सिवनी – एक ऐसे शिक्षक का मामला प्रकाश में आया है जिसके द्वारा अपने नैतिक दायित्वो को छोडकर पैसो के लालच में दानव बन बैठा जो भ्रष्टाचार करने के के बाद मामले को रफा – दफा करने भोपाल के चक्कर लगा रहा है अब देखना होगा कौन सफेदपोश इस भ्रष्टाचारी शिक्षक के भ्रष्टाचार में पर्दा डाल रहा है आपको बता दें शा.उ.मा.वि के उच्च माध्यमिक शिक्षक एवं साथ दो जगह ड्यूटी कर राशि आहरण ( पीएमश्री ) में अनियमितता किये जाने का मामला प्रकाश में आया जहां देखने में मिला कि एक ऐसा शिक्षक जिसने 100 लोगो का खाना एक समय में अकेले खा लिया । पीएम श्री विद्यालय में प्रधानमंत्री की महात्वाकांक्षी योजना की अवधारणा के विपरीत विद्यालय एवं विद्यालय के विद्यार्थियों की प्रतिभा के विकास कार्य हेतु दिये महत्वपूर्ण राशि में अनियमितता की जानकारी मुझे प्राप्त हुई। अतः सूचना के अधिकार के तहत कैशुबक एवं बिलों की जानकारी ली गई, जिसमें पाई गई अनियतता की निम्नानुसार परिलक्षित हुई।
पद के चक्कर में बच्चो के भविष्य से किया खिलवाड़
एक शिक्षक द्वारा उच्च माध्यमिक शिक्षक को सहायक परियोजना समन्वयक का अतिरिक्त कार्य नवम्बर 2024 में दिये जाने के बाद शिक्षक द्वारा विद्यालय में उपस्थिति देना बंद कर दिया गया। पूरे समय शिक्षक द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिवनी में कार्य किया जाता है । जबकि शिक्षक को अतिरिक्त प्रभार दिया गया, अतः शिक्षक को पहले अध्यापन कराना है, फिर कार्यालय में उपस्थिति देना है। विद्यालय की हायर सेकेण्डरी कक्षाओं के महत्वपूर्ण विषय रसायन शास्त्र के अध्यापन से छात्र छात्रायें वंचित रह रहे है। विद्यालय शिक्षक अध्यापन तो कर नहीं. रहे किन्तु विद्यालय में पीएम श्री की आने वाली भरी भरकम राशि जो कि इस चयनित विद्यालय की भौतिक सुविधाओं में सुधार और पढ़ने वाले ग्रामीण क्षेत्र के छात्र छात्राओं के बहुमुखी विकास के लिये आवंटित की गई थी उसमें श्री शिक्षक ने कब्जा कर हड़प लिया।


दो कैशुबक और बिलों को देखने पर मिली भारी गडबड़ी

विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छाओं को भ्रमण कराये जाने के लिये लगभग दो लाख रुपये आये जिसमें वित्तीय नियनों की उपेक्षा करते हुये गलतियां की गई जिसमें दिनांक 24 जनवरी 25 को सिवनी में कार्य करते हुये भोमा के बच्चों का भ्रमण कराने के लिये सिवनी से रामनगर मण्डला का भ्रमण कराया गया जिसमें क्या उद्देश्य था यह तो संस्था के कर्णधारों को ही पता होगा, जबकि भ्रमण किसी ऐतिहासिक स्थल अथवा ज्ञानवर्धक स्थल अथवा जैवविविधता वाले स्थलों का कराना था। इस भ्रमण में 70000 रु. दो बस में व्यय किये गये। इस बस में नंदन ट्रैवल्स का बिल है जिसमें बस का नंबर उल्लेख नहीं है। इसके बाद 01 फरवरी 25 को भोमा से बरंगी डेम का भ्रमण में यही राशि 73500 रु. हरदेव ट्रैवल्स को आय की गई जबकि दूरी लगभग समान थी।
बस की क्षमता से दुगुनी संख्या में बैठाया बच्चों को खा गया पैसा
इस बिल में दो बसों का उल्लेख है जो नान एसी 2 बाई 2 है। एक बस में सवारी की अधिकतम संख्या 48 ही हो सकती है। अधिक सवारी यदि भरी जावे तो तो यह परिवहन नियमों की भी उपेक्षा है, साथ ही जब बच्चे भ्रमण करें तो इसका सावधानी से पालन अनिवार्य हो. जाता है, क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में बीमा संबंधी समस्या आती है। दिनांक 19 जनवरी 25 को दुर्गा ट्रैवल्स की ही एक बस भोभा से रामनगर की बस की गई जिसका किराया 19000 रु लगा है, अर्थात् यह या तो छोटी अस थी या फिर पहले किराया अधिक भुगतान किया गया। इसमें भी अधिकतम सीट 48 ही हो सकती है। पुनः दिनांक 01 फरवरी 2025 को एक बस भोमा से झोेतेश्वर गई जिसका किराया 18000 रु भुगतान किया गया। मतलब एक बस इसी तारीख को बरगी डैम भी गई और एक बस जोतेश्वर गई, अतः उसी बस में शिक्षक भी गये होंगे जिनके विषय का अध्यापन प्रभावित हुआ होगा और पढ़ाना छोड़कर भ्रमण ही होता रहा।
दिनांक 9 फरवरी 25 को फिर से हरदेव मोटर्स 2 बाई 1 बस जोतेश्वर ले जाई गई जिसका किराया 39900 रु. व्यय किया गया।

