’भाजपा समर्थन से गरमाया आंदोलन, पूरी तरह बंद रहा नगर’
सिवनी (बरघाट) सिवनी, 23 मार्च 2026 सिवनी – बालाघाट मार्ग की जर्जर हालत और लगातार हो रही दर्दनाक दुर्घटनाओं के खिलाफ बरघाट नगर में आज ऐसा जन सैलाब उमड़ा कि पूरा शहर ठहर गया, “मौत की सड़क” के नाम से कुख्यात इस मार्ग के विरोध में युवा विचार मंच के नेतृत्व में हुआ आंदोलन ऐतिहासिक और पूरी तरह सफल साबित हुआ,सुबह 7 बजे से दोपहर 4 बजे तक बरघाट पूरी तरह बंद रहा,छोटे से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान एक साथ बंद रहे, चप्पा-चप्पा बंद का नजारा इस बात का प्रमाण था कि यह सिर्फ आंदोलन नहीं, बल्कि जनता के अंदर भरा बारूद रूपी बम था जिसने एक बडा रूप लिया और स्थिति विस्फोटक हो गई।


’जनता का समर्थन इस विरोघ का सबसे बडा उदाहरण बना
इस आंदोलन की सबसे बड़ी और चैंकाने वाली खासियत रही कि भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज पदाधिकारी, तीन सांसद प्रतिनिधि और पूर्व मंडल अध्यक्ष ने खुलकर समर्थन किया ,इन नेताओं ने न सिर्फ आंदोलन का समर्थन किया, बल्कि अपने स्वयं के प्रतिष्ठान बंद रखकर जनता का साथ दिया यह दृश्य इस लिए भी खास रहा क्योंकि इसे सत्ता के भीतर से उठी जनभावना के रूप में देखा जा रहा है, जहां भाजपा से जुड़े लोग ही सड़क की बदहाली के खिलाफ खुलकर सामने आए,सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं को पहले ही यह जानकारी दी गई थी कि अप्रैल माह में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के तहत सड़क का भूमिपूजन प्रस्तावित है और सर्वे कार्य भी शुरू हो चुका है, इसके बावजूद उन्होंने जनता के साथ बंद में युवा विचार आंदोलन को समर्थन दिया, जो इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया।


’मौत की सड़क” के खिलाफ हजारों आम जनता सड़कों पर’
बरघाट नगर परिषद परिसर में आयोजित सभा में अधिक लोग शामिल हुए, युवा विचार मंच के नेतृत्व में रैली निकाली गई, जो नगर परिषद से तहसील कार्यालय तक पहुंची, सभा को संबोधित करते हुए मंच के सदस्यों ने चेतावनी दी,अगर सिवनी बालाघाट मार्ग का तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो हस्ताक्षर अभियान चलाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
’सामाजिक संगठनों ने भी बढचढकर समर्थन किया ’
इस जनआंदोलन को युवा मरार माली समाज, जिला सिवनी सहित कई सामाजिक संगठनों ने खुलकर समर्थन दिया, समाज ने साफ कहा कि, जनहित के हर मुद्दे पर हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
’गड्ढों में तब्दील सड़क बनी मौत का कारण’
वर्षों से जर्जर इस मार्ग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह सड़क अब “मौत की सड़क” बन गई है,लगातार हो रहे हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, एम्बुलेंस तक समय पर नहीं पहुंच पा रही, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना तक मुश्किल हो गया है।
’मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन’
आंदोलनकारियों ने बरघाट तहसीलदार अमृत लाल धुर्वे को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें 9 प्रमुख मांगें रखी गईं, जिनमें शामिल हैं,सिवनी बालाघाट मार्ग का शीघ्र फोरलेन निर्माण, निर्माण तक टोल टैक्स वसूली बंद दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को 25 लाख मुआवजा और नौकरी सड़क किनारे सुरक्षा व्यवस्था और साइड सोल्डर निर्माण,अस्पतालों में इमरजेंसी और सुविधा गांवों में स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक नियंत्रण टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस और क्रेन की व्यवस्था।
’अब नहीं तो उग्र आंदोलन होगा’
युवा विचार मंच ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और उग्र होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
’आंदोलन बना मिसाल’

बरघाट में आज जो हुआ, वह सिर्फ एक विरोध नहीं था,यह जनता की एकजुटता, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और व्यवस्था के खिलाफ उठती आवाज का बड़ा उदाहरण बन गया, सत्ता के भीतर से मिला समर्थन और जनता की एकता ने इस आंदोलन को ऐतिहासिक बना दिया, और, मौत की सड़क” के खिलाफ यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।