शिकायत के बाद भी शिकायती पत्र पर ध्यान नही दे रहा जिला प्रशासन
सिवनी – जिले में निजी स्कूल एवं कोचिंग संस्थान कुकरमुत्तो की तरह जगह – जगह उग गए हैं। जिस पर विभाग तो उदासीन है ही तो वही सिवनी कलेक्टर भी इन पर रोक लगाने पर नाकाम साबित हो रही हैं। ज्ञात हो की नवागत कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन ने जब पदभार ग्रहण किया था तब अभिभावकों में हर्ष व्याप्त हुआ था कि अब उनकी नई कलेक्टर स्कूल एवं कोचिंग संस्थानों पर अपनी नजर बनाए रखेंगी किंतु देखने में आ रहा है की सिवनी कलेक्टर इस दिशा में रूचि नही ले रही है। निजी विद्यालयों की मनमर्जी अभिभावक पर भारी पड़ रही हैं एक आदेश के मुताबिक 16 साल से कम उम्र के सभी विद्यार्थियो को कोंचिग सेंटर में दाखिला नही देने के आदेश के बाद भी कई सारे ऐसे व्यवसायिक कोंचिग सेंटर नगर में संचालित हो रहे है जहां शासन के आदेश की धज्जिया उडाई जा रही है क्या इस बात की जानकारी प्रशासन को नही है ऐसा नही है लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान दिया ही नही |
दुकानदारो से अभिभावक महंगे दामों में कॉपी-किताब, ड्रेस खरीदने को मजबूर हो गए – इसके अलावा शहर के दुकानदारो से अभिभावक महंगे दामों में कॉपी-किताब, ड्रेस खरीदने को मजबूर हो गए है यहा तक कि दुकानदारो द्वारा पक्के बिल भी ग्राहको को नही दिये जाते है इस बात शिकायत एक समाचार पत्र के संपादक के द्वारा जिला कलेक्टर दिया गया लेकिन अब कि इस मामले में किसी भी तरह की कार्रवाई प्रशासन द्वारा उक्त दुकानदार के उपर ना किया जाना किस बात का संकेत है इसमें कुछ भी बताने जरूरत नही नगर में संचालित विद्यालयों की किताबें सिर्फ एक ही दुकान से मिलती है। प्रत्येक स्कूल की एक पसंदीदा दुकान है। उक्त निर्धारित दुकान पर ही स्कूल की कापी-किताब मिलेगी, दूसरी दुकान पर नहीं। निजी विद्यालय द्वारा अपने मनपसंद प्रकाशकों से कापी- किताबें छपवाकर उसे स्कूल द्वारा चयनित दुकानदार के माध्यम से महंगे दामों में बेचकर अभिभावक पर आर्थिक बोझ डालकर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। जबकि हर स्कूल की काॅपी किताब हर दुकान पर मिलना चाहिए ताकि अभिभावक किसी भी दुकान से काॅपी किताब खरीद सके और खासकर निजी विद्यालय अपनी मनमानी ना कर सके इसके लिए एक समीति सरकार को गठित करना चाहिए और उसी समीति के बनाये नियमो के तहत हर निजी स्कूल का संचालन किया जाना चाहिए। संचालक द्वारा स्वयं का सिलेबस अपनी मर्जी से चलाया जा रहा है। फिर भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा कोई कार्यवाही आज तक तक नहीं की गई। जांच के आदेश के बावजूद सिवनी बीईओ, बीआरसी, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई। जो दुकानदार कापी- किताबे बेच रहे है, वह पक्का बिल भी नहीं दे रहे है। वही बात करें कोचिंग संस्थानों की तो कोचिंग संस्थान वाले भी स्कूल में बच्चों के ऊपर दबाव बनाकर घर पर कोचिंग आने के लिए मजबूर कर रहे हैं। प्राइवेट स्कूल के शिक्षक कोचिंग संस्थान फीस के नाम से प्रत्येक विषय पर छात्र 7000 रुपए मांग रहे हैं। वहीं निजी स्कूल संस्थान में प्रति छात्र-छात्राओं की कुल वार्षिक फीस लगभग 32 से 35 हजार रुपए है। इस हिसाब से यदि विषय वार प्राइवेट कोचिंग संस्थान का योग करें तो प्राइवेट शिक्षक 6 विषय पढ़ाते हैं तो कोचिंग संस्थान कुल 42000 रुपए प्रति छात्र ले रहे हैं। इस प्रकार प्राइवेट कोचिंग संस्थान के शिक्षक जो स्कूल में पढ़ाते हैं उससे ज्यादा फीस वे कोचिंग में कमा रहे हैं।
