वेयर हाउस से 350 बोरी मसूर चोरी के मामले पर जिम्मेदार कौन
क्या “षडयंत्र” को दिया जा रहा “चोरी” का नाम, आखिर किसके आदेश पर 4 दिनों तक बंद रहा “माँ शारदा वेयर हॉउस”?
सीसीटीवी भी पाये गए बंद , किस दिग्गज नेता का है दबाब
सिवनी – माँ शारदा वेयर हॉउस हमेशा से ही खरीदी केंद्र बनाने को लेकर विवादों मे घिरा रहा है, क्योंकि जांच अधिकारियों की बात करें तो ये गोदाम किसी भी मापदंड से खरीदी केंद्र के मापदंडो पर खरा नहीं उतरता है, फिर भी ना जाने किस दबंग नेता के दबाब इसे हर बार खरीदी केंद्र बना दिया जाता है।
ना टूटा “ताला” ना टूटी “शटर”
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चोरो के द्वारा लगभग 350 बोरिया जिसमे चना, मसूर अन्य अनाज शामिल है जिसका बाजार मूल्य लगभग 15 लाख रूपये बताया जा रहा है। 21 अपै्रल 2025 को घटना होने के 4 दिनों से बंद गोदाम से चोरी हो गई, सूत्रों की माने तो चोरो के द्वारा चोरी करते समय गोदाम मालिक को होने वाली छति का पूरा ध्यान रखते हुए ना शटर को नुकसान पहुंचाया ना शासकीय संपत्ति के तालो को।
सीसीटीवी के साथ चार दिन बंद गोदाम के कारण चोरी की घटना हुई आसान
बड़ी चोरी की वारदात किसी षडयंत्र के साथ या किसी अपने करीबी से प्राप्त जानकारी से करना काफी आसान हो जाती है, लगभग इसी तर्ज पर इस घटना को भी अंजाम देना सम्भव माना जा सकता है. अब सवाल यह खडा होता है की खरीदी के समय आखिर किसके आदेश पर गोदाम प्रभारी, और वेयर हाउसिंग कारपोरेशन एवं खरीदी केंद्र समिति के द्वारा वेयर हॉउस को बंद रखा गया, आखिर क्यों शासकीय विभाग के द्वारा अपने कर्तव्य से दूर हटकर गोदाम मालिक को नियमो का उलंघन करने की खुली छूट दे दी गई। आखिर क्यों जिला कलेक्टर को गोदाम के द्वारा मापदंड पूरा नहीं करने की जानकारी दी गई, आखिर किस एग्रीमेन्ट पर गोदाम मालिक और बेयर हाउसिंग कारपोरेशन अधिकारियो ने हस्ताक्षर कर सहमति प्रदान की थी, ये तो अब जांच का विषय?
समाचार प्रकाशन समय तक नहीं हो सकी एफआईआर, आखिर किसका दबाब दिख रहा हर जगह?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 21 अपै्रल 2025 को चोरी की घटना की जानकारी सार्वजनिक हुई, जिस पर घटना स्थल पर लगभग सभी जिम्मेदार अधिकारीयों ने अपने होने की पुष्टि की, जिसमे लगभग शासकीय संरक्षण मे आ चुके गोदाम मे हुई चोरी पर सिर्फ अधिकारीयों के द्वारा स्थानीय थाने मे चोरी की सामान्य सूचना देना और उस मामले मे एफआईआर ना होना भी किसी षडयंत्र का ही तो हिस्सा नहीं, कही यंहा भी किसी दबंग नेता का दबाब तो नहीं?
4 दिन बंद रहा गोदाम, चोरी का समय और दिन स्पष्ट नहीं
प्राप्त जानकारी के अनुसार 4 दिनों तक अधिकारीयों की शायद आपसी सहमति से गोदाम को बंद रखा गया, बंद सीसीटीवी कैमरे के भरोसे पूरे गोदाम को मानो चोरो के हवाले कर दिया गया, अब सवाल यह खडा होता है की चोरी की घटना है किस दिन की, क्योंकि जिस तरह आसानी से 350 बोरियो को ले जाया गया है, ये सिर्फ 1 दिन का काम नहीं, ना ही 350 बोरियो को एक साथ मे ले जाना सम्भव नहीं. खैर जो भी हो पुलिस को सूचना तो गोदाम खुलने के बाद ही मिली।
आखिर वो कौन है जिसका लगता था तीसरा “ताला”
नियमो की बात की जाय तो गोदाम खोलने और बंद करते समय गोदाम प्रभारी, और हाउसिंग कारपोरेशन के कर्मचारियों के द्वारा अपने अपने ताले लगाए जाते है, वंही सूत्रों की माने तो गोदाम प्रभारी और उनके लोगो का खरीदी स्थल पर आना जाना कम था तो अब सवाल यह उठता है की आखिर फिर किसका ताला गोदाम को खोलने और बंद करने के लिए लगाया जाता था, कंही इस घटना मे तीसरा ताला तो शामिल नहीं?
