रूस्तमजी अवार्ड वर्ष 2016 में हवलदार सुंदर श्याम को मिल चुका है

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सिवनी – सुंदर श्याम तिवारी जिला सिवनी के ही रहने वाले है जिनकी प्राथमिक शिक्षा भी सिवनी में ही हुई है इसके साथ ही इन्होने बीएससी मैथ्स से स्नातक की डिग्री हासिल की। साथ ही डिप्लोमा इन एजुकेशन भी किया है,स्नातक के पश्चात पुलिस विभाग में नौकरी में सेवाये देते हुए 2016 में प्रधान आरक्षक सुंदर श्याम तिवारी को पुलिस विभाग के सबसे बडे रूस्तम जी अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
किसे दिया जाता है रूस्तमजी अवार्ड

पुलिस बल के अधिकारियों, कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, विशेषता अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित या नक्सल विरोधी अभियान में सफलता पर, सांप्रदायिक दंगों एवं गंभीर हालत में कानून व्यवस्था को सफल करने आदि के लिए पुलिस विभाग द्वारा प्रतिवर्ष नियम अनुसार यह पुरस्कार दिया जाता है इस पुरस्कार का प्रारंभ 22 अगस्त 2013 से किया गया है, यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में पुलिस बल को दिया जाता है।

  1. परम विशिष्ट स्तर पर – पुरस्कार राशि पाँच लाख रुपए अथवा रिवॉल्वर,12 बोर गन या 315 बोर रायफल एवं प्रमाण-पत्र।
  2. अति विशिष्ट स्तर पर – पुरस्कार राशि दो लाख रुपए या रिवाल्वर, 12 बोर गन या 315 बोर रायफल एवं प्रमाण-पत्र।
  3. विशिष्ट स्तर पर – पुरस्कार राशि पचास हजार रुपए एवं प्रमाण-पत्र दिया जाता है।
    रूस्तमजी अवार्ड क्या है और क्यो और किसे प्रदान किया जाता है
    पुलिस बल की वीरता एवं उनकी कुशलता के लिए वैसे तो बहुत से पुरुस्कार उन्हें दिए जाते हैं लेकिन केएफ रुस्तमजी पुरस्कार एक अलग ही विधि पुरस्कार हैं, पुरस्कार की नियमावली जानने से पहले हम आपको बताएंगे की के.एफ.रुस्तमजी कौन थे एवं पुलिस विभाग में इनका क्या योगदान था।
    खुसरो फरामुर्ज रुस्तमजी (केएफ रुस्तमजी) का सामान्य जीवन परिचय –
    केएफ रुस्तमजी का जन्मदिन 22 मई 1916 नागपुर में हुआ था,रुस्तमजी के माता-पिता पारसी धर्म के थे। रुस्तमजी ने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा नागपुर में ही पूरी की थी, सन् 1936 से 1938 तक नागपुर कॉलेज में सहायक अधीक्षक रहे एवं वर्ष 1949 में वह औरंगाबाद में उपमहानिरीक्षक के पद पर रहे।
    इसके बाद रुस्तमजी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी के वर्ष 1952 में मुख्य सुरक्षा अधिकारी रहे। रुस्तमजी को 1958 में मध्यप्रदेश पुलिस का प्रमुख बनाया गया इन्होंने मध्यप्रदेश में चंबल के डकैतों को परास्त किया जिनमें अमृतलाल, रूपासिंह, लखन सिंह, गब्बर सिंह प्रमुख रहे।
    रुस्तमजी को वर्ष 1965 में बीएसएफ का प्रमुख बनाया गया एवं वर्ष 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और बांग्लादेश की मुक्त कराने में योगदान दिया। सेवानिवृत्त के बाद रुस्तमजी को गृह मंत्रालय का विशेष सचिव बनाया गया एवं वर्ष 1991 में इस वीर योद्धा की पद्य विभूषण से सम्मानित किया गया एवं वर्ष 2003 में इस महान व्यक्ति का निधन हो गया।
    कहते हैं कि रुस्तमजी जी अपनी वीरता, कुशलता, एवं बुद्धिमानी से देश की सेवा करते थे।