सिवनी – आज देश में कई दलित और आदिवासी संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। अनुसूचित जाति आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जा रही है। इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि वो एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर के पक्ष में नहीं है लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बुधवार को रैली आयोजन किया गया रैली नगर के मुख्य मार्गो से घॅूमने के बाद वापस कचहरी चैक पहॅुची जहां संगठनो के द्वारा महामहिम राश्ट्रपति महोदया,प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौपा गया ज्ञापन में अनुसूचित जाति / जनजाति के सवैधानिक अधिकार में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित निर्णय को रदद करते हुए अध्यादेष के माध्यम से पूर्ववत स्थिति यथावत रखे जाने की बात लिखी गई है। जिसमें बताया गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा विगत दिनाॅंक 1 अगस्त 2024 को दरविन्दर सिंह बनाम पंजाब राज्य के मामले मे निर्णय पारित किया गया है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के भीतर आरक्षण के लिए उप वर्गीकरण किया जा सकता है जबकि पूर्व में माननीय सर्वोच्च न्यायालय की सवैधानिक पीठ के द्वारा ई.वी. चिन्नैया बनाम आंध्रप्रदेश राज्य के मामले में निर्णय पारित किया गया था कि अनुसूचित जातियों एवं जन जातियों के बीच एक समरूपता है सभी जातियां समान वर्ग में आती है इसलिए जाति, जातियों के बीच उप वर्गीकरण नहीं किया जा सकता। डॉ०भीमराव अम्बेडकर के द्वारा रचित भारतीय संविधान के भाग-3 मूल अधिकार में समता का अधिकार प्रदान किया गया है। विधि के समक्ष समता अनुच्छेद 14 में उल्लेखित किया गया है और अनुच्छेद 15 में लिखा गया है कि राज्य किसी भी नागरिक के विरूद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म के स्थान अथवा इनमें से किसी के आधार पर विभेद नही करेगा ।
किन्तु भारतीय संविधान की मूल अवधारणा को खंडित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 01 अगस्त 2024 में निर्णय पारित किया गया है जिसमें जातियों के बीच उक्त निर्णय से अनेकों मतभेद उत्पन्न होना निश्चित है।
हम अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोग आपस में एकता और अखण्डता को विभेद नहीं करना चाहते और हम आपस में एकता और अखण्डता बनाए रखना चाहते है और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित निर्णय को निरस्त किए जाने की मांग कर संविधान के अनुच्छेद 341, 342 के तहत अनुसूचित जाति/अनु. जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की व्यवस्था कराई जावें तथा संविधान की अनुसूचि 9 में रखें जाने की मांग के साथ 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति महोदया को जिला कलेक्टर का ही सिवनी के माध्यम से प्रेषित करते हैं।
प्रमुख मांगें
- आरक्षण का वर्गीकरण एवं क्रीमिलेयर का निर्णय तत्काल निरस्त किया जावें ।
2 – 01 अगस्त 2024 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला तत्काल रदद करते हुए अध्यादेश के माध्यम से पूर्ववत आरक्षण यथावत किया जायें। - पूना पैक्ट रद्द किया जायें।
- कालेजियम व्यवस्था (जजों द्वारा जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए संविधान में नियमानुसार नियम बनाए जाएँ ।
- जजों की नियुक्ति हेतु न्यायिक आयोग का गठन किया जायें ताकि जजों की नियुक्तियों में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के वर्ग के समुदायों का प्रतिनिधित्व हो सकें।
- विभिन्न परीक्षाओं के लिए जी चयन मंडल का गठन किया जाता है उसमें अनुसूचित व्यवस्था के अन्तर्गत बैकलॉग पदा की भर्ती तुरंत की जावें ।
जाति/जनजाति समुदाय के सदस्यों को नियमानुसार नियुक्त किया जावें । - परीक्षा में लेटरल एंट्री की गलत प्रक्रिया को तत्काल समाप्त किया जायें एवं बैकलॉग व्यवस्था पुनः लागू की जावें ।
पुरानी पेंशन व्यवस्था पुनः लागू की जावे।