बिना तारीख का बिल लगाकर निकाला पैसा
दिनाक 28 मार्च 2025 को व्हाउचर क्र. 70 एवं 73 में भोमा से रामगढ़ किला के लिये गई जिसमें किस तिथि को बस गई उसका उल्लेख नहीं है किन्तु एक बिल 25400 रु का है तो दूसरे बिल में भी बिना तिथि के 25400 रु का बिल है। दोनों बसो में अधिकतम छात्र-छात्रा 48 गुना 2 96 ही छात्र छात्रा जा सकते थे। यह बस खाना पूर्ति के लिये लगाई जाना प्रतीत होता है।
जब एक से अधिक बार बस के माध्यम से बच्चों को भ्रमण कराया जाना था तो प्रतिस्पर्धा के लिये वित्तीय नियमों को अपनाकर न्यूनतन दरों पर बस किरायें ली जाकर शासन को हानि से बचाया जा सकता था।

200 बच्चों की जगह 300 बच्चो को खाने और नाश्ते का लगाया बिल
बिन्दु क्र. 2 में उल्लेखित भ्रमण कराये जान के समय बच्चों को भोजन भी कराया जाना था, तो इस में भी अनियमितता प्रदर्शित हुई। जैसे दिनांक 24 जनवरी 25 को नंदन ट्रैवल्स की अधिकतम 48 सीट की दो बस जाने की स्थिति में दं शिक्षक और 2 बस स्टाफ को जोड़ने पर अधिकतम 104 व्यक्तियों की यात्रा में भोजन के देयक भोमा से 34 किमी दूर केवलारी के देयक भुगतान हुये जिसमें 200रु. थाली के देयक लगे हैं, जो महानगरों की दरें है, ग्रामीण क्षेत्र में ये देयक अधिक हैं, यदि दो बार भोजनं इसी जगह ही कराया गया जो 208 थाली होना था जबकि 300 थाली के देयक भुगतान किये गये। इस देयक में सुबह का नाश्ता और शाम का नाश्ता भी इसी होटल कां लगा है जबकि बस रामनगर गई तो शाम का नाश्ता रामनगर का होना था, ऐसा कैसे किया गया कि बस स्कूल से 140 किमी. गई और स्कूल से 34 किमी दूर ही सुबह का नाश्ता दोपहर का भोजन, शाम का नाश्ता और रात्रि का भोजन एक ही जगह पर कराया गया। यदि पैक खाना भी लिया गया तो बच्चों को ठण्ड में ठण्डा खाना खिलाया गया जो बेहतर प्लान किया जाता तो स्थल पर गर्म भोजन कराया जा सकता था। व्हाउचर क्र. 21 इसी प्रकार व्हाउचर क्र. 25. में भी प्रक्रिया अपनाई गई। देयक में यात्रा में शामिल बच्चों से अधिक के देयक लगाये गये। व्हाउचर क्र. 28 में थाली को घटाकर 285 किया गया जो उपरोक्त 3.1. एवं 3.2 के संदेह की पुष्टि करती है।
व्हाउचर क्र. 70 एवं 73 में उल्लेखित यात्रा के दौरान भोजन के बिल नहीं लगाना फर्जी देयकों की पुष्टि करता है। क्योंकि दिनांक 04 फरवरी .25 की यात्रा में भी भोजन के देयक नहीं लगे है, इसका प्रमुख कारण है, इस रास्ते देयक से संबंधित होटल नहीं आती होगी।
एक कार्य के अलग – अलग भुगतान
