अवैध बोरवेल पर खबर लिखने वाले पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी, उगली थाना में शिकायत
बोर माफिया के हौसले बुलंद सबको पैसा देते हैं, खबर मत छापना कहकर दी अंतिम चेतावनी
रात के समय बोर मशीनों की आवाज साफ सुनी जा सकती है
प्रभावशाली लोगों द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

सिवनी – ( उगली ) अवैध बोरवेल संचालन के खिलाफ खबर प्रकाशित करना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। एक स्‍थानीय अखबार के विशेष संवाददाता अजय नागेश्वर को खबर प्रकाशित करने के बाद बोरवेल मालिक और एजेंट द्वारा खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में पत्रकार ने उगली थाना में शिकायत दर्ज करवाकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। जिला कलेक्टर द्वारा सिवनी को जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए बोरवेल खनन पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। इसके बावजूद उगली क्षेत्र में अवैध रूप से बोरवेल मशीनों के संचालन की खबर 28 मार्च 2026 को स्‍थानीय अखबाार में प्रकाशित की गई थी। खबर के प्रकाशन के बाद उसी दिन सुबह 7.39 बजे और 10.45 बजे आवेदक अजय नागेश्वर को बोरवेल एजेंट राकेश पटले द्वारा फोन कर मधुबन होटल बुलाया गया।
होटल में दी गई खुलेआम धमकी
लगभग 11 बजे जब अजय नागेश्वर मधुबन होटल पहुंचे, तो वहां केवलारी निवासी बोरवेल मालिक महमूद कुरैशी और एजेंट राकेश पटले अपने अन्य साथियों के साथ मौजूद थे।
यहां पर आरोपियों ने पत्रकार को धमकाते हुए कहा सबके बाटा जाना, हमारे बाटा मत जाना, नहीं तो बहुत बुरा होगा। वहीं बोरवेल मालिक ने खुलेआम कहा ढाई करोड़ की मशीन खड़ी करने के लिए नहीं लाया हूं, मैं इसे चलाऊंगा। एसडीएम से लेकर सभी अधिकारियों को पैसा देता हूं। यह पहली और आखिरी चेतावनी है।
इस घटना के बाद पत्रकार और उनके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है। उगली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 351(2) और धारा 352 के मामला दर्ज किया है।


सुबह होने से पहले काम पूरा कर लिया जाता है
जिले में एक ओर प्रशासन द्वारा क्षेत्र को जल अभावग्रस्त घोषित किया गया है, वहीं दूसरी ओर अवैध रूप से बोरवेल मशीनों के संचालन का सिलसिला लगातार जारी है। खासकर ग्रामीण और नदी किनारे के इलाकों में रात के समय बोर मशीनों की आवाजें साफ सुनी जा सकती हैं, जो प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विडंबना यह है कि जहां एक ओर किसान यदि सार्वजनिक जल स्रोत से सिंचाई करते हैं तो उनकी मोटर जब्त कर ली जाती है और कानूनी कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कई स्थानों पर रात के अंधेरे में मशीनें लाई जाती हैं और सुबह होने से पहले काम पूरा कर लिया जाता है, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके। इस पूरे मामले में स्थानीय अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो तथा निगरानी के लिए विशेष टीम गठित की जाए। साथ ही रात के समय गश्त बढ़ाने और तकनीकी निगरानी (जैसे सीसीटीवी, ड्रोन) की व्यवस्था की जाएं।


पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला
यह घटना न केवल एक व्यक्ति को धमकाने का मामला है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर सीधा हमला भी माना जा रहा है। अवैध गतिविधियों को उजागर करने वाले पत्रकारों को इस तरह डराने की घटनाएं लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। क्या अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को इसी तरह चुप कराया जाएगा, या प्रशासन समय रहते सख्त कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित करेगा?

केेेेवलारी एसडीएम महेश अग्र्वाल से जब संवाददूत के प्रधान संपादक ने बात की तो उन्‍होने कहा कि अभी इस घटना की जानकारी या शिकायत मेरे संज्ञान में नही है जैैैसे ही मामला या शिकायत मेरे पास आती है मामले की जॉच कर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी ा