सिवनी – 15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के गौरव, संघर्ष, त्याग और बलिदान की अमर गाथा का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष 1947 में हमारा देश लंबे संघर्ष के बाद अंग्रेजी शासन की गुलामी से स्वतंत्र हुआ। यह आजादी हमें अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान से मिली है उक्ताशय के उदगार व्यक्त करते हुए ग्राम पंचायत बिहिरिया जमुनिया की सरपंच श्रीमति रामशीला बघेल ने आगे बताया कि महात्मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, लोकमान्य तिलक और लाखों ज्ञात-अज्ञात वीरों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। किसी ने जेल की यातनाएं सहीं, किसी ने फांसी का फंदा चूमा और किसी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र के नाम समर्पित कर दिया।

साथ ही ग्राम पंचायत पुसेरा की सरपंच श्रीमति सरस्वती कुमरे ने बताया कि आज भारत स्वतंत्र है और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, शिक्षा, कृषि, तकनीक, उद्योग, खेल और अंतरिक्ष जैसे अनेक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल बाहरी गुलामी से मुक्ति नहीं है। सच्ची आजादी तब होगी, जब देश का प्रत्येक नागरिक सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, सुरक्षा और न्याय के साथ जीवन जी सके।

साथ ही आगे ग्राम पंचायत के सचिव दिनेश कुमार बघेल ने राष्ट्र के प्रति सम्मान और समर्पण भाव के साथ बताया कि आज के समय में देशभक्ति का अर्थ केवल तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान गाना नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना भी है। हमें भ्रष्टाचार, भेदभाव, हिंसा, नशाखोरी, अंधविश्वास और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ मिलकर खड़ा होना होगा। हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना होगा।

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम संकल्प लें कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करेंगे, संविधान के मूल्यों का सम्मान करेंगे और अपने कार्यों से भारत को और बेहतर बनाने में योगदान देंगे।

आजादी हमें विरासत में मिली है, लेकिन इसे मजबूत और सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत बिहिरिया ( जमुनिया ) ध्वजारोहण के सरपंच श्रीमति रामशीला बघेल एवं सचिव दिनेश कुमार बघेल ( अतिरिक्त प्रभार ) ग्राम पंचायत पुसेरा सरपंच श्रीमति सरस्वती कुमरे एवं सचिव दिनेश कुमार बघेल की उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।







