घंटे तक इंतजार के बाद पत्रकारों ने किया बहिष्कार, जिम्मेदारो की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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सिवनी – सिवनी जिले में नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार के कार्यकाल की शुरुआत एक विवाद और मीडिया के बहिष्कार से हुई है। पहले दिन ही प्रशासन और चौथे स्तंभ के बीच समन्वय की कमी खुलकर सामने आ गई, जिससे जिले भर के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। जिला जनसंपर्क अधिकारी द्वारा आज शाम 5:30 बजे कलेक्टर सभाकक्ष में नवागत कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार द्वारा मीडिया प्रतिनिधियों के साथ परिचयात्मक बैठक आयोजित किए जाने की सूचना जारी की गई थी। जनसंपर्क अधिकारी द्वारा जिले के सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधियों से निर्धारित समय पर कलेक्टर सभाकक्ष में उपस्थित होने का विनम्र आग्रह भी किया गया था। सूचना का सम्मान करते हुए सिवनी जिले के सभी कलमकार समय से पहले ही कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंच गए थे। निर्धारित समय 5:30 बज गया। फिर 5:45 बजा, फिर 6:00 बज गया। लगभग आधे घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पत्रकार वार्ता प्रारंभ नहीं हुई। सबसे दुखद बात यह रही कि सभा कक्ष से पत्रकारों के लिए कोई सूचना नहीं आई कि मैडम अभी मीटिंग में हैं या बैठक कैंसिल है या थोड़ी देर में शुरू होगी। जनसंपर्क अधिकारी भी पत्रकारों के बीच से नदारद या मूकदर्शक बने रहे, उन्होंने कोई जवाबदेही नहीं ली। पत्रकार खुले प्रांगण में खड़े-खड़े इंतजार करते रहे, न बैठने की व्यवस्था की जानकारी दी गई, न पानी की। पत्रकारों का कहना है कि हम लोग अपना काम छोड़कर, खबरें छोड़कर प्रशासन का सम्मान रखते हुए समय पर आए थे, लेकिन प्रशासन ने हमारे समय की कोई कद्र नहीं की। जब काफी देर तक कोई सूचना नहीं आई तो सभी पत्रकारों ने आपस में चर्चा की और एकमत होकर निर्णय लिया कि यह पत्रकारों का अपमान है। इसके बाद सभी पत्रकार एकजुट होकर पत्रकार वार्ता का बहिष्कार करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर निकल गए। इस बहिष्कार में सिवनी के सभी वरिष्ठ और कनिष्ठ पत्रकार शामिल रहे। यह अपने आप में एक बड़ा संदेश है। जनसंपर्क अधिकारी की भूमिका पर सवाल?- जब कलेक्टर नई हैं तो जनसंपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी थी कि वे मीडिया और कलेक्टर के बीच बेहतर समन्वय बनाते। लेकिन आधे घंटे तक पत्रकार खड़े रहे और उनकी ओर से कोई कम्युनिकेशन नहीं आना, उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। कहा जाता है कि First Impression is the Last Impression. नवागत कलेक्टर की पहली ही बैठक में यदि मीडिया को इस तरह इंतजार करवाया जाएगा तो आगे प्रशासन और मीडिया के बीच मधुर संबंध कैसे बनेंगे? कलेक्टर मैडम को शायद अधिकारियों ने सही जानकारी नहीं दी। पत्रकार कोई फरियादी नहीं हैं। वे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं। वे जिला प्रशासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं। यदि उन्हीं का सम्मान नहीं होगा तो शासन की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कैसे होगा। बहिष्कार कर लौटे पत्रकारों ने मांग की है कि जिला जनसंपर्क अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें। भविष्य में कभी ऐसा न हो। नवागत कलेक्टर महोदया स्वयं पत्रकारों से अलग से चर्चा कर इस गतिरोध को खत्म करें। फिलहाल इस घटना के बाद सिवनी के पत्रकार जगत में रोष व्याप्त है और व्हाट्सएप ग्रुपों में इस मुद्दे पर तीखी चर्चा चल रही है। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या सफाई देता है।