यह घटना शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है
सिवनी – प्रधानमंत्री काॅलेज आॅफ एक्सीलेंस में आयोजित परीक्षा के दौरान अत्यंत गंभीर लापरवाही एवं अनियमितता सामने आई है, जिसमें नियमित छात्र अनुज गहलोद के स्थान पर बाहरी व्यक्ति अजय गहलोद को परीक्षा में बैठाया गया जो की भाजपा का युवा नेता है और भाजपा सिवनी विधायक का करीबी है और विधायक के करीबी अजय बाबा पांडेय है जो की कॉलेज के जनभागीदारी अध्यक्ष है तो यह बात पूर्णतः स्पष्ट है कि बाबा पाण्डे द्वारा अपनी धौंस के चलते अपनी पार्टी के लोगो को इस तरह से लाभान्वित करा रहे है। और अपने पद का दुरुपयोग कर रहे जबकि उनका जनभागीदारी अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष धनंज्जय सिंह ने उक्ताशय के साथ कलेक्टर को सौपे अपने ज्ञापन में आगे बताया कि अजय बाबा पाण्डे को कॉलेज से हटाये बिना कॉलेज में अच्छी एवं सुचारू शिक्षा व्यवस्था हो पाना नामुमकिन है।
इसके पहले भी आयुष बोरकर नाम के छात्र के द्वारा उत्तर पुस्तिका को घर पर ले जा कर लिख कर लाया था
जबकि इसके पहले भी आयुष बोरकर नाम के छात्र के द्वारा उत्तर पुस्तिका को घर पर ले जा कर लिख कर लाया था जो की घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है उस समय भी सिवनी एनएसयूआई द्वारा तत्कालीन सिवनी कलेक्टर क्षितिज सिंघल को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया था।जिस परछोटे कर्मचारी को निकाल कर खाना पूर्ति की गई और कुछ दिनों बाद बहाल कर दिया। अगर सख्त कार्यवाही होती तो आज इसी तरह की घटना की पुनरावर्ती ना होती।
उक्त घटना बिना परीक्षा केंद्र में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत के संभव नहीं है। परीक्षा में पहचान सत्यापन एवं दस्तावेज जांच की जिम्मेदारी परीक्षा ड्यूटी में नियुक्त स्टाफ की होती है, इसके बावजूद ऐसी गंभीर चूक होना अत्यंत चिंताजनक है।
परीक्षा ड्यूटी में नियुक्त संबंधित समस्त कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए
धनंज्जय सिंह ने जिला कलेक्टर से उक्त मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराये जाने की मांग की है आगे ज्ञापन में बताया गया है कि कॉलेज प्राचार्य, परीक्षा नियंत्रक एवं परीक्षा ड्यूटी में नियुक्त संबंधित समस्त कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
यह मामला विद्यार्थियों के भविष्य एवं शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर शीघ्र एवं कठोर कार्यवाही किया जाना आवश्यक है।





