सिवनी – षुक्रवार 9 अगस्त को विष्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला कलेक्टर को महामहिम राश्ट्रपति के नाम ज्ञापन एसडीएम मेघा षर्मा को सौपा ज्ञापन में समाज के लोगो ने बताया कि जिला मुख्यालय सिवनी के हृदयस्थल में सह-सचिव स्थित दलसागर तालाब जो कि गोंडराजा दलपतषाह के द्वारा निर्मित किया गया है जिसमें टापू में आदिवासी समाज के लोग अपना देवस्थल मानकर वर्षों से अपनी आस्था और विश्वास के अनुरुप दलसागर तालाब में पूजन पाठ एवं देवस्थल में आना-जाना करते हैं, इस हेतु नाव के माध्यम से आदिवासी समाज के लोग टापू में पहुंचकर अपनी आस्था के अनुरुग अपने सभी घार्मिक संस्कार संपन्न कराते रहे हैं. इस हेतु नाव के द्वारा पहुंचकर कई वर्षों से उक्त पूजनपाठ किया जा रहा है, नाव से आना-जाना करने पर कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी है. इसी मंच से आदिवासी समाज द्वारा ब्रिज बनाये जाने मांग की गई, उक्त आदिवासी समाज की उक्त माग सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान द्वारा सौंदर्याकरण एवं ब्रिज निर्माण का भूमि पूजन किया और राषि का आवंटन किया, फलस्वरुप शासन द्वारा तालाब और ब्रिज का निर्माण एजेंसी द्वारा कराया जाना शुरु किया गया परन्तु कुछ आदिवासी विरोधी धर्म विरोधी तत्वों द्वारा उक्त रचनात्मक कार्य पर रोक लगाये जाने बाबद कार्यवाही करते हुए स्थगन आदेश लाकर काम रुकवा दिया गया जिससे आदिवासी वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है जिससे आदिवासी समाज अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है आदिवासी समाज तथा समाज के विभिन्न संगठनों की ओर से संयुक्त रुप से अपनी मांगो का ज्ञापन निम्नानुसार प्रस्तुत करता है – अनु. जनजाति वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिये भारतीय संविधान की मंशा के अनुरुप पेशा एक्ट पांचवीं अनुसूची में शामिल है, के अनुसार लागू किया गया है जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पेशा एक्ट वर्तमान में लागू नहीं है जिसका कियान्वयन संपूर्ण प्रदेश में कराया जावे । यह कि, सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा हाल ही में पारित 7 जजों के संविधान पीठ द्वारा पारित निर्णय जो कि अनु. जाति, जनजाति वर्ग के लोगों को प्राप्त प्रतिनिधित्व का अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया है तथा आरक्षण की मंशा के विपरीत गलत व्याख्या कर उक्त निर्णय पारित किया गया है जिससे अनु. जाति जनजाति को मिले आरक्षण में वर्गीकरण होने से इन वर्गों के हक और अधिकार प्रभावित होंगे, इसलिये सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की 9 जजों की संविधान पीठ में यह मामला भेजा जावे या फिर केन्द्र सरकार इस संबंध में संविधान संशेधन लाकर कानून बनावे । दलसागर तालाब सिवनी में चल रहे निर्माण कार्य सौंदर्यीकरण एवं ब्रिज निर्माण कार्य में लगी रोक तत्काल हटाया जाकर ब्रिज का कार्य पूर्ण कराया जावे । आदिवासी समाज की दलसागर के टापू में देवस्थल पर पूजा पाठ संपन्न कराये जाने की प्रकिया यथावत् जारी रखने हेतु आने जाने हेतु ब्रिज निर्माण कार्य में गति लाकर पूर्ण कराया जाये। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण भोपाल जोन के समक्ष प्रकरण कमांक 154/2023 दिनांक 08/01/2024 को पारित आदेश के अनुसार लगी हुई रोक को हटाये जाने हेतु सक्षम अपीलीय न्यायालय के समक्ष मामला प्रस्तुत कर स्थगन आदेश को निरस्त कराया जावे । दलसागर तालाब में ब्रिज निर्माण के लिये बने हुए पिल्लर को तोड़े जाने के जुलाई 2024 के आदेश पर तत्काल रोक लगाये जाने हेतु म.प्रशासन त्वरित न्यायिक प्रक्रिया अपनाकर उक्त विध्वंशात्मक कार्यवाही पर स्थगन प्राप्त किया जावे। आदिवासी समाज के देवस्थान में आने-जाने हेतु चल रहे ब्रिज निर्माण को तत्काल पूर्ण कराया जावे ताकि आदिवासी समाज बिना किसी डर के बाधा के ब्रिज से अपने समाज के साथ जाकर अपने आराध्य का पूजन वंदन कर सके। ज्ञापन के आलोक में विधिसंगत कार्यवाही करते हुए की गई कार्यवाही से संगठन को अवगत कराने की बात कही गई है इसके अलावा ज्ञापन की प्रति महामहिम राज्यपाल म.प्र. शासन भोपाल मुख्यमंत्री म.प्र. शासन भोपाल माननीय न्यायालय एन. जी. टी. भोपाल की ओर भेजी जा रही है। इस अवसर पर कार्यक्रम में बरघाट के पूर्व विधायक अर्जुनसिंह काकोडिया,नगरपालिका अध्यक्ष षफीक खान,सभापति राजिक अकील के अलावा पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल उपस्थित रहे। इसके अलावा गोड महासभा के जिलाअध्यक्ष चित्तोडसिंह कुषराम,कार्यवाहक अध्यक्ष सुखदेव पन्द्रे,कार्यवाहक अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह मर्सकोले,ठाकुर विरेन्द्र राजसिंह उपाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारीगणो के अलावा समाज के महिला पुरूश षामिल रहे।







