जनसुनवाई कुरई पहुंचे दर्जनों अभिभावक सौंपा ज्ञापन

छपारा ब्लाक के कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास गोरखपुर का मामला

छपारा – सिवनी कलेक्टर के द्वारा एक नया नवाचार करते हुए हर ब्लॉक मुख्यालय में जनसुनवाई आयोजित की जा रही हैं ।इसी तारतम्य में लगभग 100 किलोमीटर की दूरी से छपारा ब्लॉक मुख्यालय के कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास गोरखपुर के दर्जनों अभिभावकों ने जिला कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर अपनी पीड़ा आवेदन के माध्यम से बताते हुए छात्रावास प्रबंधन की झूठी शिकायत करने और भूख हड़ताल पर बैठने वालों की मेडिकल टेस्ट और पूरे मामले की सूक्ष्म तरीके से जांच किए जाने की मांग की है।

प्राप्त जानकारी अनुसार पूरा मामला छपारा ब्लाक मुख्यालय के आदिवासी अंचल गोरखपुर ग्राम का है जहां कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास के छात्रावास प्रबंधन को हटाए जाने को लेकर कुछ सामाजिक तत्वों के द्वारा पिछले कुछ दिनों से भूख हड़ताल गोरखपुर ग्राम में ही ग्राम प्रारंभ कर दी गई है। लेकिन इस पूरे मामले का दूसरा पहलू यह है कि जो लोग भूख हड़ताल में बैठे हैं उनके कोई भी बच्चियों उक्त छात्रावास में ना तो अध्यनरत है और ना ही आवासरत हैं।

100 किलोमीटर जनसुनवाई में पहुंचे पालक शिक्षक संघ और अभिभावक गण

मंगलवार को कुरई ब्लॉक मुख्यालय में जिला कलेक्टर के द्वारा जनसुनवाई आयोजित की गई थी जहां एक अनोखा मामला मीडिया के सामने आया। जी हां दरअसल लगभग 100 किलोमीटर दूर छपारा ब्लॉक मुख्यालय गोरखपुर कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास से आए हुए दर्जनों अभिभावकों ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौप कर अपनी वेदना दर्ज कराई है। दर्जनों की संख्या में आए हुए अभिभावकों का आवेदन में स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास प्रबंधन से ना तो छात्रावास में रह रही बच्चियों को कोई शिकायत है और ना ही हम सभी अभिभावकों को कोई शिकायत नहीं हैं। बेवजह बाहरी लोगों के द्वारा छात्रावास प्रबंधन और छात्रावास में रह रही आवासीय छात्राओं के अध्यापन करने पर रोक-टोक लगाई जा रही है।

भूख हड़ताल पर बैठकर माहौल बिगड़ने का प्रयास

मंगलवार जनसुनवाई कुरई में पहुंचे दर्जनों की संख्या में अभिभावकों ने अपने आवेदन पत्र में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया है कि ग्राम के बाहर के कुछ आसामाजिक तत्वों के द्वारा जिनका छात्रावास की बच्चियों अथवा उनके अभिभावकों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है वे लगातार छात्रावास प्रबंधन के विरुद्ध झूठी शिकायत पिछले कई सालों से कर रहे हैं। इतना ही नहीं अब वे लोग प्रशासन को गुमराह करते हुए छात्रावास प्रबंधन को हटाए जाने को लेकर भूख हड़ताल में पिछले कुछ दिनों से बैठे हुए हैं। जबकि वस्तु स्थिति यह है कि हम समस्त हस्ताक्षरकर्ता पालक शिक्षक संघ और समस्त अभिभावकों को किसी भी प्रकार की छात्रावास प्रबंधन से कोई भी शिकायत नहीं है।

2018 में 34 छात्रों का स्कूल से किया गया था अपहरण

कुरई में पहुंचे समस्त अभिभावकों ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि सन 2018 में इन्हीं असमाजिक तत्वों के द्वारा 2018 में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की 34 छात्राओं को विद्यालय से जबरन बहला फुसलाकर कर एवं दबाव पूर्वक एक बस में बैठकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था। उस समय भी उक्त छात्रावास के प्रबंधन के द्वारा तत्काल पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन को इस मामले में सूचना देकर इस घटना की विस्तृत जानकारी दी गई थी जिसके बाद पुलिस प्रशासन के द्वारा समस्त 34 छात्राओं को सुरक्षित बरामद किया था।

आखिर.. क्यों बनाया जा रहा प्रशासन पर दबाव

कुरई में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे दर्जनों अभिभावकों का मीडिया के सामने प्रत्यक्ष रूप से कहना यह हुआ कि आखिर बाहरी लोग गोरखपुर ग्राम में पहुंचकर प्रशासन के ऊपर अनैतिक रूप से दबाव क्यों बना रहे हैं। जबकि जो लोग भूख हड़ताल में बैठे हैं उनकी बच्चियों किसी भी रूप से छात्रावास में अध्यनरत नहीं है। मीडिया के सामने दर्जनों की संख्या में अभिभावकों ने स्पष्ट रूप से यह कहा कि हम समस्त हस्ताक्षर करता और उपस्थित लोगों को किसी भी प्रकार से कस्तूरबा गांधी गोरखपुर के छात्रावास प्रबंधन से कोई शिकायत नहीं और उन्होंने यहां तक बताया कि हमारी बच्चियों के द्वारा आज तक हमें किसी भी प्रकार की छात्रावास के संबंध में कोई शिकायत नहीं बताई गई है।

प्रबंधन को हटाया गया तो अब हम बैठेंगे भूख हड़ताल पर

जनसुनवाई से बाहर पहुंचे दर्जनों की संख्या में कस्तूरबा गांधी गोरखपुर के अभिभावकों ने मीडिया के समक्ष अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट रूप से यह कहा कि बाहरी लोगों के द्वारा बेवजह छात्रावास प्रबंधन और छात्राओं के शिक्षण कार्य पर रोक-टोक लगाई जा रही है जबकि वस्तु स्थिति यह है कि उक्त सामाजिक तत्वों का कोई भी लेना देना छात्रावास से नहीं है। भूख हड़ताल में बैठे उक्त लोगों की कोई भी बच्चियों छात्रावास में ना तो आवास रात हैं और ना ही अध्यनरत है। ऐसी अवस्था में उक्त लोगों का भूख हड़ताल में बैठना और छात्रावास प्रबंधन को हटाए जाने को लेकर अनैतिक रूप से प्रशासन के ऊपर दबाव बनाना और छात्रावास प्रबंधन को हटाया जाना सूक्ष्म जांच का विषय है।