सिवनी – कार्यालय पुलिस उप महानिरीक्षक, छिन्दवाड़ा रेंज, म०प्र० के पुनरीक्षण आदेश – विभागीय जांच नक्शा माह जनवरी 2025 के अवलोकन पश्चात पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर जोन का पत्र कं० पुमनि/जबल/पीए/वि०जांच / 829-एच/2025, दिनांक 25 फरवरी 2025 के माध्यम से जिला सिवनी की विभागीय जांच नस्ती क. 05ध्2023 के अवलोकन/परीक्षण हेतु निर्देशित किए जाने पर पुलिस अधीक्षक सिवनी से विभागीय जांच नस्ती प्राप्त की गई।
नस्ती के अवलोकन पर पाया गया कि प्र०आर० क० 490 योगेश राजपूत के विरूद्ध निम्न आरोप पर विभागीय जांच क. 05/2023 संस्थित की गई थी –
क्या थे आरोप
अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के विरूद्ध थाना चैरई जिला छिन्दवाड़ा में अप. क. 233/97 धारा 279,337 भादवि पंजीबद्ध होने के उपरांत भी वर्ष 1997 में आरक्षक भर्ती के समय अनुप्रमाणन फार्म में उक्त अपराध की जानकारी न देते हुए पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश भोपाल की जी०ओ०पी० कमांक 78/97 दिनांक 02.05.1997 की कंडिका 14 का स्पष्ट उल्लंघन करना।
उक्त आरोप पर वि०जांच, जांचकर्ता अधिकारी अनु. अधिकारी (पुलिस) बरघाट ललित गठरे द्वारा संपादित की गई है। जांचकर्ता अधिकारी ने अपने जांच प्रतिवेदन में अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत, जिला सिवनी के विरूद्ध विभागीय जांच में लगाये गए आरोप को, अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के विरूद्ध थाना चैरई जिला छिन्दवाड़ा में अपराध कमांक 233/97 धारा 279,337 भादवि पंजीबद्ध होने के उपरांत भी वर्ष 1997 में आरक्षक भर्ती के समय अनुप्रमाणन फार्म में उक्त अपराध की जानकारी न देते हुए अपराध को छिपाया गया, पुलिस मुख्यालय भोपाल की जीओपी कमांक 78ध्97 दिनांक 02 मई 1997 की कण्डिका 14 का स्पष्ट उल्लघंन करना जांच में पाए जाने से विभागीय जांच में अधिरोपित आरोप को प्रमाणित पाया गया है।
योगेश राजपूत के विरूद्ध विभागीय जांचकर्ता द्वारा प्रमाणित की गई
पुलिस अधीक्षक सिवनी द्वारा विभागीय जांच अंतिम आदेश क. पुअ/स्टेनो/वि.जा. /05-सी/2025 दिनांक 22 जनवरी 2025 के माध्यम से शासन के पत्र कमांक एफ. 17-01/2017 दो/सी-2 भोपाल दिनांक 24 जुलाई 2018 के प्रकाश में कण्डिका कमांक 6 की उप कण्डिका (ट) में निर्दिष्ट केवल वाहन दुर्घटना एवं मोटर यान अधिनियम 1988 के अंतर्गत पंजीबद्ध अपराधों में अभ्यार्थी को न्यायालय द्वारा दण्डित किया गया हो और इसका उल्लेख अभ्यार्थी द्वारा अनुप्रमाणन फार्म में किया गया हो अथवा नहीं, अभ्यार्थी की शासकीय सेवा हेतु अहर्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं माना जावेगा। के आधार पर अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के विरूद्ध विभागीय जांचकर्ता द्वारा प्रमाणित की गई विभागीय जांच को नस्तीबद्ध किया गया है।
