सिवनी – मंगलवार को मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त कर्मचारी शिक्षक संवर्ग संयुक्त मोर्चा के कर्मचारियो ने एकत्रित होकर महामहिम राज्यपाल मध्यप्रदेश,मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन,स्कूल शिक्षामंत्री मध्यप्रदेश शासन शिक्षक पात्रता परीक्षा (ज्म्ज्) 2026 में शिक्षकों को सम्मिलित होने का आदेश लौक शिक्षण संचालनालय भोपाल 5.356 दिनाक 02 मार्च 2026 को स्थगित करने एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के टीईटी निर्णय पर पुर्नविचार के संबंध में ज्ञापन सौपा गया। ज्ञापन में आगे बताया गया है कि यह लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश है।
(1) माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिविल अपील 1385/2025,1386/2025 एवं अन्य समरूप याचिकाओं के पारित आदेश दि.-01 सितम्बर 2025 के निर्णय में लेख है, शिक्षा अधिनियम 2009 के प्रावधान 23 (1) एवं राष्ट्रीय शिक्षक परिषद ( एनसीटीई ) द्वारा जारी अधिसूचना सत्र 2011 के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक प्राथमिक, माध्यमिक शिक्षक, शिक्षिकाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होने के पश्चात ही शिक्षक के मान्य किया जायेगा।
गुरुजी, शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक नवीन शिक्षक संवर्ग आपसे अनुरोध करते हैं, माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिविल अपील के 4032/1995 म.प्र. शासन विरूद्ध दिनेश कुमार दि. 21 अक्टूबर 1997 के आदेशानुसार 1998 से 2000 तक शिक्षाकर्मी भर्ती विभागीय मापदंडों और नियमों के आधार पर हुई है।
(2) सन – 2005 में 2008 में संविदा शाला शिक्षक व गुरुजी की शिक्षक पात्रता परीक्षाएं आयोजित की गई है, उन परीक्षा को उत्तीर्ण करने के पश्चात ही शिक्षक नियुक्त किये गये है, तथा सन् 2011 के बाद नियुक्त शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चपन पश्चात प्राथमिक, माध्यमिक शिक्षक के रूप में अध्यापन 20-22 वर्षों से कर रहे हैं।
(3) माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिविल अपील क्रमांक 2634/2013 में स्पष्ट किया गया है, किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति पश्चात सेवा शों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
(4) लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश क्र/यूसीआर/सी/85/प्रा.मा.शि/2025-26/356 भोपाल दि. 02 मार्च 2023 के अनुसार प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालय में अध्यापन करने वाले अध्यापकों को आगामी दो वर्षों में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा, यदि निर्धारित अवधि में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते हैं तो ऐसे शिक्षकों को स्वयं सेवा निवृत्ति होने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान करने का आदेश दिये जायेंगे।
(5)10 वर्ग या अधिक की सेवा पूरी करने पर शासकीय सेवक की अनिवार्य सेवानिवृत्ति में सामाजिक सुरक्षा के तहत् पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदी करण का प्रवधान है, सन् 1997 से गुरूजी, शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक, नवीन शिक्षक संवर्ग एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) अभिदाता है स्वयं सेवा निवृत्ति होने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान करने पर सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा एवं जीवन मरण का संकट उत्पन्न होगा।
