सिवनी -मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के छपारा जो कि सीताफल के विश्वप्रसिद्ध है जहां का एक व्यवसायी ठगी का शिकार हुआ है आपने कई तरह की ठगी के मामले सुने होंगे लेकिन यह एक अलग ही किस्म की ठगी का मामला आपको बताने जा रहे है ध्यान से सुनियेगा बीते दिवस छपारा के एक युवक को फिल्मी स्टाईल में कुछ लोगो ने 35 लाख रूपयो का चूना लगा कर फरार हो गए जिसकी रिपोर्ट छपारा थाने में दर्ज कराई गई है। सूत्र बताते है छपारा निवासी वैभव शिवहरे कन्ट्रक्शन,सप्लाई एवं अंतर्राष्ट्रीय सामग्री सप्लाई का काम करता है। जुलाई के महिने में वैभव की फर्म को बंग्लादेश स्थित कंपनी अभिराज इंटर प्राईजेस द्वारा 100 मीट्रिक टन सुपारी सप्लाई का आर्डर मिला था जिसके बाद उसके द्वारा आॅनलाईन नेट फार्म जस्ट डायल में सामग्री उपलब्ध कराने के लिए आफर दिया गया जिसमें वैभव का मोबाईल नंबर दिया गया।
सांगली से सप्लाई करने का दिया गया था आफर


बताया जाता है कि 06 जुलाई को वैभव के पास एक व्यक्ति का फोन आया जिसने अपने आप को श्री बालाजी टेªडर्स सांगली महाराष्ट्र का मालिक धीरज पाटिल निवासी सांगली बताया जिसने वैभव को व्हाटशाप पर सुपारी के सैम्पल की फोटो भेजा। वैभव को सैम्पल पंसद आ गया तो उसने तुरंत बालाजी टेªडर्स के संचालक से 2.20 लाख रूपये प्रति टन के मूल्य से 2 करोड 20 लाख रूपये का सौदा तय किया। तब उक्त टेªडर्स के संचालक धीरज पाटिल ने वैभव से सप्लाई के लिए 20 प्रतिशत राशि माने कि 44 लाख रूपये एडवांस मांगा तो वैभव उक्त व्यक्ति द्वारा दिये गए बैक आॅफ इंडिया के खाते में अग्रिम राशि 35 लाख रूपये तीन किश्तों में दे दिया। वैभव ने 11 जुलाई 26 को 01 लाख,01 लाख,3 लाख,ऐसे कुल 05 लाख रूपये जमा किये। बाद में 15 जुलाई 26 को 20 लाख रूपये एवं 17 जुलाई 26 को 10 लाख रूपये की राशि 100 मीट्रिक टन सुपारी सप्लाई करने आरटीजीएस के माध्यम से किया।
खराब माल मिलने पर किया सौदा कैसिल


आगे बताया जाता है कि वैभव शिवहरे ने लगभग 35 लाख एडवांस दिया जिसके बाद बालाजी टेªडर्स के संचालक ने वैभव को सांगली महाराष्ट्र बुलवाया तब 19 जुलाई 2026 को वैभव सांगली महाराष्ट्र पहुॅचा जहां एक गोदाम था जिसके सामने श्री बालाजी टेªडर्स नाम का बोर्ड लगा हुआ था जिसमें जीएसटी नंबर भी लिखा हुआ था गोदाम के पास ही वैभव को दो व्यक्ति मिले जिन्होने अपना नाम धीरज पिता दिलीप पाटिल एवं दिलीप पिता मनोहर पाटिल बताये। जिन्हे वैभव ने माल दिखाया। वैभव ने पुलिस को बताया कि उसने सौदा करने से पहले सुपारी का जो सैम्पल देखा था वह व्हाटशाप पर दिखाये गये माल से खराब क्वालिटी का माल था तो वैभव ने उक्त माल ( सुपारी ) को रिजेक्ट कर दिया और उन लोगो के द्वारा माल उपलब्ध नही कराने पर डील को कैसिल कर दिया व 35 लाख रूपये वापस करने लिए कहा तब उन्होने कहा कि 22 जुलाई 2026 को पैसे वापस कर देंगे। लेकिन उन्होने पैसे वापिस नही किया तब वैभव ने धीरज पाटिल और दिलीप पाटिल को सुबह 9 बजे फोन किया तो दोनो का फोन बंद मिला।
किराये से लिया था गोदाम


बताया जाता है कि जब वैभव को पैसे नही मिले तो वह सांगली में स्थित गोदाम गया तो देखा गोदाम के सामने लगा हुआ श्री बालाजी टेªडर्स को बोर्ड नही है। तब वैभव ने गोदाम के बाहर बैठे चैकीदार से धीरज पाटिल और दिलीप पाटिल के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह लोग रात को ही यहां से जा चुके है। चैकीदार ने आगे बताया कि उन्होने इस जगह को तीन दिनो के लिए किराये पर लिया था तब वैभव ने इन्टरनेट पर पर श्री बालाजी टेªडर्स के बारे में सर्च किया तो सांगली में बालाजी टेªडर्स नाम की एक फर्म मिली जिनसे वैभव ने उस फर्म में जाकर पता किया तो उन्होने बताया कि धीरज पाटिल और दिलीप पाटिल नाम के कोई भी व्यक्ति हमारी फर्म में नही है। वैभव को पता चला कि उक्त दोनो व्यक्तियों के द्वारा अन्य लोगों के साथ भी धोखाधडी की गई। इस मामले ने पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए जाॅच तेज कर दी है।
आपके साथ भी ऐसी ठगी ना हो इसलिए हो जाइये सावधान