सिवनी – आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र घंसौर के बरेला और गोरखपुर के मध्य स्थित झाबुआ पावर प्लांट प्रबंधन के द्वारा अपनी नाकामियों और गडबडियों को दफन करने और छुपाने के लिए घंसौर क्षेत्र छोडकर लगभग 70 से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बरगी के मैकल रिसाॅर्ट में मीडिया संवाद नाम से एक कार्यशाला में प्लांट प्रबंधन के अपने हाथ से अपनी पीठ थपथपाने का पूरा असफल प्रयास किया लेकिन अब प्लांट प्रबंधन के द्वारा आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम ही सवालो के घेरे में आ गया है क्योकि जिस बात को लेकर प्रबंधन ने मीडिया संवाद नामक कार्यक्रम आयोजित किया उसी बात का तो स्थानीय नागरिको द्वारा विगत कई महिनो से विरोध और आका्रेश देखने में आ रहा था।
फलाई एस का अवैध परिवहन मीडिया की सुखियां ना बने इसलिए रिसाॅर्ट में आयोजन
घंसौर में स्थित झाबुआ पावर प्लाट प््राबंधन फलाई ऐश परिवहन कंपनियों की मिलीभगत से घंसौर क्षेत्र में नियम विरूद्ध फलाई ऐश का परिवहन किया जाता है जिससे स्थानिय किसान एवं ग्रामीण अत्याधिक परेशान है प्लांट प्रबधंन की मनमानी और लापरवाही हमेशा सुखिंयो में रहती है। जो प्लांट प्रबंधन कि परेशानियों एवं सबब सिरदर्द बना रहता है। सूत्रो की माने तो फलाई ऐश का अवैध परिवहन का मीडिया से ध्यान हटाने के लिए प्लांट प्रबंधन द्वारा घंसौर से लगभग 70 – 80 किलोमीटर दूर बरगी के मैकल रिसार्ट में मीडिया बन्धुओ को बुलाकर मीडिया संवाद का आयोजन किया गया जिसमेें मीडिया के साथियो को भोजन एवं उपहार प्रदानकर अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुॅचाने का प्रयास किया गया।
स्थानीय जनता एंव किसान बहुत अधिक परेशान
ज्ञात हो कि झाबुआ पावर प्लांट एवं कुछ कंपनियो की सांठगांठ से घंसौर क्षेत्र में फलाई ऐश का अवैध परिवहन नियमित रूप से हो रहा है जिससे स्थानीय जनता एंव किसान बहुत अधिक परेशान है फलाई ऐश से भरे डम्पर दिन भर धडल्ले से आ जा रहे है जिससे आये दिन कोई ना कोई दुर्घटना हो रही है एवं सडक भी अत्यधिक दबाव के कारण खराब होती जा रही है जिससे पाॅच साल चलने वाली सडके दो तीन साल में ही दुर्दशा का शिकार हो रही है जिससे मार्ग में दुर्घटनाओ को आॅकडे बढ गए है।
फलाई ऐश परिवहन में केन्द्रीय प्रदुषण नियत्रंण बोर्ड की गाईड लाईन का उलघंन किया जा रहा है
इस सब घटनाओ को ध्यान में रखते हुए लखनादौन के वरिष्ठ पत्रकार नीलेश स्थापक द्वारा एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दायर कर न्यायालय को अवगत कराया था कि फलाई ऐश परिवहन में केन्द्रीय प्रदुषण नियत्रंण बोर्ड की गाईड लाईन का उलघंन किया जा रहा है। ओवर लोड ट्रक द्वारा फलाई ऐश का परिवहन करते समय फलाई ऐश सडक पर बिखर जा रही है जिससे ना केवल सडक क्षतिग्रस्त हो रही बल्कि वायु प्रदुषण भी फैल रहा है।
परिवहन में बंद टेंकरो एवं विशेष वाहनो का प्रयोग अनिवार्य है
वही कृषि भूमि भी बरबादी की कगार पर है जिसका लोगो के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड रहा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हितेन्द्र कुमार गोल्हानी ने 2013 और 2019 की गाईड लाईन का हवाला देते हुए बताया था कि फलाई ऐश के परिवहन में बंद टेंकरो एवं विशेष वाहनो का प्रयोग अनिवार्य है किंतु झाबुआ पाॅवर प्लांट द्वारा गाईड लाईन की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। जिसके बाद माननीय उच्च न्यायालय के मुख्या न्यायधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायाधीश विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कलेक्टर सिवनी पुलिस अधीक्षक सिवनी क्षेत्रीय परिवहन सहित अन्य लोगो को नोटिस जारी किया था। इस सबके बावजूद भी झाबुआ पाॅवर प्लांट प्रबंधन की मानमानी रूकने का नाम नही ले रही है। पाॅवर प्लांट अपनी नाकामी और निरंकुशता को छुपाने के लिए इस तरह के मीडिया संवाद का सहारा ले रहा है। अब देखना बाकी है कि शासन द्वारा इस संबंध में पाॅवर प्लांट की अवैध एवं निरंकुश गतिविधियो पर क्या कदम उठाया जाता है।