कार भरने का बहुमूल्य समय है। बहन सरिता गौतम ने कहा कि मां का पहला कर्तव्य है अपने बच्चों का हर वक्त साथ दे उन्हें भारतीय संस्कृति के अनुसार संस्कार दें। बीके ज्योति दीदी ने मात्र शक्तियों को यही संदेश दिया कि मां ही है जिसने दुनिया बनाई है मां जैसी दुनिया बनाना चाहे वह बना सकती है मां चाहे तो स्वर्ग बनाए चाहे तो नर्क बनाए क्योंकि बच्चा सबसे अधिक सीखने की उम्र में मा के साथ ही रहता है , लेकिन बच्चे को जो बोला जाता वह नहीं करता जो देखता है वह करता है इसलिए हम जैसे बच्चे चाहते है वैसे स्वयं को बनना होगा , सभी माताएं एक स्लोगन याद रखे कि जैसे कर्म हम करेंगे हमें देख बच्चे करेंगे। इस कार्यक्रम में शहर की माताओं बहनों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया मां और बच्चों के बीच एक दूसरे को कैसे मददगार बनना चाहिए नृत्य नाटक एवं अनेक एक्टिविटी के द्वारा सभी को प्रेरणा दी गई।








