विश्व हिंदी सम्मेलन के 51 वीं वर्षगाँठ पर विश्व हिंदी दिवस का हुआ आयोजन
वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा हिंदी का दबदबा

विश्व हिंदी दिवस की 51 वीं वर्षगांठ पर पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस में वैश्विक परिप्रेक्ष्य और हिंदी विषय पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ, विद्वान वक्ताओं और प्राध्यापको ने अपने विचार रखे तथा वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में हिंदी के महत्व को समझाया.
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की आराधना और पुष्प अर्पण से हुई.
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में पुलिस विभाग के निरीक्षक ओमेश्वर ठाकरे ने उपस्थित विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा हिंदी है. कहा कि हिंदी वैज्ञानिक और भावनात्मक भाषा है, हिंदी हमारे व्यवहार की भाषा है. हिंदी में ज्ञान और विज्ञान का अक्षय भंडार समाया है. उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के सही उपयोग का आग्रह किया. ठाकरे ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवाओं के लिए हिंदी में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. उल्लेखनीय है कि ओमेश्वर ठाकरे ने भोपाल के दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिस्सा ले चुके हैं.
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ सविता मसीह ने हिंदी भाषा के उद्भव और विकास को समझाया. हिंदी के महत्व पर व्यापक रोशनी डाली. डॉ.मसीह ने कहा कि अपने राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए हमें हिंदी भाषा को अपनाना होगा. हिंदी को जानना- समझना होगा .
कार्यक्रम के विशेष वक्ता प्रोफेसर सत्येन्द्र कुमार शेन्डे ने कहा कि आज, 21 वीं सदी के वैश्विक स्तर पर हिंदी का दबदबा बढ़ता जा रहा है. कहा कि हिंदी हमारा मान- सम्मान, पहचान और अभिमान है। उन्होंने बताया कि फादर कामिल बुल्के जैसे हिंदी सेवक ने हिंदी में राम कथा लिखकर पूरे विश्व में राम कथा का व्यापक प्रचार प्रसार किया. बताया कि फ्रांसीसी व्यक्ति गार्सा द तांसी ने सबसे पहले हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा. जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा. बताया कि पिछले 135 वर्षों से नागरी प्रचारिणी सभा जैसी संस्था हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है.


अब तक 12 बार विश्व हिंदी सम्मेलनों का हुआ आयोजन
हिंदी विभाग के प्रो. सत्येन्द्र कुमार शेन्डे ने बताया कि वर्ष 2025 को विश्व हिंदी सम्मेलन के स्वर्ण जयंती वर्ष के रूप में मनाया गया. बताया कि 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था. तब से लेकर आज तक कुल 12 बार विश्व हिंदी सम्मेलनों का आयोजन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में किया गया है. सबसे अधिक भारत और मॉरीशस में तीन-तीन बार विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुए हैं. लंदन और न्यूयॉर्क में भी विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुए. प्रोफेसर शेन्डे ने बताया कि 2015 में भोपाल में आयोजित दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में अब तक सबसे अधिक पचास देशों के 2000 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए थे.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ रविशंकर नाग ने कहा कि कबीर, सूर, तुलसी, मीरा जैसे हिंदी के महान रचनाकारों ने हिंदी का गौरव बढ़ाया है. कवि बिहारी और कबीर की रचनाओं में लिखे पत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि पत्र साहित्य भी हिंदी की अनमोल विरासत है. उन्होंने युवा विद्यार्थियों से आग्रह किया कि मोबाइल के इस दौर में हम सभी को पत्र लिखना चाहिए.
कार्यक्रम में डॉ श्यामसिंह राहंगडाले और डाॅ. ज्योत्सना नावकर ने भी सारगर्भित विचार रखे.
आयोजन में छात्र मेहुल सिंह बिसेन, छात्रा रक्षा राहंगडाले, धीरज नाग, नरेश डहाके का विशेष सहयोग रहा. कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षक अमितोष सनोडिया ने किया. कार्यक्रम में डाॅ पवन वासनिक, डॉ मानसिंह बघेल, प्रो रचना राय, डॉ ज्योति कुमरे, डॉ ज्योति गजभिये, प्रो रचना सक्सेना, उमाशंकर वर्मा, छाया राय, डॉ बद्री, डाॅ रामकुमार नायक, डॉ मनोज टेंभरे, आयुषी मिश्रा सहित कॉलेज स्टाफ और एमए हिंदी तथा स्नातक कक्षाओं के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.