सिवनी – भारत सरकार और राज्य सरकारें देश के नागरिकों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति को मुफ्त या सस्ती शिक्षा और अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देना है।

शिक्षा से जुड़ी मुख्य योजनाएं
समग्र शिक्षा अभियान

इसमें पहली कक्षा से बारहवीं कक्षा तक के सभी बच्चों को एक जैसी और अच्छी शिक्षा दी जाती है। मध्याह्न भोजन योजना ( मिडडे मिल ) सरकारी स्कूलों के बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन मिलता है जिससे उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे और वे स्कूल आएं।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
लड़कियों को स्कूल भेजने और उनकी उच्च शिक्षा के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए यह योजना है।
पीएम ई-विद्या
डिजिटल और ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए यह एक बड़ा मंच है, जिससे बच्चे घर बैठे पढ़ाई कर सकें। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का स्तर सुधारने और नई सुविधाएं देने के लिए यह योजना काम करती है।
लेकिन देखने मे आ रहा है कि सरकार की सारी की सारी योजनाऐ सिर्फ कागजो तक या मंच के उपर से जनता को रिझाने के उददेश्य से भाषणो तक ही सीमित है क्योंकि धरातल पर कुछ और ही देखने को मिल रहा है।
नगर के सीएम राईज यानि सांदीपनी विद्यालय में प्रशासन के हिटलरशाही आदेश के सामने सभी छोटे – छोटे बच्चो के अभिभावक हैरान और परेशान है जिनके सामने प्रशासन के आधे सत्र में इस तरह के हिटलरशाही आदेश के बाद अभिभावक अपने बच्चों को लेकर जाए तो जाए कहा। कहा जाता है सरकार आखिरी छोर के दबे कुचले और गरीबो की सरकार है लेकिन यहां पर प्रशासन के हिटलरशाही आदेश जिसमें बताया जा रहा है सांदीपनी विद्यालय डूंडासिवनी के शिक्षको को आदेश दिया गया है कि इस स्कूल को तीन दिवस के भीतर नगर से लगभग 10 किलोमीटर दूर कंडिपार स्थित स्कूल में शिफट किया जाए जिसके सामने शिक्षक भी मजबूर हो गए है। प्रशासन के द्वारा बच्चो के लिए कंडिपार स्थित स्कूल जाने और आने के लिए बसो की व्यवस्था की जानी थी लेकिन बिना साधन की व्यवस्था के इस तरह के हिटलरशाही तानाशाह फरमान को सुनकर सभी हैरान और परेशान है कि जब बच्चों को लाने ले जाने में अपना समय खराब कर देंगे तो फिर हमारे सामने बच्चो को पालने के लिए रोजी रोटी का संकट खडा हो जाएगा अब सवाल यह उठने लगे है कि आखिर यह सरकार पूॅजीपतियों की सरकार है या देश की करोडो की संख्या में रह रहे मध्यम और गरीब परिवारो की। अब देखना होगा कि प्रशासन अपने वादो पर पर कब खरा उतरता है या फिर सरकार प्रशासन द्वारा किए जा वादे हवा हवाई और लफफाजी बाजी है। इस मामले में बच्चो की सुरक्षा और शिक्षा दोनो पर विपरीत असर देखने को मिलेगा क्योकि जब बच्चे इतनी दूर जाऐंगे तो अभिभावको की जेबो पर अतिरिक्त भार पडेगा जिसकी व्यवस्था करना अभिभावको के सामने मुश्किल काम है इसके अलावा नगर से इतनी दूर जाना और फिर आना बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खडे करता आखिर इसकी जिम्मेदारी सरकार लेगी या प्रशासन चाहे जो भी लेकिन वर्तमान हालात में अभिभावको के मन मस्तिष्क में चिंता की लकीरे खिच गई है इस मामले में जिले की कलेक्टर जो राष्ट्रपति सम्मान से भी सम्मानित हो चुकी है उन्हे एक बार बालिकाओ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार तक संदेश पहुचाने और निर्णय लेने पर विचार करना होगा।