सिवनी – केवलारी के पलारी स्थित शिवशक्ति पैलेश में परमपूज्य शैलेन्द्रनंद बालप्रभुजी महाराज के मुखारबिंद से श्रीमदभागवत रूपी गंगा प्रवाहित हो रही है जिसमें श्रद्धालु बडे ही भक्ति भाव से कथा स्थल पर पहुॅच कर कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे है। कथा 7 जनवरी से प्रांरभ होकर 15 जनवरी 26 तक चलेगी इस अवसर पर रोज शिवलिंग निर्माण एवं रूद्राभिषेक का आयोजन प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक चल रहा है जिसके बाद दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक श्रीमदभागवत रूपी कथा का आयोजन किया जा रहा है। यदि आपके जीवन में कोई बडी समस्या है तो उसके लिए कथाव्यास से कथा स्थल पर ही 9 बजे से 10 बजे तक मिल अपनी समस्या बता सकते है। इस कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था श्रीमाता दिवाला समीति पलारी,श्रीराधेराध समीति पलारी,श्री शनिमंदिर निर्माण समीति पलारी एवं श्री सिद्धीविनायक समीति पलारी के द्वारा कार्यक्रम की व्यवस्था देखी जा रही है साथ ही यह पूरा आयोजन नगर के सुप्रसिद्ध गणमान्य नागरिको के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।


कथा के दूसरे दिन गोकर्ण और धुन्धकारी की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि कथा को व्यापार ना बनाया जाए साथ ही हमें रोज नही तो सप्ताह में तीन दिन नही तो अमास्या या पूर्णिमा को मंदिर अवश्य जाना चाहिए जिससे हमारे जीवन में ईश्वर की कृपा बनी रहती है। जब तक जीवन समाप्त ना हो जाये तक तक श्रीमदभागवत कथा का रसपान किया जाना चाहिए। साल में एकाध बार किसी भी तीर्थ में अवश्य ही जाना चाहिए। भागवत महात्म्य और प्रासंगिकता बताते हुए कथा व्यास ने बताया कि
कि भागवत ही भगवान का अक्षरात्मक रूप है और इसे सुनना मनुष्य जीवन के लिए कल्याणकारी है।
कथा श्रवण से ही जीव का उद्धार संभव है और सांसारिक विषयों से ऊपर उठकर भक्ति में लीन होना चाहिए।


धुंधकारी और गोकर्ण की कथा
धुंधकारी जैसे पापी व्यक्ति का गोकर्ण के माध्यम से सत्संग और भागवत कथा के श्रवण से उद्धार कैसे हुआ इस प्रसंग पर विस्तार से बताया गया।
ब्रह्मांड के विराट पुरुष के अंगों में विभिन्न लोकों (स्वर्ग, पाताल, भूलोक आदि) की कल्पना और सृष्टि के रहस्यों का वर्णन किया जाता है।
कथा में मुख्य संदेश के रूप में बताया कि ईश्वर से बढ़कर कोई सुख नहीं है या मनुष्य को सांसारिक भोगों में लिप्त न होकर भक्ति पर ध्यान देना चाहिए। कथावाचक का चरित्र पवित्र हो और श्रोता भगवान के प्रति समर्पित हों। धैर्य, दृढ़ निश्चय और सत्संग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
यह कथा मन को निर्मल करती है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग दिखाती है।