व्हाउचर क्र. 2 से 5, 11, 13 एवं 74 से 75 में पुताई सामग्री एवं मजदूरी के भुगतान संदेहास्पद है क्योंकि जब इतना लंबा कार्य था जो एकमुश्त टेण्डर प्रक्रियां से कराया जाना था जबकि अलग-अलग भाग में 3 माह में एक ही कार्य के भुगतान किये गये जिसकी पुष्टि स्थल से कराई जानी आवश्यक है।
व्हाउचर क्र. 6 से 10, 12,14 में जो विज्ञान सामग्री क्रय की गई, क्या वास्तव में उक्त सामग्री छात्रापयोगी थी अथवा केवल भुगतान उद्देश्य था, विज्ञान सामग्री पाठ्यक्रम अनुरुप पतीत नहीं हो रही है, इसकी पुष्टि अन्य जिले के विज्ञान शिक्षकों से कराई जाना उचित होगा। साथ भण्डार क्रय नियमों 25000 रु. की सीमा से बचने के लिये टुकड़ों में देयक बनाकर भुगतान किया जाना पाया गया।
व्हाउचर क्र. 17, 19,24 एवं 66 में फर्नीचर के मामले भी देयक टुकड़ों वित्तीय नियमों से बचाव की दृष्टि से बनाये गये।
मंहगे दाम देकर खरीदी बच्चो की यूनिफार्म
व्हाउचर क्र. 30 से 33 में भी टुकड़ों में देयक बनाकर एक ही फर्म को भुगतान किया गया। यह भी वित्तीय नियमों से बचने का लिये किया गया।।
व्हाउचर 34 में छात्र-छात्राओं के वैच के लिये कपड़े बेचने वाली फर्म के देयक लगाये जिससे यह सामग्री मंहगी क्रय की गई जबकि इसे अन्य प्रकार से निर्माता से क्रय किया जाता तो राशि बचाई जा सकती थी।
व्हाउचर 35 में खेल सामग्री एवं पुरस्कार सामग्री एक ही फर्म से टुकड़ों में देयक बनाकर एकमुश्त भुगतान करना वित्तीय नियमों का घोर उल्लंघन है।

व्हाउचर 56 में शासकीय स्टेशनरी कलेक्टर दर पर लिये जाने के प्रावधान के बाद भी निजी फर्म से मनमर्जी से भुगतान किया गया।
हाउचर क्र. 56 में बच्चों के भविष्य के लिये उपयोगी पुस्तकों के स्थान पर कामिक्स जैसी अनुपयोगी पुस्तकें क्रय की गई।

भ्रष्टाचारी शिक्षक के जाॅच की उठी मांग
इसके अतिरिक्त अन्य देयकों में भी ऐसी अनियमितता पाई गई। शिक्षक को स्कूल में अध्यापन कराने के लिये समय नहीं है, किन्तु सिवनी में पूरे दिन कार्य करने के बाद भी एक ही समय में वित्तीय राशि व्यय करने भोगा चले जाते है, जिससे स्पष्ट है कि सिवनी में रहते हुये ही घर पर समस्त वित्तीय लेनदेन किये जाने का संदेह है, क्योंकि कैशबुक शिक्षक की हस्तलिपि में ही बनाई गई है। शिक्षक के प्राचार्य के निधन का इनके द्वारा अनुचित लाभलिया गया। मेरे द्वारा भण्डार पंजी कोटेशन एवं अन्य अभिलेख नहीं लिये गये लेकिन प्रारंभिक अवलोकन में गंभीर अनियमितता पाई गई। खबर प्रकाशन के बाद देखना होगा इस शिक्षक के खिलाफ जाॅच होने पर दोषी पाया जाता है नही।