विभागीय जांच के अवलोकन उपरांत इस कार्या० के पत्र क. उमनि/छिन्द/पीए /177-ए/25 दिनांक 17 अक्टूबर 2025 के माध्यम से अपचारी प्र०आर० 490 योगश राजपूत को कारण बताओं नोटिस जारी कर 07 दिवस में उत्तर प्रस्तुत करने हेतु लेख किया गया। पुलिस अधीक्षक सिवनी के पत्र कं. पुअ/सिवनी/स्टेनो/357/25 दिनांक 18 नवम्बर 2025 के माध्यम से अपचारी प्र०आर० 490 का आवेदन पत्र दिनांक 15 नवम्बर 2025 संलग्न कर प्रेषित किया गया जिसमें प्र०आर० 490 द्वारा प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही करने से पहले दिनांक 17 अक्टूबर 2025, दिनांक 29 जुलाई 2025 एवं दिनांक 25 फरवरी 2025 के पत्रों की प्रति उपलब्ध कराने हेतु लेख किया गया है। इस संबंध में कार्यालयीन पत्र कमांक उमनि/छिन्द/पीए/177-जी /2025 दिनांक 18.नवम्बर 2025 के द्वारा पुलिस अधीक्षक सिवनी के माध्यम से प्र०आर० 490 योगेश राजपूत को उक्त पत्रों की छायाप्रति संलग्न कर अपना जवाब 05 दिवस में प्रेषित करने हेतु लेख किया गया । अपचारी प्र०आर० 490 ने ई-मेल एवं स्पीड पोस्ट के माध्यम से इस कार्यालय के पत्र दिनांक 18. 11.2025 के संदर्भ में अपना जवाब प्रस्तुत किया जिसमें लेख किया कि शासन के पत्र कमांक एफ. 17-01/2017 दो/सी-2 भोपाल दिनांक 24 जुलाई 2018 के परिपत्र का लाभ आवेदक को क्यो नहीं मिलेगा जबकि उक्त शासन के पूर्व के पत्र का संशोधन है और अधिक विस्तृत परिस्थितियों को परिभाषित करता है। जिसके संबंध में कोई कारण नहीं दिए गए हैं। मेरे द्वारा दिनांक 04 नवम्बर 2025 के जवाब में विस्तृत जवाब दिया जा चुका है जिसे संज्ञान में लेकर मेरे विरूद्ध विभागीय जांच क्रमांक 5/2023 में दिनांक 22 जनवरी 2025 को पारित आदेश को यथावत रखने हेतु लेख किया है।
अपचारी द्वारा समक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखा गया।
अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत को उक्त प्रस्तुत जवाब में उल्लेखित विषयवस्तु की पुष्टि एवं अपना पक्ष रखने हेतु कार्यालयीन पत्र कमांक उमनि/छिन्द/पीए / 177-एन/25 दिनांक 05 फरवरी 2026 के माध्यम से दिनांक 17 फरवरी 2026 को कार्यालीन समय में उपस्थित होने हेतु पत्र लेख किया गया, जिसकी तामिली एवं प्र०आर० 490 का आवेदन पत्र पुलिस अधीक्षक सिवनी द्वारा पत्र कमांक पुअ/सिवनी/स्टेनो/जीबी/98-बी/26 दिनांक 24 फरवरी 2026 के माध्यम से संलग्न प्राप्त हुआ। जिसमें अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत द्वारा दिनांक 15 नवम्बर 2025 को प्रस्तुत जवाब को अंतिम जवाब माना जाए एवं श्रीमान के समक्ष उपस्थित नहीं होना चाहता लेख किया है। अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के उक्त नियत दिनांक को उपस्थित न होने पर पुनः कार्यालयीन पत्र क्रमांक उमनि/छिन्द/पीए/177-ओ/25-26 दिनांक 20 फरवरी 2026 के माध्यम से एक अवसर दिवस में कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु पत्र जारी कि तामिली पुलिस अधीक्षक सिवनी के द्वारा पत्र कं. पुअ/सिवनी/स्टेनो जीबी/126 10 मार्च 2026 के माध्यम से कराकर अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत का प्रस्तुत आ कर प्रेषित किया गया, जिसमें अपचारी ने दिनांक 13 फरवरी 2026 को प्रेषित किए गए जवाब को ही मान्य किया जावे एवं पुलिस अधीक्षक सिवनी द्वारा जारी आदेश को स्थिर रखने हेतु लेख किया है। अपचारी द्वारा समक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखा गया।