(6) टीईटी शिक्षक पात्रता परीक्षा कक्षा 1 से 8 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता जिसे आरटीई एक्ट – 2009 के तहत् जुलाई 2011 में लागू किया गया है, एनसीटीई के दिशा निर्देशानुसार म.प्र. शिक्षक भर्ती 2018 (स्कूल शिक्षा सेवा नियम) के तहत् उ.मा.शि.मा.शि.. प्राथ. शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा एमपीटीईटी अनिवार्य है।
(7) सन् 1997 से गुरुजी, शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक की नियुक्ति म.प्र.शिक्षक भर्ती नियम 2018 में आरटीई एक्ट – 2009 एवं टीईटी एक्ट – 2011 के लागू होने के पश्चात शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं ली गई और नियुक्त किये गये है, शिक्षाकर्मी भर्ती नियम 1997 अध्यापक भर्ती नियम 2008 तथा राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग (भर्ती एवं सेवा शर्ते) नियम 2018 में वर्णित सेवा शर्तों में ज्म्ज् शिक्षक पात्रता परीक्षा करना किसी भी प्रकार से अनिवार्य सेवा-शर्त के रुप में उल्लेखित नहीं है, इसलिए नवीन शिक्षक संवर्ग में 2018 में अध्यापक संवर्ग की नियुक्ति की गई है।
(8) यूजीसी एक्ट सन 1989 के बाद लागू है इसके पूर्व नियुक्त प्राध्यापकों पर लागू नहीं है, म.प्र. में नवीन शिक्षक संवर्ग के 1.60 लाख शिक्षकों टीईटी शिक्षक पात्रता परीक्षा आगामी सत्र-2026 में सम्मिलित होना है, निर्वाचन ( बीएलओ ) राष्ट्रीय डिजिटल जन गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य टीईटी परीक्षा की तैयारी, नियमित अध्ययन अध्यापन कार्य भी करना है जो व्यावहारिक नहीं है, जिसके फलस्वरूप म.प्र. की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी कक्षा 1 से 8 था के छात्रों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
(9) मध्यप्रदेश को अन्य प्रदेशों के निर्णय का अनुसरण करना चाहिए, जम्मू-कश्मीर व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई पुर्नविचार याचिका में निर्णय आने तक परीक्षा स्थिगित रखीं गई है। मध्यप्रदेश सरकार को रिव्यू पिटीशन दाखिल कर सर्वोच्च न्यायालय के पुनः निर्णय आने तक लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश पर तत्काल स्थिगित करना चाहिए।
ज्ञापन में आगे बताया गया है कि शासन से मान्यता एवं गैर मान्यता प्राप्त शिक्षक कर्मचारी संगठन, टीईटी शिक्षक संवर्ग संयुक्त मोर्चा म.प्र. आप से अनुरोध करते हैं अन्य प्रदेशों की सरकार के भांति मध्यप्रदेश सरकार इतने बड़े शिक्षक संवर्ग के हितार्थ पुर्नविचार याचिका माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर करें और स्कूल शिक्षा विभाग को निर्णय पश्चात ही शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का आग्रह किया है। इस अवसर पर मान्यता एवं गैर मान्यता प्राप्त कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग संयुक्त मोर्चा जिला-सिवनी (म.प्र.) इसके अलावा परमानंद डेहरिया प्रांताध्यक्ष एनएमओपीएस/एमपी नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम मध्यप्रदेश ,विजय शुक्ला जी सेवानिवृत्त शिक्षक,अविनाश पाठक जिलाध्यक्ष म.प्र.शिक्षक संघ सिवनी,गजेन्द्र बघेल जिलाध्यक्ष राज्य शिक्षक संघ,कपिल बघेल जिलाध्यक्ष आजाद शिक्षक संघ,एस. के. डहरवाल जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ,चितोड सिंह कुशराम जिलाध्यक्ष टीडब्लूटीई – अजाक्स,रामकृष्ण दुबे जिलाध्यक्ष क्रांतिकारी शिक्षक जन शिक्षक संघ संतोष सूर्यवंशी जिलाध्यक्ष अजाक्स,
कमलेश परिहार जिलाध्यक्ष एनएमओपीएस,आशीष बघेल जिलाध्यक्ष म.प्र. शिक्षक कांग्रेस,सुधीर ओएस जिलाध्यक्ष शासकीय अध्यापक शिक्षक संगठन जिला सिवनी म.प्र. अबशेष मिश्रा गुरुजी संघ जिलाध्यक्ष सिवनी,समस्त जिला ब्लॉक तहसील कार्य कारणी शिक्षक संगठन सिवनी सहित अन्य हजारो शिक्षक शिक्षिका शामिल रहे।





