सिवनी – सद्गुरु आध्यात्मिक केन्द्र के पंडित रंजीत पाठक ने बताया कि नागपंचमी का पर्व 9 अगस्त को सिद्ध व साध्य योग में मनाया जाएगा। इस साल नाग पंचमी पर कई अद्भुत योगों का निर्माण हो रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा संयोग करीब 500 साल के बाद बन रहा है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त के साथ ही अमृत काल, रवि योग, शिव वास योग, सिद्ध योग, साध्य योग, बव और बालव, करण योग के साथ हस्त नक्षत्र में रहेंगे। इस दिन दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे। इस समय में शिव परिवार संग नाग देवता की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी। साथ ही नाग देवता का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा। सिद्ध योग दोपहर 01 बजकर 46 मिनट तक है। इन योग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से जातक को उत्तम फल की प्राप्ति होगी। पाल पेट्रोल पंप के पास सर्किट हाउस के सामने एक चैपहिया वाहन खडा मिलेगा जिसमें वर्षो से पंडित जी विष्वसनीय पूजन सामग्री का विक्रय करते आ रहे है हमे जो भी पूजन सामग्री चाहिए हम किसी से भी ले तो लेते है लेकिन वह सामान गुणवत्तापूर्ण है कि नही यह पहचान हम नही कर पाते लेकिन हमे पंडित रंजीत पाठक ने विष्वास दिलाते हुए बताया कि हम पूरे मनोयोग और विष्वास के साथ जो भी हमारे पास आता है उसकी कुंडली देखकर उसमें जो भी दोष होता है वह हम उससे अवगत करा देते है जिसके बाद यदि उसे कुछ पूजन सामग्री की जरूरत होती है तो हमारे पास उपलब्ध होती है अन्यथा वह व्यक्ति कही से भी खरीदी करने के लिए स्वतंत्र होता है हमारे पास से कोई भी रत्न या पूजन सामग्री खरीदने पर हम विष्वास के साथ और सामग्री खरी देते है आगे पंडित रंजीत पाठक ने बताया कि पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी 8 अगस्त को रात 12 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी और 10 अगस्त को रात 03 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में 9 अगस्त को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन पूजा हेतु शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 01 मिनट से लेकर 08 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। नाग पंचमी पर कालसर्प दोष निवारण के लिए पूजा की जाएगी। पंडित पाठक ने बताया कि नाग पंचमी के दिन श्री सर्प सूक्त का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष और पितृ दोष का दुष्प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही इस दोष के कारण जीवन में होने वाले हर कष्ट से मुक्ति मिल सकती है।
शिवालयों में होगा विशेष अभिषेक – सद्गुरु आध्यात्मिक केन्द्र के पंडित रंजीत पाठक ने बताया कि कालसर्प दोष से पीडितव्यक्ति चांदी, तांबे एवं लोहे से बने सर्प भगवान शिव को चढ़ाकर दूध व गंगाजल से अभिषेक करें। इससे बाधाओं से मुक्ति मिलेगी। इस मौके पर शहर के विभिन्न शिवालयों में भगवान शिव का विशेष अभिषेक और पूजन किया जाएगा। शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
कालसर्प दोष शांत करने के उपाय – मोर या गरुण का चित्र बनाकर उस पर नाग विषहरण मंत्र लिख कर 10 हजार बार जाप कर उसका दशांश हवन करने से काल सर्प योग की शांति होती है।
- भगवान विष्णु लक्ष्मी जी सहित गरुण पर विराजमान हों और गरुण के पैर में सर्प लटक रहा हो ऐसे चित्र को रोज पूजा करने से भी इस दोष की शांति होती है।
- नाग पंचमी के दिन सर्पाकार सब्जियों का सेवन न करें बल्कि उनका दान करें।
- नागपंचमी के दिन नौ नाग मण्डल का अपने घर के मुख्य द्वार पर बनाए और नित्य धूप दीप के साथ पूजन करें।
- शुद्ध चांदी का सर्प बनवाकर पूजा स्थल पर स्थापित कर नित्य प्रति पूजन करें।