योगेश राजपूत के जिले बाहर दूसरे थानो में भी थे अपराध पंजीबद्ध
विभागीय जांच नस्ती के अवलोकन पर पाया गया कि अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत द्वारा उसके विरूद्ध थाना चैरई जिला छिन्दवाड़ा में अपराध 233/97 धारा 279.337 भाददि पंजीबद्ध होने के उपरांत भी वर्ष 1997 में आरक्षक भर्ती के समय अनुप्रमाणन फार्म में उक्त अपराध की जानकारी न देते हुए अपराध को छिपाया गया, जो शासकीय सेवाओं में नियुक्ति के दौरान बरित्र सत्यापन कराये जाने के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आरक्षक संवर्ग भर्ती व जीओपी 78ध्97 की कण्डिका 14 चरित्र सत्यापनष् में उल्लेख है कि नियुक्ति आदेश जारी करने के पूर्व शासन आदेशानुसार प्रत्येक उम्मीदवार का चरित्र सत्यापन कराया जावेगा। यदि कोई उम्मीदवार चरित्र सत्यापन फार्म में कोई तथ्यात्मक जानकारी छिपाता है अथवा कोई गलत जानकारी देता है तो वह सेवा के अयोग्य ठहराया जावेगा और उसे नियुक्ति नहीं दी जावेगी तथा यदि यह तथ्य सेवा में नियुक्ति के बाद उजागर होता है तो उसे बिना कोई अन्य नोटिस दिये सेवा से पृथक कर दिया जावेगा।
आपराधिक जानकारी के बारे में गलत कथन दिये गए
इसी प्रकार म०प्र० शासन द्वारा जारी परिपत्र कं०/एफ17-74/2002/सी-1 भोपाल दिनांक 05.06.2003 की कण्डिका 6 (अपप) के अनुसार ऐसे प्रकरण जिसमें व्यक्ति विशेष द्वारा यदि अपने आपराधिक / न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी स्पष्टतः मिथ्या कथन लेख कर के नियोक्ता को गुमराह करने का प्रयास किया जाए तो ऐसे प्रत्याशी को शासकीय सेवा में नियुक्त करने के लिए अहर्ता प्राप्त नहीं मानना चाहिए क्योंकि अनुप्रमाणन फार्म के प्रथम पृष्ठ के शीर्ष में ही ये स्पष्टतः यह चेतावनी अंकित होती है कि इस अनुप्रमाणन फार्म की समस्त जानकारी सत्यतापूर्वक प्रदान करना अनिवार्य है, जो नहीं किये जाने अर्थात् मिथ्या कथन करने पर उसे शासकीय सेवा की अर्हता से वचित माना जाएगा।
योगेश राजपूत का स्थानांतरण नरसिहपुर हुआ लेकिन वे सीधे पहुूचे मान.न्यायालय की शरण में
इसी प्रकार मान० उच्चतम न्यायालय ने भी एस०एल०पी० 20525/11 अवतार सिह विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया में दिनांक 21 जुलाई 16 को पारित निर्णय में स्पष्ट उल्लेख हैं कि प्र०आर० 490 योगेश राजपूत का दिनांक 26 सितम्बर 2025 को जिला सिवनी से जिला नरसिंहपुर स्थानांतरण होने पर जिला सिवनी से नवीन पदस्थापना जिला नरसिंहपुर के लिए २०के० सिवनी के रो०सा०क० दिनांक 26 सितम्बर 2025 द्वारा रवानगी दी गई थी, किन्तु प्र०आर० 490 द्वारा जिला नरसिंहपुर में आमद न देकर स्थानांतरण आदेश के विरूद्ध मान० उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका कमांक 3949 प्रस्तुत की गई थी। जिस पर मान० न्यायालय द्वारा स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाते हुए दिनांक 16 अक्टूबर 2025 को स्थगन आदेश जारी किया गया। स्थगन आदेश प्राप्त होने के बाद भी मूल इकाई में कर्तव्य पर उपस्थित न होकर गैरहाजिर हो गया। इसी दौरान प्र०आर० 490 योगेश राजपूत पर थाना कोतवाली जिला बालाघाट के अप.