सिवनी। विगत 23 जनवरी 2026 को वसंतोत्सव समिति के तत्वावधान में एस.एस.सी. शिक्षा महाविद्यालय, ड्रीमलैण्ड सिटी, कटंगी रोड, में शिक्षाविद्, वरिष्ठ कवि, साहित्यकार जवाहर लाल राय तरूण के मुख्य आतिथ्य, वरिष्ठ शायर खलीकुज्जमा सहर के विशिष्ट आतिथ्य एवं स्वामी बलवंतानंद श्रद्धानंद की अध्यक्षता में सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का कुशल संचालन क्रमशः नरेन्द्र नाथ चटटान एवं सिराज कुरैशी के द्वारा किया गया। सस्वर सरस्वती वन्दना अम्बिका शर्मा के द्वारा प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर साहित्य में की गई उत्कृष्ट सेवाओं हेतु सर्वश्री जवाहर लाल राय तरूण रमेश श्रीवास्तव चातक. अम्बिका प्रदीप शर्मा, खलीकुज्जमा सहर सूफी रियाज मुहम्मद निदा एवं म. प्र. शासन, खेलकूद विभाग द्वारा आयोजित युवा महोत्सव में राष्ट्रीय स्तर पर स्वरचित कविता पाठ में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली डी.पी. चतुर्वेदी विधि महाविद्यालय के बी.ए.एल.एल.बी. प्रथम वर्ष की छात्रा सुश्री काजल चक्रवर्ती का शाल-श्रीफल से सम्मान कर अभिनंदन पत्र, नकद राशि एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह उपरान्त कवि सम्मेलन आयोजित हुआ।
सर्वप्रथम अरूण चैारसिया प्रवाह ने सस्वर आकर्षक एवं मनमोहक गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया-ये बन्धन, प्रेम का बन्धन, मेरे मन का कोना कोना,महका चन्दन-चन्दन ।
आशुतोष शुक्ल ने सशक्त व्यंग्य प्रस्तुत कर श्रोताओं से वाहवाही लूटी-नकली पाँसों से कब तक द्रोपदी का चीर हरण करोगे, कब तक पौण्ड्रिक बन छलोगे। एक-ना एक दिन कृष्ण के हाथ मरोगे।
इकराम सदफ की गजल को श्रोताओं ने खूब पसंद किया-हद से बढ़ ही प्यार देगा क्या-मौत से पहले मार देगा क्या।
अरूण तिवारी अनजान ने गजल प्रस्तुत कर श्रोताओं से वाहवाही लूटी-जिसने लोगों को सताया उम्र भर, चैन उसने भी न पाया उम्र भर।
कुछ जमाने का करम कुछ आपका, हमने दुःख पे दुःख ही पाया उम्र भर ।। नरेन्द्र नाथ श्चट्टान के हास्य व्यंग्य को श्रोताओं ने खुले दिल से दाद दी-हमारे देश में यारों सब होता है, कुछ का पता नहीं कब होता है।
राजेन्द्र तिवारी प्रेम पुजारी ने बुंदली रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया-हमरे मेकप के किट से लेके लिपिस्टिक क्रीम समझके,मुँह में मल लये, जे का कल लये।
रामगोपाल निर्मलकर नवीन द्वारा प्रस्तुत दोहों को श्रोताओं ने खूब सराहा-ज्ञानदायिनी मात को, करते नवीन प्रणाम। अंधकार को दूर कर, पूर्ण करो सब काम ।।
अम्बिका प्रदीप शर्मा द्वारा सस्वर प्रस्तुत गजल को श्रोताओं ने खुले दिल से दाद दी-नजरों से मिलाते हैं, दिल साफ हो तो नजरें। जब चोर हो दिल में तो, बचते हैं निगाहों से ।।
डॉ. ओमप्रकाश सरवैया द्वारा प्रस्तुत रचना को श्रोताओं ने खूब सराहा-जिंदगी को जियो ढोना नहीं है, तुम्हारे सोचने से कुछ होना नहीं है। देने वाला तुमसे बेहतर जानता है, भगवान है वो खिलौना नहीं है।।
