डूंगरिया जलाशय की नहर मरम्मत और किसानों को पानी दिए जाने का मामला
जल संसाधन विभाग उड़ा रहा सूचना अधिकार अधिनियम की धज्जियां
सिवनी – जल संसाधन विभाग के अधिकारी डूंगरिया जलाशय में किए गए व्यापक भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए अब सूचना के अधिकार अधिनियम की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं। दरअसल सहजपुरी हार के एक किसान ने डूंगरिया जलाशय की नहर से किसानों को मिलने वाले पानी और नहर मेंटनेस को लेकर सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन व्यापक भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए किसान को चाही गई जानकारी देने के बजाय अन्य दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए।
उल्लेखनीय है कि सिवनी जिले के लखनादौन तहसील अंतर्गत गणेशगंज के सहजपुरी ग्राम में शासन द्वारा किसानों की भूमि को अधिग्रहण करते हुए सन् 1987-1988 में डूंगरिया जलाशय और नहर का निर्माण कराया गया था। लेकिन 37 साल बाद भी इस जलाशय का पानी नहर के माध्यम से किसानों के खेतों तक आज दिनांक तक एक बूंद भी नहीं पहुंच पाया हैं।
साक्ष्य छुपाने दी आधी अधूरी जानकारी
डूंगरिया जलाशय से नहर, कैनाल के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले पानी और नहर मेंटेनेंस कार्य को लेकर सहजपुरी हार के किसान नंदलाल चैकसे के द्वारा 7 जनवरी 2025 को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जल संसाधन विभाग क्रमांक 1 के कार्यपालन यंत्री को 9 बिंदुओं से संबंधित जानकारी और दस्तावेजों के अवलोकन हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था। सूचना अधिकार के तहत चाही गई जानकारी में प्रमुख बिंदुओं पर सहजपुरी हार के किसानों को सन् 1987-88 से बनाई गई नहर के माध्यम से कब-कब कितना पानी दिया गया तथा 1987-88 से आवेदन दिए गए दिनांक तक मेंटेनेंस के नाम पर कब-कब कितना पैसा मरम्मत के नाम पर निकला गया जानकारी चाहिए गई थी। किंतु व्यापक तौर पर करें गए बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने और साक्ष्य को मिटाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट को आधी अधूरी जानकारी देकर सूचना अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई गई। सवाल यह है कि 37 सालों बाद भी अब तक सहजपुरी हार के किसानों के खेतों में डुंगरिया जलाशय की नहर और कैनाल के माध्यम से एक बूंद पानी नसीब क्यों नहीं हो पाया हैं? जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सूचना अधिकार अधिनियम के तहत किसान को आधी अधूरी जानकारी और दस्तावेज क्यों थमा रहे हैं?

साक्ष्य छुपाने दी आधी अधूरी जानकारी
डूंगरिया जलाशय से नहर, कैनाल के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले पानी और नहर मेंटेनेंस कार्य को लेकर सहजपुरी हार के किसान नंदलाल चैकसे के द्वारा 7 जनवरी 2025 को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जल संसाधन विभाग क्रमांक 1 के कार्यपालन यंत्री को 9 बिंदुओं से संबंधित जानकारी और दस्तावेजों के अवलोकन हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था। सूचना अधिकार के तहत चाही गई जानकारी में प्रमुख बिंदुओं पर सहजपुरी हार के किसानों को सन् 1987-88 से बनाई गई नहर के माध्यम से कब-कब कितना पानी दिया गया तथा 1987-88 से आवेदन दिए गए दिनांक तक मेंटेनेंस के नाम पर कब-कब कितना पैसा मरम्मत के नाम पर निकला गया जानकारी चाहिए गई थी। किंतु व्यापक तौर पर करें गए बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने और साक्ष्य को मिटाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट को आधी अधूरी जानकारी देकर सूचना अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई गई। सवाल यह है कि 37 सालों बाद भी अब तक सहजपुरी हार के किसानों के खेतों में डुंगरिया जलाशय की नहर और कैनाल के माध्यम से एक बूंद पानी नसीब क्यों नहीं हो पाया हैं? जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सूचना अधिकार अधिनियम के तहत किसान को आधी अधूरी जानकारी और दस्तावेज क्यों थमा रहे हैं?







