ना एमबीबीएस और ना डीफार्मा ना बीफार्मा हो रहा मरीजो का ईलाज , बेची जा रही एलोपैथी दवाईयां
सिवनी ( संवाददूत ) – जिला मुख्यालय से लगभग 47 किलोमीटर दूर पलारी चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत चंदनवाडा अंतर्गत बगलई ग्राम में बीएमओ और सीएचएमओ को ढेंगा दिखाते हुए धडल्ले से बिना एमबीबीएस की डिग्री के ग्रामीण लोगो का ईलाज करते हुए एलोपैथी दवाइयो की बिक्री कर रहा है आपको बता दे एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के लिए साढे पांच साल लग जाते है जिसके बाद यदि किसी को दवाई दुकान खोलना हो तो उसके लिए बाकायदा बीफार्मा और डी फार्मा चार साल का कोर्स होता है उसे करना होता है और यह बैचलर डिग्री कोर्स है जबकि डी फार्मा 2 साल का डिप्लोमा कोर्स है ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से बगैर रजिस्ट्रेशन और बिना डिग्री के के.के.सराठे अपने दो साथियो के साथ क्लिनिक संचालित कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग को इस फर्जीवाडे की भनक तक नही यह है विचारणीय प्रष्न
इस पूरे मामल में स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के कुंभकर्णी नींद में सोए रहने पर क्लिनिक पर झोलाछाप डॉक्टर लोगों का इलाज कर रहा है। जहां पर डाक्टर के पास एक इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की मषीन दिखाई दी इसके अलावा एक एलसीडी के अलावा एक र्प्रिटर दिखाई दिया जिससे मरीजो की जॉच रिपोर्ट दे देता है।

बिना बीफार्मा डी फार्मा डिग्री के बेच रहा दवाईया
सबसे आष्चर्य का प्रष्न यह है कि यह झोलाछाप डाक्टर जैनरिक दवाये भी दे रहा है अब विचारणीय प्रष्न यह है इन झोलाछाप डाक्टरो के सूत्र कितने बडे क्षेत्र में फैले है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूर दूर से लोग इलाज कराने इनके पास आ रहे है सूत्रो की माने तो यह झोलाछाप डाक्टर एक दिन में 50 से 60 मरीज देखता है जिसमे बकायदा हर मरीज से 300 रूपये फीस भी वसूले जाते है जॉच के उपरांत अपने पास से ही एलोपैथी दवाये भी यही से बेची जाती है जिसका चार्ज मरीज को अलग से देना होता है याने आम के आम गुठलियो के दाम डाक्टर भी वही और मेडिकल स्टोर भी वही इस मामले की जॉच की जाये तो और भी कई खुलासे हो सकते है डाक्टर बनने के लिए कई वर्षो तक कठीन पढाई की जाती है जिसके बाद एमबीबीएस की डिग्री हासिल की जाती है इसके अलावा एलोपैथी दवाई दुकान के लिए बकायदा फार्मेसी का कोर्स करना होता जिसकी बकायदा फार्मेल्टी पूरी करने के बाद एलोपैथी दवा बेचने की अनुमति षासन से मिलती है लेकिन यहा ना तो एमबीबीएस की डिग्री की जरूरत है और ना ही फार्मेसी कोर्स करने की सूत्रो की माने तो लोगो का यहा हूजूम सबेरे के पॉच बजे से लग जाता है जो कि देर षाम तक चलता है। अब देखना बाकी है इस तरह के झोलाछाप डाक्टर मरीज को कौन सी दवाये दे रहे है कही ऐसा तो नही ये डाक्टर मरीज को घींगा जहर परोस रहे हो। सूत्रो की माने तो क्षेत्र में कई ऐसे झोलाछाप डाक्टर है जो कई गॉव बदल चुके है केस बिगडने पर ये उस क्षेत्र को छोडकर दूसरा क्षेत्र पकड लेते है अब देखना बाकी है कि गलत इलाज से इन झोलाछाप डाक्टरो ने कितनो की जान ली है। जो कि एक जॉच की विशय है।
क्लिनिक एक्ट का उल्लंघन भी किया जा रहा है
सूत्रो ने बताया कि यहां पर एलोपैथिक पद्धति से इलाज किया जा रहा है। क्लिनिक एक्ट का उल्लंघन भी किया जा रहा है। इलाज कराने आये मरीज को यहां से दवाएं, इंजेक्शन सीरीज के साथ ही बॉटल तक मिलती है जिसका बकायदा षुल्क देना होता है। सूत्रो की माने तो आखिर इस झोलाछाप डाक्टर के पास कुछ ही वर्शो में अकूत संपत्ति और करोडो के कई षहरो मे बंगले भी बताये जा रहे है इसके अलावा इसकी कई जगहो पर बेनामी संपत्ति भी बताई जा रही है। अब आगे देखना बाकी है कि केवलारी के बीएमओ और मुख्यालय के सीएचएमओ ऐसे झोलाछाप डाक्टरो पर क्यो कार्रवाई नही करते है सूत्र तो यह भी बताते है कि इस क्षेत्र में कुछ तरह के डाक्टरो की भरमार है जो भोलेभाले ग्रामीणो को अपनी चिकनी चुपडी बातें बताकर झूठी डिग्री बताकर उनका मनमाने ढंग से इलाज कर मोटी रकम वसूलते है कई बार तो मरीज की हालत बिगडने पर ये झोलाछाप डाक्टर मरीज को सरकारी हास्पिटल भेज देते है ताकि गलत इलाज की ढीगरा सरकारी हास्पिटल के चिकित्सको पर फोडा जा सके। इसके अलावा सूत्रो से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ये डाक्टर मल्टीपरपस डाक्टर है यह इंसानो के अलावा जानवरो का भी इलाज करता है अब देखना बाकी है कि इस डाक्टर का फर्जीवाडा खबर चलने के बाद जॉच होती है या नही।