2 चौकीदारो के रहते आखिर कैसे, इतनी बड़ी चोरी को दिया गया अंजाम
वेयरहाउस गोदाम के क्षेत्रफल की यदि बात की जाए तो 2 चैकीदार के रहते इतनी बड़ी चोरी को अंजाम देना सम्भव नहीं था, यदि गोदाम के आसपास की बात करें तो मुख्य मार्ग को छोड़कर सभी रास्ते आवागमन के लिए उचित नहीं, फिर कैसे पिछले मार्ग से इस चोरी को अंजाम दिया गया, क्या आवाज चैकीदार तक नहीं पहुंची क्या? खैर जो भी हो अब सब जांच का विषय है।
ब्लैक लिस्टेड स्वसहायता समूहो को कैसे मिल गए सेंटर
पूर्व में जिन स्वसहायता समूहो को ब्लैकलिस्टेड किया गया था उन्हे कैसे और किसकी शय पर फिर से किसानो की खून पसीने की उपज खरीदने का काम दे दिया गया यह भी बहुत बडा सवाल है।
पाॅच – पाॅच बैठको के बाद समीति ने 350 बोरी चोरी होने की बात की
पहले तो पूर्व वर्ष में खरीदे गए अनाज की सिर्फ 90 बोरी चोरी की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई जिसके बाद पाॅच – पाॅच बैठको के बाद और सघन बैठको के बाद 350 बोरी अनाज चोरी की शिकायत समीति द्वारा पुलिस को दी गई।
इस मामले में आखिर रिपोर्ट क्यो दर्ज नही हुई
इस मामले में चोरी की घटना 21 अपै्रल 2025 के बाद आज 6 दिन बीत जाने के बाद भी सिर्फ लोगो को बुलाबुला कर सिर्फ पूछताछ ही चल रही है आगे कोई भी कार्रवाई आखिर क्यो नही।
किस – किस की होती है माॅनीटरिंग
चना,मसूर तिलहन खरीदी मामले में विपणन,फुडविभाग और कृषि विभाग और कलेक्टर खरीदी केन्द्रो की माॅनीटरिंग करते है जिसमें चना मसूर तिलहन खरीदी को नोडल अधिकारी कृषि विभाग होता है तो फिर इतना बडा गडबडझाला कैसे हो गया।
इस मामले में बहुत से सवाल अभी भी सवाल है
गोदाम मालिक के साथ एग्रीमेंट क्यो नही। दूसरा गोदाम मालिक की हैसियत से कौन एग्रीमेंट करेगा। तीसरा जाॅच एजेंसी जाॅच के घेरे में चैथा 350 बोरी मसूर का भुगतान कैसे होगा।
क्या अज्ञात व्यक्तियो के नाम होगी एफआईआर
सवाल यह भी उठता है कि क्या आखिर में अज्ञात व्यक्तियों के नाम रिपोर्ट दर्ज कर ली जायेगी और सालो साल जाॅच चलती रहेंगी।
क्या आरोप अनुसार दबाब मे दिख रहे जिला अधिकारी कर सकेंगे, निष्पक्ष जांच
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन लखनादौन के प्रबंधक कमलेश बाखला के द्वारा जिला कलेक्टर संस्कृति जैन पर खुले शब्दों में आरोप लगाते हुए उन्हें किसी नेता के दबाव में रहने की बात कही गई है अब सवाल यह उठता है कि जिला कलेक्टर के द्वारा नियम विरुद्ध बने खरीदी केंद्र को अनुमति दिए जाने के बाद क्या जिला कलेक्टर संस्कृति जैन बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच कर पाएंगी या फिर किसी राजनीतिक दबाव के चलते यह जांच सालों तक चलती रहेगी क्या।







