’बैंक नहीं, लूट की दुकान की दुकान के लग रहे आरोप
’राष्ट्रीयकृत बैंक की आड़ में हो रही है खुलेआम अवैध वसूली बुजुर्ग, पेंशनधारी और मजदूर बन रहे हैं शिकार’

सिवनी ( पलारी ) – खैरा पलारी में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा इन दिनों लूट और शोषण का अड्डा बन चुकी है। बैंक से जुड़े क्यूसेक सेंटरों पर खुलेआम गरीब, मजदूर और बुजुर्गों को लूटा जा रहा है। बैंकिंग सेवा के नाम पर जो कुछ यहां हो रहा है, वह न सिर्फ मानवता के खिलाफ है, बल्कि सरकारी सिस्टम और बैंकिंग कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है।
बैंकिंग नियमों का भय दिखाकर ठगा जा रहा है।
बैंक में काम कराने पहुंचे भोले-भाले लोग, विशेषकर ग्रामीण, अनपढ़ और बुजुर्ग व्यक्तियों को बैंकिंग नियमों का भय दिखाकर ठगा जा रहा है। उन्हें यह कहकर गुमराह किया जाता है कि पैसे निकालने पर कुछ श्कमीशनश् देना अनिवार्य है। इस कमीशन के नाम पर 10,000 रूपये की निकासी पर 10, 20,000 रूपये पर 20 रूपये और 100 – 300 रूपये जैसी छोटी रकम पर भी 10 रूपये से 30 रूपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। यह सब बिना किसी रसीद, नियम या वैध प्रक्रिया के हो रहा है, और बैंक प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
अंगूठे के निशान लेकर पैसा निकालने के बाद जबरन उन्हें वसूली थमा दी जाती है।
सबसे अधिक परेशानी उन बुजुर्ग पेंशनभोगियों को हो रही है जो बैंक की लंबी कतारों और धक्का-मुक्की से तंग आकर फिंगरप्रिंट सेंटर की मदद लेते हैं। यहां उनके अंगूठे के निशान लेकर पैसा निकालने के बाद जबरन उन्हें वसूली थमा दी जाती है। ष्अगर पैसा नहीं दोगे तो अगली बार फिंगर नहीं लगेगा,ष् जैसी बातें आम हो गई हैं। यह स्थिति उस वर्ग के लिए अपमानजनक और पीड़ादायक है जिसे शासन-प्रशासन सबसे पहले सुरक्षा और सम्मान देने की बात करता है।
बैंक का एटीएम अधिकांश समय बंद पड़ा रहता है।
स्थिति तब और शर्मनाक हो जाती है जब देखा जाता है कि बैंक का एटीएम अधिकांश समय बंद पड़ा रहता है। जब एटीएम सेवा ही उपलब्ध नहीं होगी, तो जाहिर है कि आम जनता को फिंगरप्रिंट आधारित क्यूसेक सेवा का रुख करना पड़ेगा। और वहीं से शुरू होता है शोषण का यह पूरा तंत्र, जिसे बैंक के जिम्मेदार अधिकारी या तो देख नहीं पा रहे, या फिर जानबूझकर अनदेखा कर रहे हैं।
हमेशा भीड़भाड़, अव्यवस्था, न कोई बैठने की व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा।
बैंक के अंदरूनी हालात भी चिंताजनक हैं। हमेशा भीड़भाड़, अव्यवस्था, न कोई बैठने की व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा। बुजुर्गों के लिए प्राथमिकता जैसी कोई व्यवस्था नहीं दिखाई देती। कर्मचारी शिकायतों को अनसुना कर देते हैं। जब जनता आवाज उठाती है तो उसे यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि ये तो ऐसे ही चलता है।
क्या बैंक मैनेजर और शाखा प्रबंधन इस अवैध वसूली से अनजान हैं?
प्रश्न उठता है। क्या बैंक मैनेजर और शाखा प्रबंधन इस अवैध वसूली से अनजान हैं? अगर नहीं, तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर जानते हुए भी चुप हैं, तो क्या इसे मिलीभगत न माना जाए?
नही हुआ सुधार तो होगा जन आंदोलन
स्थानीय लोगों ने अब इस मामले को लेकर आक्रोश जताया है और बैंक प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही क्यूसेक संचालकों की यह अवैध वसूली बंद नहीं हुई, एटीएम सेवा बहाल नहीं की गई और दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं की गई, तो वे जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब जनता सिर्फ बयान नहीं, बदलाव चाहती है।
भोली भाली जनता को अंधेरे में रख हो रही वसूली
यह केवल खैरा पलारी की बात नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। अगर राष्ट्रीयकृत बैंक की छाया में ही जनता सुरक्षित नहीं है, तो यह सिर्फ अफसोसजनक नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा हमला है। खैरा पलारी बैंक ऑफ महाराष्ट्र खैरा पलारी की शाखा में क्यूसेक संचालकों की मनमानी आम गरीब जनता एवं बुजुर्गों से लूट करने में मनमानी की जा रही है भोली वाली जनता से बैंक से कम कमीशन मिलता है कहकर प्रत्येक व्यक्ति से जो 10000 रुपए निकलता है उसे 10 जो 20000 दो हजार रूपये निकलता है उसे 20 रूपये का कमीशन एवं जो 100 व 300 निकलता है उनसे 10 रूपये से 20-30 रुपए तक वसूले जा रहे हैं बैंक का एटीएम आए दिन बंद पड़ा रहता है राष्ट्रीयकृत बैंक होने के कारण बैंक में हमेशा भीड़ लगी रहती है इस कारण से आम गरीब पेंशन भोगी बुजुर्ग लोग फिंगरप्रिंट लगाकर पैसे निकालने को मजबूर है मजबूरी का फायदा उठाकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अधीन कर करने वाले क्यूसेक सेंटर में लूट मची हुई है आशा बैंक आफ महाराष्ट्र के बैंक मैनेजर से आगरा किया जाता है कि उक्त कमीशन करों को तुरंत हटाया जाए उनको ऊपर कारवाई की जाए जिससे कि आम जनता लौटने से बच सके और बैंक की साथ खराब होने छवि खराब होने से बच सके।

आभार – रज्‍जू ठाकुर खैरा पलारी