शिव पुराण कथा पंचम दिवस
गणेश जन्म एवं रिद्धि – सिद्धि विवाह का दिव्य प्रसंग
सिवनी – सिवनी नगर के कस्तूरबा वार्ड मंगलीपेट में मालवी परिवार द्वारा चल रही शिव पुराण कथा के पंचम पावन दिवस पर कथा वाचक पंडित गणेश प्रसाद दुबे ‘सरल’ (जबलपुर) द्वारा भगवान गणेश के जन्म एवं माता रिद्धि – सिद्धि के साथ उनके मंगल विवाह का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वर्णन किया गया। कथा स्थल श्रद्धा, भक्ति और जयघोष से भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित हो गया।
गणेश जन्म की दिव्य लीला – महाराज श्री ने कथा में बताया कि माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना कर उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया। भगवान शिव के कैलाश लौटने पर अज्ञानवश हुआ यह प्रसंग एक महान ब्रह्मांडीय लीला में परिवर्तित हुआ। अंततः देवताओं के आग्रह पर भगवान गणेश को हाथी का मस्तक प्रदान कर पुनर्जीवन दिया गया और उन्हें प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता का स्थान प्राप्त हुआ।
महाराज श्री ने कहा – “जहाँ शुद्ध नीयत, तप और विश्वास होता है, वहाँ ईश्वर स्वयं प्रकट होते हैं।”

रिद्धि – सिद्धि विवाह का आध्यात्मिक संदेश
इसके पश्चात कथा वाचक ने भगवान गणेश के माता रिद्धि एवं माता सिद्धि के साथ विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि रिद्धि का अर्थ समृद्धि और सिद्धि का अर्थ सफलता है। यह विवाह इस सत्य को दर्शाता है कि जब जीवन में बुद्धि, विवेक और विनम्रता होती है, तब समृद्धि और सफलता स्वयं मनुष्य के जीवन में प्रवेश करती हैं।
महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि रिद्धि – सिद्धि कोई बाहरी साधन नहीं, बल्कि साधना, सदाचार और संतुलित जीवन से प्राप्त होने वाली दिव्य शक्तियाँ हैं। केवल धन या केवल सफलता जीवन को पूर्ण नहीं बनाती दोनों का संतुलन ही संपूर्णता का आधार है।
जीवन को दिशा देने वाला संदेश
अपने प्रवचन में महाराज श्री ने कहा
“जो मनुष्य पहले गणेश को स्वीकार करता है, उसके जीवन से विघ्न स्वयं विदा हो जाते हैं।”
भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ गणपति विवाह उत्सव
कथा के अंत में गणपति विवाह उत्सव का उल्लासपूर्ण वर्णन किया गया। भक्ति, जयघोष और मंगल भाव के साथ श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा से श्रोताओं को यह प्रेरणा मिली कि यदि वे अपने जीवन में गणेश तत्व को अपनाएँ, तो रिद्धि और सिद्धि दोनों स्वयं उनका वरण करती हैं।
यह पावन प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, विश्वास और जीवन सुधार का संकल्प जागृत करने वाला सिद्ध हुआ।







