RTI का उल्लंघन कर सिवनी में नटवर लालों का जादू, अन्नदाताओं को धोखा देकर चल रहा काला कारोबार धोखा, सरकार को चूना

सहकारी समिति में सूचना के अधिकार का उल्लंघन बोर्ड लगाकर RTI से इनकार, कानून की अवहेलना

सिवनी। जिला सिवनी में भ्रष्टाचार ने अपनी सभी हदें तोड़ दी हैं। लोकतंत्र की आत्मा, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ( RTI ) पर यहाँ खुलेआम और बेशर्मी से जघन्य हमला किया जा रहा है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, लखनादौन से लेकर कहानी घंसौर और विपणन सेवा सहकारी समिति तक, हर जगह नटवर लालों का एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जिसने कानून और व्यवस्था को अपने पैरों तले कुचल दिया है। यह मामला सिर्फ जानकारी न देने का नहीं, बल्कि संविधान की हत्या और अन्नदाता के भविष्य पर एक सीधा हमला है।
कानून की धज्जियां धाराएं और संशोधन
सहकारी समितियां किसानों की जीवनरेखा होती हैं, लेकिन इन नटवर लालों ने किसान कल्याण के नाम पर उन्हें और सरकार दोनों को धोखा दिया है। इन भ्रष्ट प्रबंधकों ने 2005 के RTI कानून को तो ठेंगा दिखाया ही है, साथ ही 2025 के RTI संशोधन का भी मजाक उड़ाया है, जो विशेष रूप से किसानों को सशक्त बनाने के लिए लाया गया था। प्रबंधक तुलसीराम डेहरिया, प्रमोद उकाश और वसंत कुमार साहू जैसे अधिकारी, फर्जी सूचना पटल लगाकर खुलेआम झूठ बोल रहे हैं। इन बोर्डों पर साफ-साफ लिखा है कि यह संस्था RTI कानून के तहत नहीं आती। यह कृत्य सीधे तौर पर कानून की आपराधिक अवज्ञा और एक सोची-समझी धोखाधड़ी है, जिसका सीधा मकसद अन्नदाताओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना है।
RTI कानून के कुछ प्रमुख प्रावधान, जिनका उल्लंघन हो रहा है,
RTI अधिनियम, 2005 की धारा 6(1): इसके तहत कोई भी नागरिक, किसी भी लोक प्राधिकरण (Public Authority) से, जिसमें सहकारी समितियां भी शामिल हैं, जानकारी मांग सकता है।
संविधान का 97वाँ संशोधन, 2011 इस ऐतिहासिक संशोधन ने सहकारी समितियों को स्पष्ट रूप से RTI के दायरे में लाया, जिसे 14 फरवरी 2012 को मध्यप्रदेश सरकार ने भी अपने कानून में शामिल कर और स्पष्ट कर दिया।

2025 का संशोधन
हाल ही में, किसानों के लिए RTI प्रक्रिया को और सरल बनाने का उद्देश्य था। इस संशोधन में सार्वजनिक जानकारी प्रदर्शित करने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के प्रावधान हैं, जिन्हें ये अधिकारी खुलेआम ठुकरा रहे हैं।
भ्रष्टाचार का नंगा नाच और उच्च अधिकारियों की मिलीभगत
जागरूक नागरिक हरीशचंद्र गोल्हानी द्वारा जनसुनवाई मंगलवार को दायर की गई RTI याचिका सिर्फ जानकारी का आवेदन नहीं, बल्कि इस आपराधिक सिंडिकेट के घोटालों का विस्फोटक आरोप पत्र है। इन नटवर लालों ने किसान कल्याण की योजनाओं को पूरी तरह लूट खाया है और लाखों-करोड़ों की अनियमितताओं को छिपाने के लिए दस्तावेजों को रोका है। जानकारी न देने के बाद, ये भ्रष्ट प्रबंधक अपने गुर्गों के माध्यम से RTI कार्यकर्ताओं को फोन पर परेशान कर रहे हैं और धमका रहे हैं। इससे भी बढ़कर, ये प्रबंधक हर बार जिला रजिस्ट्रार का नाम लेकर यह कहते हैं कि “हमें अधिकार नहीं है”। यह एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या इस संगठित भ्रष्टाचार में जिला रजिस्ट्रार जैसे उच्च अधिकारी भी शामिल हैं

इस जानकारी का उपयोग करके आप संबंधित अधिकारियों को बता सकते हैं कि आरटीआई अधिनियम, 2005 को भारत सरकार द्वारा राजपत्र में 15 जून, 2005 को अधिसूचित किया गया था, और यह पूरे देश में लागू होता है, जिसके लिए किसी भी सहकारी समिति को अलग से राजपत्र की आवश्यकता नहीं है।
जनता की अंतिम अपील: कलेक्टर जैन से कठोर कार्रवाई की मांग
अब सभी की निगाहें जिला कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन पर टिकी हैं, जिन्हें जनसुनवाई में सीधे आवेदन सौंपा गया है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक शिकायत नहीं, बल्कि कानून के राज और संविधान के सम्मान की कसौटी है। जनता आपसे अपील करती है कि इस नटवर लाल सिंडिकेट पर तत्काल लगाम लगाई जाए।
आपसे विनती है कि आप RTI कानून का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, किसानों तक यह संदेश पहुँचाएँ कि सहकारी समितियाँ कानून के दायरे में आती हैं। इस अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करें और सार्वजनिक रूप से घोषणा करें कि दोषियों पर मुकदमा चलाया जाएगा। यह वक्त कठोर कार्रवाई का है, सिर्फ आश्वासन का नहीं।