सिवनी- कलियुग में जीव का उद्धार भागवत से ही होता है, इसमे भगवान का तेज समाहित है कलियुग में जीव का उद्धार भागवत से ही होता है।
उक्ताशय के उदगार व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओ को कथा व्यास ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस की कथा बताया कि भगवान् ने अपना सारा तेज श्रीमद्भागवत में स्थापित कर दिया इसालिए जो भगवान का दर्शन का फल है वही फल श्रीमद्भागवत की पोथी के दर्शन से प्राप्त होता है । हम जो रथयात्रा निकालते हैं जो भागवत कथा न सुन पाए वो भागवत की पोथी का दर्शन कर ले, जो पापी लोग हैं वो भी दर्शन कर ले। कई बार पाप रोक लेते हैं, कुछ पुण्यात्मा होते हैं वो अच्छेकाम में जल्दी आ जाते पापियों को उनके पाप रोक देते हैं – जो पुण्यात्मा होते वो अपने आप खिंचे चले आते हैं वो नहीं देखते कौन करा रहा है, बुलाया भी नहीं बस भगवान् की कथा हो रही है तो चलो, भगवान् की कथा का सेवन, श्रवण और दर्शन सब पाप नाश करने वाला है।


नगर के प्रवेश द्वार पर स्थित ग्राम सीलादेही में स्थित सहज संतोष आश्रम में ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के संकल्प पूर्ण करते हुए द्वारका शारदापीठाधीश्वर परम् पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा एवं भगवान द्वारकाधीश मन्दिर में लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण तथा जगतआधारा राधारानी की नयनाभिराम प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान आज से प्रारंभ हुआ इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भगवान सगुण साकार होकर जन्म लेते हैं भगवान् के अवतार के अनेक कारण होते हैं अकेले कंस का वध करने के लिए उन्हें आने की आवश्यकता नहीं होती, भगवान कंस को तो वहीँ से बैठे-बैठे दंड दे सकते थे और उसका उद्धार कर सकते थे, पर लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण को लीलाएं जो उनको करनी थी, गौ माता, पृथ्वी माता, देवताओं को, ब्रह्मा जी, गोपियों, मुनियों, ऋषियों को जो वरदान दिए थे उन्हें पूरा करना था, इन्ही कारणों से पूर्णावतार भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लिया।


इस अवसर पर आचार्य महामण्डलेश्वर अग्निपीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि श्री रामकृष्णानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में नवधा भक्ति का उपदेश दिया एवं दण्डी स्वामी राधवानंद तीर्थ जी महाराज, दण्डी स्वामी दामोदरानंद जी महाराज भी उपस्थित रहे।
आज शोभायात्रा मठ से भगवान द्वारकाधीश मन्दिर प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ अनुष्ठान की शोभायात्रा मठ मन्दिर प्रांगण से दोपहर 02 बजे प्रारंभ होगी, मुख्यरूप से सीलादेही के सहज संतोष आश्रम में प्रतिष्टित होने वाले भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिकृति, और आकर्षण केंद्र होगी, साथ ही ग्रामीण क्षेत्र की ऐतिहासिक विशेषता रखने वाली शैला टोली नृत्य, गुन्नरशाही वाद्ययंत्र, नगर के अनेक बेंड पार्टियां, डीजे, अश्वारोही, सैकड़ो कलशधारी माता-बहनों की अगुवाई में रथों में सवार पूज्य शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज, अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्नऋषि रामकृष्णनंद जी महाराज, दण्डी स्वामी राधवानंद तीर्थ जी महाराज, दण्डी स्वामी दामोदरानंद जी महाराज शामिल रहेंगे।
यह शोभायात्रा मठ मन्दिर से प्रारम्भ होकर निषादराज चैक, ढीमरी चैक, एलआईबी चैक, दुर्गा चैक, गिरजा कुंड, नगर पालिका, शंकर मढिया, महावीर मढिया, शंकराचार्य चैक गणेश मंदिर में विराम होगी यहाँ से वाहनों द्वारा सभी आयोजन स्थल सीलादेही द्वारकाधीश मन्दिर पहुचेंगे।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण, अधिकारीगण, जनप्रतिनिधिगण शामिल होंगे। शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत होगा इस हेतु शोभायात्रा मार्ग को आकर्षक स्वागत द्वारों से सजाया गया है, सम्पूर्ण मार्ग में पुष्पवर्षा होगी।
आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओ से उपस्थिति की अपील की है।