नियम के मुताबिक सीबीएसई स्कूल के शिक्षक शिक्षिका बिना प्राचार्य या संस्था प्रमुख की अनुमति के बगैर निजी कोंचिग नही चला सकते – आपको बता दे सीबीएसई के नियम के मुताबिक सीबीएसई स्कूल के शिक्षक शिक्षिका बिना प्राचार्य या संस्था प्रमुख की अनुमति के बगैर निजी कोंचिग नही चला सकते लेकिन इसके बावजूद अपने घरो में सीबीएसई स्कूल में पढाने वाले कई शिक्षक शिक्षिका कोंचिग संेटर का संचालन कर रहे है और साल का लाखो करोडो रूपये कमाते हुए बिना टैक्स चुकाये सरकार को चूना लगा रहे है। ज्ञात हो की मध्यप्रदेश शासन, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय द्वारा प्रदेश के सभी प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ जांच अभियान के लिए आदेश जारी किए गए थे। जिसमें मध्य प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को पत्र लिखा गया कि वह प्रत्येक प्राइवेट स्कूल की जांच करें और जांच रिपोर्ट आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को भेजें। श्रीमती मंजूषा विक्रांत राय उप सचिव द्वारा जारी पत्र (मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम 2018 एवं नियम 2020 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही किये जाने विषयक।) में लिखा था कि, मध्यप्रदेश राज्य में निजी विद्यालयों द्वारा फीस में वृद्धि तथा उसके संग्रहण को विनियमन करने तथा उससे संसक्त एवं उसके आनुषंगिक विषयों के उपबंध करने हेतु मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम 2017 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2018 को अधिसूचित किया गया। जारी अधिनियम, 2017 की धारा 14 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियो को प्रयोग में लाते हुए राज्य सरकार, द्वारा फीस के अधिनियम और संबंधित विषयों हेतु मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम, 2020 दिनांक 2.12.2020 को मध्यप्रदेश राजपत्र में अधिसूचित किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल का पत्र दिनांक 20.05.2024 के द्वारा फीस तथा अन्य विषयों की जानकारी अशासकीय विद्यालय द्वारा पोर्टल पर 8 जून 2024 तक अपलोड करने हेतु निर्देश जारी किये गये हैं। कतिपय विद्यालय प्रबंधन द्वारा उपरोक्तानुसार शासन द्वारा जारी नियम निर्देशों का पालन नहीं किया जाकर म०प्र० निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम, 2020 का उल्लंघन किया जाकर अनियमितता करने की शिकायत प्राप्त हो रही है। तत्संबंध में निर्देशित किया गया है कि शासन द्वारा जारी उक्त अधिनियम / नियमों में उल्लेखित प्रावधानों का सम्यक रूप से पालन सुनिश्चित करें। कतिपय विद्यालयों के द्वारा फर्जी व डुप्लीकेट पाठ्य पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। इस बिंदु पर दिनांक 30 जून 2024 तक विशेष अभियान चलाया जाकर जांच पूर्ण कर चिन्हांकन करें कि क्या संबंधित विद्यालय प्रबंधन द्वारा इस प्रकार की कार्यवाही कर अनियमितताएँ की गई हैं। अनियमितताएँ पाए जाने पर संबंधित प्रकाशक एवं बुक सेलर्स के विरूद्ध नियमानुकूल कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। जांच उपरांत जांच प्रतिवेदन की एक प्रति आयुक्त, लोक शिक्षण, म०प्र० को उपलब्ध कराने का कष्ट करें। उक्त आदेश के परिपालन में जबलपुर, सीहोर तथा छिंदवाड़ा कलेक्टर के द्वारा प्राइवेट स्कूलों पर ताबड़तोड़ कार्यवाही की गई किंतु जिले में उक्त आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए प्राइवेट स्कूल संस्थाओं के ऊपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई और ना ही प्राइवेट कोचिंग संस्थानों पर लगाम लग पाई।







