जब नोटिस मिला तब जाकर पटवारी ने सरकारी खजाने में जमा की राशि
सभी विभाग के अधिकारी कर्मचारियो की चल अचल सम्पत्ति की हो जाॅच
जाॅच राष्ट्रीय स्तर की जाॅच एजेंसी द्वारा की जाए

सिवनी – सरकारी खजाने में जमा होने वाली भू-राजस्व (डायवर्सन शुल्क) राशि के चालान में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। फर्जीवाड़े शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद राजस्व अधिकारियों ने संबंधित पटवारी को निलंबित कर विभागीय जांच प्रारंभ कर दी है। भू-राजस्व शुल्क जमा करने के नाम पर कई लोगों से ठगी का अंदेशा जताया जा रहा है। दरअसल शहर के एकता कालोनी निवासी भूमि स्वामी व भूतपूर्व सैनिक राजकुमार पुत्र झाडूराम साहू ने 31 अगस्त 24 को बबरिया-ज्यारत के हल्का पटवारी अरूण सनोड़िया को डायवर्सन शुल्क (भू-राजस्व) जमा करने 5400 रुपये दिए थे, जो चालान से सरकारी खजाने में जमा होना था। निलंबित पटवारी अरूण सनोड़िया से प्राप्त चालान देखकर भूमि-स्वामी राजकुमार साहू आश्चर्य में पड़ गया क्योंकि पटवारी को रुपये देने से एक दिन पहले 30 अगस्त 2024 की दिनांक में भू-राजस्व राशि 5400 रुपये सरकारी खजाने में जमा होना चालान में दर्ज था।
शिकायत मिली तब जाकर खुली पोल
फर्जीवाड़े की आशंका पर भूमि स्वामी राजकुमार साहू ने तहसीलदार मीना दशरिया के पास पहुंचकर इसकी शिकायत दर्ज कराई। इस पर एसडीएम मेद्या शर्मा ने जैसे ही संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। पटवारी ने अपने जवाब के साथ 26 सितंबर को भू-राजस्व राशि 5400 रुपये सरकारी खजाने में जमा करने का वास्तविक चालान एसडीएम के समक्ष पेश कर दिया। जिसकी जांच से स्पष्ट हो गया कि नोटिस मिलने के बाद पटवारी ने 26 सितंबर की दोपहर 2.13 बजे डायवर्सन शुल्क सरकारी खजाने में जमा किया है। वहीं भूमि-स्वामी को पूर्व में दिया गया चालान फर्जी तरीके से तैयार करने अंदेशा है। इस मामले में 27 सितंबर को सिवनी एसडीएम मेद्या शर्मा द्वारा संबंधित पटवारी अरूण सनोड़िया को निलंबित कर दिया है।

बढ़ी राजस्व अधिकारियों की चिंता
इस बीच भैरोगंज निवासी रामकुमार कुशवाहा के 89550 रुपये का चालान फर्जी होने का पता चलने पर राजस्व अधिकारियों के कान खड़े हो गए। अब राजस्व अधिकारियों द्वारा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शहर व आसपास के क्षेत्र में कितने लोगों को इस तरह के फर्जी चालान दिए गए हैं। इस धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का खेल कैसे चल रहा है। प्रारंभिक जांच में दोनों चालान के सीआरएन नंबर में हेराफेरी पाई गई है। इसमें चालान जमा करने की दिन, माह और वर्ष के आंकड़ों से नया नंबर कोड जनरेट होता है, जिसमें वर्ष 2031 प्रदर्शित हो रहा है। दोनों चालान से सरकारी खजाने में राशि जमा हुई है या नहीं इसकी पुष्टि करने एसडीएम मेद्या शर्मा ने कोषालय अधिकारी को पत्र लिखा है, जहां से जवाब मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। ताकि भूमि-स्वामियों के साथ हो रही ठगी को रोका जा सके।

सरकारी धन को रख लिया था अपने पास
27 सितंबर को एसडीएम द्वारा निलंबन आदेश में कहा गया है कि तहसीलदार से 24 सितंबर को मिले प्रतिवेदन में बताया था कि पटवारी अरुण सनोड़िया द्वारा भूमि-स्वामी को उपलब्ध कराई गई चालान की प्रति का परीक्षण में फर्जी होना पाया गया। पटवारी ने कारण बताओ नोटिस प्राप्त करने के बाद राशि सरकारी खजाना में जमा कराई है। सरकारी राशि अपने पास रखना व निर्धारित समयावधि में सरकारी कोष में जमा नहीं करना गंभीर वित्तीय अनियमित्ता की श्रेणी में आता है। पटवारी द्वारा प्रस्तुत उत्तर में स्वमेव इस बात की पुष्टिः हो रही है कि उनके द्वारा राशि नोटिस प्राप्त होने के बाद ही जमा की गई है न कि आवेदक से राशि प्राप्त होने के तत्काल बाद। इसके अतिरिक्त आवदेक को फर्जी चालान उपलब्ध कराया जाना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। मप्र सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील 1966 के नियम 9 में उल्लेखित प्रावधानों के अंतर्गत हल्का पटवारी ज्यारत-बबरिया अरूण सनोड़िया को निलंबित किया जाता है। राजस्व अधिकारियों के अनुसार पटवारी अरूण सनोड़िया दो वर्ष से बबरिया हल्का क्षेत्र में पदस्थ था। निलंबन से पहले पटवारी का स्थानांतरण जमुनिया और बंडोल किया गया था, लेकिन पटवारी ने संबंधित हल्कों का प्रभार नहीं लिया।

चल – अचल संम्पत्ति की हो जाॅच
यह तो एक मामला है इसके अलावा जितने भी पटवारी आई है उन सभी की सम्पत्ति की जाॅच की जानी चाहिए कि इनकी नियुक्ति पदस्थपना के पूर्व इनके एवं इनके करीबियो के पास कितनी चल अचल संम्पत्ति थी और आज की तारीख में इनके एवं इनके करीबियो के पास कितनी चल अचल सम्पत्ति है जिसकी जाॅच की जाए तो पता चल जायेगा कि आखिर इनके पास इतने वर्षो में इतना धन कहा से आ गया।

इनका कहना है
भूमि-स्वामी से शिकायत मिलने पर तहसीलदार से इसका परीक्षण कराया गया है। जांच में पटवारी द्वारा दिया गया चालान फर्जी पाया गया है। एक अन्य फर्जी चालान भी संज्ञान में आया है। इस मामले कोषालय अधिकारी को दोनों चालान की जांच करने पत्र भेजा गया है। वहां से रिपोर्ट मिलने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
मेद्या शर्मा, एसडीएम सिवनी