ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों ने बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर धरना दिया, कलेक्टर को ग्यापन देकर मांगा न्यूनतम वेतन
सिवनी। ग्राम पंचायतों में कार्यरत सैकडों चैाकीदार, पंप आपरेटर, भृत्य, सफाईकर्मियों ने कलेक्टर को ग्यापन देकर न्यूनतम वेतन की मांग की। शासन के आदेश पर नियुक्त हुए इन कर्मचारियों को ग्राम पंचायतें मात्र 2-3 हजार रूपए वेतन देती हैं जबकि सरकार का आदेश निर्देश न्यूनतम वेतन देने का है, जो 12,500 रूपए है, इस तरह इन कर्मचारियों के वेतन से 8-9 हजार रूपए महीने की चोरी हो रही है, जिसे रूकवाने और पूरा वेतन दिलाने की मांग कलेक्ट्रेट पहुंचकर रखी, जिस पर उन्होंने शासन स्तर तक मांग पहुंचाने और न्याय करने का भरोसा दिया।

अंबेडकर प्रतिमा पर दिए घरना
अस्थाई कर्मचारी मोर्चा मप्र के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने संबोधित किया। धरने में अब्दुल हकीम, मुकेश सोनवाने, ईश्वर दयाल, पप्पू भाई, शेजलाल, राजेश भलावी, आसू साहू, आरिफ खान, यशपाल, संतोष मर्सकोले, यशवंत भगत, दिलीप कुमार, संतोष नागेश्वर, कांता प्रसाद सहित बडी संख्या में चैकीदार, पंप आपरेटर उपस्थित रहे।
प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों का रोजगार खत्म कर उन्हें अधिकार विहीन बना रही है, न्यूनतम वेतन नहीं देना, मनरेगा को खत्म करना, श्रम कानूनों को बदलना, चैाथे, तृतीय दर्जे की नौकरियां ठेके पर देना सरकार के निर्णय गरीब मजदूर विरोधी हैं, ऐसा मुगलकाल में था, जब श्रमिकों के लिए कोई अधिकार नहीं थे, अब केंद्र राज्य सरकार श्रमिकों से सभी अधिकार छीनकर मुगलकाल में पहुंचा रही है। इसके खिलाफ संघर्ष करना हर गरीब मजदूर की जिम्मेदारी हो जाती है।

अब तक आपको न्यूनतम वेतन का अधिकार भी नहीं मिला है
ग्राम पंचायतों में कार्यरत चैाकीदार, पंप आपरेटर्स, सफाईकर्मी, भृत्यों की बैठकों में बोलते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि आप लोग 15-18 साल से पंचायतों में काम कर रहे हैं लेकिन अब तक आपको न्यूनतम वेतन का अधिकार भी नहीं मिला है, आपसे 2, 3, 4 हजार रूपए महीने में काम कराया जा रहा है, जो गलत है और अन्याय भी, इसे समाप्त कराना हम सभी की जिम्मेदारी है, इसके लिए मजबूत संगठन और निरंतर संघर्ष जरूरी है, तभी कामगार विरोधी सरकार को मांगे मानने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

सरकार मजदूरों से वे सभी कानूनी अधिकार छीन लेना चाहती है
जिलाध्‍यक्ष अर्जुन यादव ने आगे बताया कि श्रमिक कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा ने कहा कि सरकार मजदूरों से वे सभी कानूनी अधिकार छीन लेना चाहती है, जो उसने लंबे संघर्षों से हासिल किए हैं। श्रम कानूनों को खत्म कर न्यूनतम वेतन का अधिकार छीनना, चैथे, तीसरे दर्जे की नौकरियां खत्म करना, अब ग्रामीण गरीबों श्रमिकों से रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा को छीनकर कामगारों को अधिकारविहीन बनाकर मुगलकाल जैसे शोषण में धकेल रही है। शर्मा ने बताया कि मुगल शासक मजदूरों से 20-22 घंटे काम कराकर महल, किले, मीनारें, हवेलियां, कोठियां तो बनवा लेते थे लेकिन उन्हें मजदूरी नहीं देते थे, मुगलिया शासकों को इतिहास में मजदूरों से मुफ्त में काम कराने वाले क्रूर, अमानवीय शासक के रूप में याद किया जाता है, केंद्र राज्य सरकारें भी मुगलों के उसी रास्ते पर चल रही हैं, इसलिए मनरेगा बंद की, श्रम कानूनों को खत्म किया, नौकरियों में ठेका प्रथा लागू की, तीसरे चैथे दर्जे की नौकरियां खत्म कर दी गई हैं। मुगलों के रास्ते पर चल रही सरकारों को संघर्ष के जरिए ही रोका जा सकता है। शर्मा ने सभी कर्मचारियों से एकता बनाकर निर्णायक संघर्ष करने का आव्हान किया।