प्रसव के दौरान नवजात की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, कार्रवाई की मांग तेज
धनोरा (सिवनी)। मध्य प्रदेश शासन ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा किया जा रहा है लेकिन एक बार फिर शासन के दावे झूठे साबित हो रहे है क्योकि सिवनी जिले के धनोरा विकासखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में लंबे समय से लापरवाही और अव्यवस्थाऐ बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।

इसी बीच एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। जानकारी के अनुसार ग्राम कोंडरा निवासी चमन सिंह इनवाती अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनोरा लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ द्वारा बार-बार दो घंटे रुकिए, तीन घंटे रुकिए कहकर इंतजार कराया गया। उनका कहना है कि समय रहते प्रसूता को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर नहीं किया गया, जिसके कारण प्रसव के दौरान उनका नवजात शिशु जीवित नहीं बच सका।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
वहीं इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनोरा के प्रभारी डॉ. आर. जे. प्रसाद का कहना है कि प्रसव के दौरान महिला पर्याप्त प्रयास नहीं कर पाई, जिसके कारण बच्चा मृत पैदा हुआ।
घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर उचित निर्णय लेकर आवश्यक उपचार या रेफर की व्यवस्था की जाती, तो शायद यह दुखद स्थिति टाली जा सकती थी। अब लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आएं और भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े। चिकित्सक के अभाव में नवजात की मौत का आरोप, धनौरा उपस्वास्थ्य केन्द्र की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल

जिले के मुख्यालय स्थित धनौरा उपस्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ चिकित्सक की लापरवाही ने बार फिर चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खडे कर दिए है। धनौरा उपस्वास्थ्य केन्द्र गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों एवं परिजनों ने आरोप लगाया है कि चिकित्सक की अनुपस्थिति और समय पर समुचित उपचार नहीं मिलने के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका
जानकारी के अनुसार, प्रसूता को उपचार के लिए धनौरा उपस्वास्थ्य केन्द्र लाया गया था, लेकिन वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका। परिजनों का आरोप है कि यदि मौके पर चिकित्सक मौजूद होते और तत्काल उपचार मिलता, तो नवजात की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उनका कहना है कि उपस्वास्थ्य केन्द्र में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी बनी हुई है, जिसकी शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
धनौरा उपस्वास्थ्य केन्द्र में नियमित चिकित्सक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा धनौरा उपस्वास्थ्य केन्द्र में नियमित चिकित्सक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं, इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यदि समय रहते रिक्त पदों की पूर्ति और स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे आगे भी सामने आ सकते हैं।







