सिवनी – अभी रवि की फसलो को लेकर किसान खासा परेशान है ऐसी दशा में जैसेे ही रवि की फसल खेतो से साफ हुई किसान खरीफ की फसलो की तैयारी में जुट गया एक तो गेहूॅ की बिक्री को लेकर किसान बहुत से किसानो के स्लाट बुक ना होने कारण समर्थन मूल्य में किसानो को उनकी उपज का सही रेट मिला पाया जिसके बाद किसान फसलो के हिसाब से पूर्व की तैयारी में जुट गया है जिसमें खाद भी पर्याप्त नही मिल पा रही है तो वही किसान रात – रात भर टैªक्टरो से खेत को जोतकर उसे आने वाली फसल को बोने की तैयारी में जुट गया है जहां जिस तरह परीक्षा के पूर्व विद्यार्थी के लिए एक एक मिनिट का समय कीमती होता है उसी तरह इस समय किसान के लिए समय कीमती है तो वही किसानो को टैªक्टरो में लगने वाले ईर्धन को लेकर परेशान खासे परेशान है कुछ ऐसी एक सूचना सूत्रो की माने तो भोमा क्षेत्र से निकलकर आ रही है जहां पर किसानो को टंकियों में डीजल नही दिया जा रहा है इसके अलावा पेट्रोल पंप मालिक के द्वारा टेªक्टर में डीजल देने की बात की जा रही है जिसमें भी किसी को 1 हजार का तो किसी को 1500 रूपये का ही डीजल दिया जाता है जबकि एक टैक्टर में लगभग 5 हजार का डीजल लगता है ऐसे में किसान का समय तो खराब होता ही है साथ ही उसे पर्याप्त डीजल ना मिलने से किसान की फजीहत हो जाती है अब किसान सोच में पड गया है कि हम खेती करें तो कैसे करें।
किसानो ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि पेट्रोल पंप संचालको को नोटिस जारी कर उन्हे पर्याप्त मात्रा में ईधन प्रदान करें ताकि किसान बिना किसी व्यवधान के अपने खेतो को खेती के लिए तैयार कर सकें।
आपको बता दें खेती (कृषि) खेती मानव सभ्यता की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है। लगभग 10,000 से 12,000 वर्ष पहले नवपाषाण काल में मनुष्य ने शिकार और भोजन संग्रह करने के बजाय फसल उगाना और पशुपालन शुरू किया।

प्रारंभिक कृषि
सबसे पहले गेहूं और जौ जैसी फसलें उगाई गईं। कृषि का विकास मुख्य रूप से फर्टाइल क्रेसेंट (वर्तमान इराक, सीरिया आदि) में माना जाता है। इसी समय पशुओं को पालतू बनाना भी शुरू हुआ।

भारत में कृषि का इतिहास
भारत में कृषि के प्रमाण लगभग 7000 ईसा पूर्व से मिलते हैं। मेहरगढ़ में गेहूं और जौ की खेती के साक्ष्य मिले हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (3300-1300 ईसा पूर्व) के लोग उन्नत कृषि करते थे तथा सिंचाई की व्यवस्था भी थी।प्राचीन और मध्यकालीन कृषि
वैदिक काल में कृषि भारत संव्यवस्था का आधार बनी। कृषि के प्रमाण लगभग 7000 ईसा पूर्व से मिलते हैं। पेहरगढ़ में गेहूं और जौ की खेती के साक्ष्य मिले हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता (3300-1300 ईसा पूर्व) के. कृषि करते थे तथा सिंचाई की व्यवस्था भी थी।

प्राचीन और मध्यकालीन कृषि
वैदिक काल में कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार बनी। हल, बैल और सिंचाई के विभिन्न साधनों का उपयोग बढ़ा।
मध्यकाल में नहरों और तालाबों का निर्माण कर सिंचाई का विस्तार किया गया।

आधुनिक कृषि
औद्योगिक क्रांति के बाद ट्रैक्टर, उन्नत बीज और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग शुरू हुआ।
भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति के कारण गेहूं और धान का उत्पादन बहुत बढ़ा। आज कृषि में आधुनिक मशीनें, ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती और डिजिटल तकनीकों का उपयोग हो रहा है।
निष्कर्ष
खेती का इतिहास मानव सभ्यता के विकास से जुड़ा हुआ है। कृषि ने स्थायी बस्तियों, नगरों और आधुनिक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है|