डॉ. रामकुमार चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत सस्वर गीत को श्रोताओं ने बहुत सम्मान दिया और खुलकर तारीफ की-ये धरती का आँचल, अम्बर का साया, श्रृष्टि ने कैसा ये सुंदर है बनाया। नदियाँ ये कहती हैं कल-कल अविचल, हमको ये कहती हैं तू बढ़े चल बढ़े चल ।।
अनीसा कौसर ने सस्वर गीत पढ़कर श्रोताओं से खूब वाहवाही लूटी-आयेगा मुझसे मिलने वो अबकी बहार में, बैठी हूं ये उम्मीद लिए इंतेजार में।।
रमेश श्रीवास्तव चातक द्वारा अमर क्रांति के पुरोधा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाष की रचना को बहुत मान दिया-इतिहास बीसवीं सदी का जब भी लिखा जायेगा, सुनहले अक्षरों में नाम सुभाष लिखा जायेगा। जब कभी याद आयेगी जवानी की हमको, माँ भारती की सौगंध चातक तुम्हारा नाम आयेगा।।
मिनहाज कुरैशी के इस गजल के शेर को श्रोताओं ने खुले दिल से दाद दी-हर व्यवस्था को ये छलती जा रही है, शैली जीवन की बदलती जा रही है। बज रहे हैं राजनीतिक झुनझुने भी, और जनता भी बहलती जा रही है।।
मसूद आतिश की गजल और शेरों की श्रोताओं ने खूब तारीफ की – चारों जानिब भीड़ है लेकिन तन्हा लगता है, आतिश तेरा चुप चुप रहना अच्छा लगता है। मंच संचालन कर रहे सिराज कुरैशी ने गजल और शेर पढ़कर श्रोताओं ने खूब वाहवाही लूटी- अच्छे बुरे के फर्क में मगरूर हो गये, हम लोग अपने आप से क्यूं दूर हो गये। गम इसका कुछ नहीं कि मंजिल नहीं मिली, गम ये है अपने घर से बहुत दूर हो गये।। अरविन्द मानव की इन पंक्तियों का श्रोताओं ने खुले हृदय से स्वागत किया- साथ जबसे मिला, तुम्हारा सरला प्रिया, जिन्दगी मिल गई आपका शुक्रिया। यूसुफ राज की गजल और शेरों का ओताओं ने खूब तालियाँ बजाकर स्वागत किया- किसी के खून का छिड़काव करके, जिये तो कैसे तुम ये घाव भरके। सूफी रियाज मोहम्मद निदा द्वारा प्रस्तुत बेहतरीन शेरों का श्रोताओं ने तालियों की गर्जना से स्वागत किया-उसने सिला भी सब्र का ऐसा दिया मुझे, जज्बों की तेज आँच ने पिघला दिया मुझे। दिल मुतमईन था गम से लिरी याद आ गई, जैसे किसी ने नीन्द से चौका दिया मुझे। विशिष्ट अतिथि खलीकुज्जमा सहर की गजलों को श्रोताओं ने खुले दिल से दाद दी-चाँदनी है है या बारिश अनवार, वा बरसता है माहताब का फूल।
कल्य यासीन बल कुरओं इसका, सूरह रहमान है किताब का फूल।। मुख्य अतिथि जवाहर लाल राय तरूण ने माँ शारदे से वरदान देने की कामना करती सशक्त रचना को ओलाओं ने बहुत मान दिया दिया– वरदान दो। माँ शारदे वरदान दो। सुख-दुःख सहज स्वीकार दोनों कर सकें। मन को स्थिर रख सकूँ, अच्छे-बुरे में। मान में अपमान में विचलित न होऊँ, जब कभी जागे अहं संयन रहे. वरदान दो।
वसंतोत्सव समिति के महासचिव नरेन्द्र नाथ श्चट्टान ने आगे जानकारी देते हुुए बताया कि समस्त आमंत्रित कवियों एवं शायरों के प्रति डा. रामकुमार चतुर्वेदी के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। कवि सम्मेलन में जगदीश तपिश, नाथूराम धुर्वे, अख्तर पटेल, राजदा फारूकी, संजय जैन संजू, डॉ. हेमराज नागवंशी, वीरेन्द्र डहेरिया सहित सिवनी जिले के सम्माननीय नागरिकों, डी.पी. चतुर्वेदी विधि महाविद्यालय, एस.एस.सी. शिक्षा महाविद्यालय के प्राध्यापकों, सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।







