सूचना पटल नहीं, बाउंड्री वॉल अधूरीय जनप्रतिनिधियों ने की जांच की मांग
सिवनी – जिले में भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है चाहे सडक का मामला हो या ग्राम पंचायतों में सीसीरोड नाली या पीएम आवास या शौचालय निर्माण या पुल पुलिया हो ऐसा ही एक मामला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कातलबोडी में निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर उपस्वास्थ्य केंद्र (मात्रधाम) के निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण के लिए लगभग 65 लाख रुपये की स्वीकृति बताई जा रही है, किंतु स्थल पर निर्माण से संबंधित कोई आधिकारिक जानकारी या सूचना पटल प्रदर्शित नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि न तो भूमि पूजन की सार्वजनिक जानकारी दी गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि निर्माण किस मद से और कितनी राशि में कराया जा रहा है। भवन में रंग-रोगन का कार्य तो कर दिया गया है, लेकिन बाउंड्री वॉल का निर्माण अब तक नहीं हुआ है, जिससे कार्य अधूरा प्रतीत हो रहा है।
समाजसेवी डॉ. राजकुमार सनोदिया ने मांग की है कि प्रत्येक शासकीय निर्माण कार्यकृचाहे वह सड़क हो या भवन पर सूचना पटल अनिवार्य रूप से लगाया जाए, ताकि ग्रामीणों को स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, कार्य अवधि एवं गुणवत्ता संबंधी जानकारी मिल सके। उनका कहना है कि जानकारी सार्वजनिक न होने से पारदर्शिता प्रभावित होती है और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है। उन्होंने शासन से इस दिशा में सख्त निर्देश जारी करने की मांग की है।
ग्राम पंचायत सरपंच ने बताया कि पंचायत को केवल 25 लाख रुपये तक के निर्माण कार्य कराने का अधिकार है। उनके अनुसार संबंधित भवन की भूमि को लेकर विवाद की स्थिति रही है। बाउंड्री वॉल के संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन था और आदेश आने के बाद भी निर्माण नहीं हो रहा। उनका कहना है कि भूमि शासकीय मद की होने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा आगे निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा, जिसके कारण भवन अधूरा पड़ा है।
वहीं जिला पंचायत सदस्य घनश्याम सनोदिया ने बताया कि उन्होंने जिला पंचायत में कातलबोडी एवं लखनवाड़ा के आरोग्यधाम भवनों में कथित रूप से घटिया निर्माण की शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक संबंधित विभाग द्वारा न तो जांच की गई और न ही कोई कार्रवाई की गई है। उन्होंने दोनों निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण भवनों के निर्माण में पारदर्शिता और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक जांच कर ठोस कार्रवाई करता है।