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स्वच्छ भारत अभियान – उद्देश्य, महत्व और सरकार की प्राथमिकता जिसकी भी उड रही धज्जियाॅ
सिवनी – स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर की थी। इसका उद्देश्य भारत को स्वच्छ, स्वस्थ और खुले में शौच से मुक्त बनाना है। इस अभियान के माध्यम से लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना, कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना तथा स्वच्छ वातावरण का निर्माण करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने देशवासियों से एक कदम स्वच्छता की ओर बढ़ाने का आह्वान करते हुए स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया।
सरकार इस अभियान को इसलिए गंभीरता से ले रही है क्योंकि गंदगी से अनेक बीमारियाँ फैलती हैं, पर्यावरण प्रदूषित होता है और देश की छवि भी प्रभावित होती है। स्वच्छ वातावरण से लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होता है, चिकित्सा पर होने वाला खर्च कम होता है और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

स्वच्छ भारत मिशन के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न चरणों में लाखों करोड़ रुपये का प्रावधान किया है
स्वच्छ भारत मिशन के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न चरणों में लाखों करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के लिए लगभग 1.41 लाख करोड़ तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-प्प् के लिए लगभग 1.40 लाख करोड़ के समग्र प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और टिकाऊ स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है।
तो वही सिवनी के कबीर वार्ड के ज्ञानी मोहल्ला में लगभग 6 माह पहले एक नाली का निर्माण किया गया जो कि वार्डवासियों के लिए सिरदर्द बन गई है नाली इसलिए बनाई जाती है ताकि लोगो के घरो के पानी की निकासी हो सके लेकिन यहा उल्टा हो रहा है लोगो के घरो का पानी एक जगह जमा किया जा रहा है।

ठेकेदार द्वारा सैट कमीशन से मतलब है दुनिया जाये तेल लेने।
नाली निर्माण के पहले नगरपालिका के तकनीकी अमले ने इतना नही सोचा कि आधी अधूरी नाली निर्माण करने के बाद आम नागरिको को परेशानी उठानी पडेगी लेकिन उससे इनका क्या वास्ता उन्हे तो सिर्फ अपनी नौकरी करनी है और ठेकेदार द्वारा सैट कमीशन से मतलब है दुनिया जाये तेल लेने।

बिना नाप के बिना तकनीकी जाॅच के बिना मटेरियल की जाॅच के नाली का निर्माण कर दिया गया
तो वही सिर्फ एक रसूखदार व्यक्ति के अतिक्रमण को बचाने के चक्कर में नाली निर्माण रोक दिया गया ऐसी जनचर्चा फैली हुई है सूत्र तो यह भी बताते है कि नाली का निर्माण आगे तक किया जाना है जिसके बाद नाली निर्माण को आधे में ही इसलिए छोड दिया गया कि अतिक्रमणकारियो के द्वारा मुॅह बंद रखने और नियम विरूद्ध कार्य करने की कीमत अदा कर दी गई चौक चौराहो पर तो यह भी चर्चा है कि भैया आजकल पैसा चल रहा है पैसा दो और अपने तरीके से काम कराओ। शायद इसलिए बिना नाप के बिना तकनीकी जाॅच के बिना मटेरियल की जाॅच के नाली का निर्माण कर दिया गया अब देखना होगा कि कब नाली का निर्माण होता है।

बदबू बनी सिरदर्द – तेज बारिश के चलते चैक में सालो से चोक एक नाली का गंदा बदबूदार पानी आकर यहा जमा हो गया जिससे लोगो का जीना मुहाल हो रहा है लेकिन इस दिशा में किसी का भी ध्यान नही है ना तो वार्ड पार्षद इस दिशा में रूचि दिखा रहे है और ना ही अध्यक्ष और ना ही सीएमओ अब देखना होगा और कितने वर्ष कबीर वार्ड ज्ञानी मोहल्ला के लोग इस गंदगी और बदबू से जूझते रहेगे और इन्हे कब मुक्ति मिलेगी और अतिक्रमणकारियो के अतिक्रमण पर कब इनका जेसीबी का पंजा चलेगा।


अभी तक तो आपने देखा होगा प्रशासन का जेसीबी का पंजा सिर्फ रोज रोजी रोटी कमाने वाले जो सडको के किनारे अपनी दुकाने लगाकर किसी तरह अपने बच्चो का पेट पालते है उनके छोटे – छोटे व्यवसाय के साधनो पर बेदर्दी से जेसीबी चलाई जाती है जिन रसूखदार लोगो ने सरकार की बेशकीमती भूमि पर वर्षो से अवैध रूप से कब्जा जमाये बैठे है ऐसे अतिक्रमण पर आखिर प्रशासन का ध्यान क्यो नही जाता है क्यो गरीब आदमी है इनका शिकार क्यों होता है।