सिवनी – हमारा भारत देश क़ृषि प्रधान देश कहलाता है और हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी ने भी जय जवान जय किसान का नारा। हमारे देश के किसान को समय पर खाद बीज और समय पर पानी मिल जाये इससे बडी बात किसानो के लिए कुछ भी नही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस देश का किसान लुट रहा है नगर से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित सिमरिया में क़ृषि उपज मंडी में यूरिया खाद की खूब कालाबाजारी की सूचनायें मिल रही है तो वही दूसरी ओर सरकार द्वारा किसानो की लागत कम और आय दुगुनी करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है लेकिन सिमरिया मंडी में संचालित यूरिया वितरण करने वाले सरकार की उस मंशा पर पानी फेरते हुए मनमानी करने पर उतारू है किसानो को मनमाने दामो पर यूरिया खाद बेची जा रही है 267 रूपये की खाद 425 रूपये में बेची जा रही है मरता क्या ना करता किसान लुटता जा रहा है और लूटने वाले किसानो को लूट रहे है। सूत्र तो यह भी बताते है कि सिमरिया मंडी में कुछ दलाल पल रहे है जिनके द्वारा 425 रूपये में यूरिया खाद किसानो को बेचने का काम किया जा रहा है। शासन द्वारा निर्धारित यूरिया खाद का मूल्य 267 रूपये तय किया गया है यह मूल्य प्रति बोरी का है और यदि कोई निर्धारित मूल्य से अधिक में यूरिया खाद बेचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी है लेकिन विचार करने वाली बात यह है कि इस मामले में क़ृषि मंडी सिमरिया के निकम्मे अधिकारी इस मामले में भी बोलने को तैयार नही है और ना ही मंडी अध्यक्ष का इस दिशा में कोई ध्यान नही है तभी तो यहा के कुछ भ्र्स्ट कर्मचारियो ने कुछ दलाल पाल कर रखे हुए है जब तक इन दलालो के पास किसान नही जायेगा तब तक किसान को यूरिया मिल ही नही सकती। दलाल पूरी तैयारी में यहा आते है और सूत्र तो यह भी बताते है कि इन दलालो के पास कुछ किसानो की फर्जी बही भी देखी गई है जिससे ये दलाल बही के माध्यम से यूरिया खरीद कर मानमाने दामो पर यूरिया खाद बेच रहे है अधिकारी और उनके पाले हुए दलालो के द्वारा यूरिया की कालाबाजारी के मामले में सिमरिया मंडी सबसे आगे है चौक़ चौराहे पर तो यह भी खबर सुनने को मिल रही है कि यहा के भ्रश्ट अधिकारियो को अपने दलालो से खाद की फैक्ट्री लगवा लेना चाहिए ये लोग मनमाने दामो पर यूरिया खाद बेच सके। संवाददूत जिला कलेक्टर से आग्रह करता है कि अपने विष्वसनीय सूत्रो से इस मामले की जाॅच कराई जाये तो सब कुछ स्पश्ट हो पायेगा जिससे किसानो को लुटने से बचाया जा सकता है।






