सिवनी – एक कहावत है झूठे का बोलबाला सच्चे का मुॅहकाला कुछ इस तरह का काम जिले मंें धडल्ले से जारी है आपको बता दे इस वक्त पूरे देश में बेरोजगारी की मार जनता झेल रही है युवा रोजगार की तलाश में दर – दर भटक रहे है तो वही एक बीबी और दो बच्चो को पालने में बाप ऐडी चोंटी का जोर लगा रहा है जिसमें किसी को चड्डी मिल रही है तो बनियान नहीं, तो किसी को बनीयान मिल रही है तो चडडी नही , लेकिन जिले का कुख्यात जुॅंआ खिलाने के मास्टर कुछ तथाकथित मांईड जुआ संचालक अपनी फौज के साथ तीन जुआडियों के बीच नौ औरतो की कहानी जुॅआ खेलने वाले जुआडी दबी जबान से बताते है कि तीन मर्दो के बीच नौ औरते, 6 रखैले और तीन सात फेरे वाली का गठजोड़ धडल्ले से चल रहा है।
कुछ ऐसे भी है जो गौ कसी के धंधे से कभी फुटपाथ में गुजर बसर किया करते थे जो 6 करोड के आसामी चंद बरसो में कैसे हो गए इसके अलावा इनके शौक इतने बढ गए कि ये तीन बीबी की स्वामी भी बन गए मानो ये कही के राजा महाराजा हो कुछ ऐसे भी काले कारनामो को अंजाम देने वाले है जो कभी पहले झोला में समोसे टांगकर जुआडियों के फड में समोसा लेकर जाया करते थे। इसका भी वही हाल है चैक चैराहो पर तो यह भी चर्चा दबी जुॅबान से हो रही है कि जो जुंआ फड में जो औरते नाचकर जुआरियो को टाईमपास करती थी वह आधी लायसेंसी बनकर महलो में बिराजमान हो रही है। कुछ ऐसे अय्यास है जिनकी अय्यासी के उपन्यास भी छपारा से लेकर पूरे कान्हीवाडा एरिया में खूब छाये हुए है आज के समय में ईमानदार एक आदमी बीबी को छत नहीं दे पा रहे है तो वही दूसरी ओर जुआरी नालकट रखेलो को महलनुमा इमारत बनावाकर मौज करा रहे है। लोग अचंभित इसलिए है कि इन अय्यासो की काली करतूत में आधा दर्जन से भी ज्यादा चाटुकार इनकी पैरवी ऐसेे करते है मानो यही अय्यास इनका घर चलाने का काम करते है और डूंडासिवनी में पदस्थ अदना सा सिपाही पूरे थाने का ठेकेदार बनकर इस जुंऐ का सरताज बन बैठा है। किस पत्रकार को क्या,कहां और कैसे देना है और किसको नहीं देना है इस अदना से सिपाही के मोबाईल काल और पूरी कॉल डिटेल कप्तान निकलवा लेंगे तो दूध का दूध पानी का पानी स्पष्ट हो जायेगा। यही नहीं इसके पहले भी जुुंए की भगदड में छपारा के खिलाडी की मौत और लंबे लेन देन का मामला भी जमकर चला। ऐसे आधा दर्जन लोग इस खिलाडी के मौत के जिम्मेदार है आखिर पुलिस ने इनके ऊपर अपराध क्यो नहीं बनाया,जुआडी जुंआ नहीं विठालते तो उस गरीब की मौत नां होती। यानि इसकी मौत के जिम्मेदार ये चारो जुआडी है और वर्दी पहनकर जुआडियों का साथ देने वाले वे गददार पुलिसवाले भी उतने ही जिम्मेदार है बात करे पूरे जिले के थानो की तो ऐसे दो-दो,तीन-तीन गददार हर थाने में कालनेमी पाये जाते है थाना प्रभारी के पदस्थ होने के कई महिनो तक तक तो थानेदार को भनक तक नही लगती कि आखिर हमारे बीच कौन बहरूपीया बनकर गददारी कर रहा और सहाब को भनक भी नहीं यह बात सत्य है। कि थाना प्रभारी की जानकारी में नहीं था। कौन – कौन इस काम में लिप्त है इनके नाम अगले अंक में जरूर पढियेगा।