क. 628/2025 धारा 316 (5), 49, 317 (2), 317 (5) बीएनएस., 13(1)ए, 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधि० एवं थाना कोतवाली जिला सिवनी के अप०क0 899/25 धारा 121(1), 132, 221, 296, 324(4), 351(3), 191 (2) बीएनएस. का अपराध पंजीबद्ध किया गया। उक्त अपराधो में प्र०आर० 490 वांछित था। इसके बाद भी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत को अपना पक्ष रखने हेतु पर्याप्त अवसर दिया गया, किन्तु प्र०आर० 490 द्वारा अपना पक्ष रखने हेतु कार्यालय में उपस्थित न होकर पूर्व में प्रेषित तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत जवाब को ही मान्य कर पुलिस अधीक्षक सिवनी के आदेश को यथावत रखने हेतु लेख किया है।
योगेश राजपूत 26 सितम्बर 25 से 31 जनवरी 26 तक रहा फरार
प्र०आर० 490 योगेश राजपूत दिनांक 26 सितम्बर 2025 से दिनांक 31 जनवरी 2026 तक गैरहाजिर / फरार रहा है उक्त अवधि के दौरान ही प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के द्वारा अपना जवाब प्रस्तुत किया गया था। इसीलिए मुझ अद्योहस्ताक्षरकर्ता द्वारा नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त के तहत प्र०आर० 490 योगेश राजपूत को कार्यालय में समक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने हेतु कार्यालयीन पत्र दिनांक 05 फरवरी .2026 को जारी किया गया, किन्तु प्र०आर० 490 योगेश राजपूत कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ। उक्त अपराधो के अतिरिक्त प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के विरूद्ध वर्ष 2024 में थाना बण्डोल जिला सिवनी में अप०क0 20ध्24 धारा 452, 294, 323, 324, 506, 34 भादवि का अपराध पंजीबद्ध हुआ है।
आपराधिक कृत्य की जानकारी अंकित नहीं करना जानबूझकर की गयी गंभीर त्रुटि
समग्र वि०जांच नस्ती का अवलोकन पर पाया गया कि प्र०आर० 490 योगेश राजपूत द्वारा अपने अभ्यावेदन / स्पष्टीकरण में ऐसे कोई तथ्य लेख नहीं किये गये है, जो उसके विरूद्ध लगाये गये आरोप की गंभीरता को कम करने में सहायक हो। अपचारी ने जानबूझकर अपने विरूद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण की जानकारी चरित्र सत्यापन के दौरान अनुप्रमाणन फार्म में लेख न कर उक्त जानकारी विभाग से छिपाई है। प्र०आर० 490 योगेश राजपूत यह अच्छी तरह से जानता था कि जानकारी अनुप्रमाणन फार्म में लेख करने से उसे पुलिस सेवा में नहीं लिया जायेगा। अनुप्रमाणन फार्म में आपराधिक कृत्य की जानकारी अंकित नहीं करना जानबूझकर की गयी गंभीर त्रुटि हैं। पुलिस विभाग में भर्ती होने वाले अधिकारियों से सचरित्र और ईमानदारी की अपेक्षा की जाती है। ऐसी स्थिति में वह किसी भी प्रकार से सहानुभूति का पात्र नहीं है। पुलिस अधीक्षक सिवनी द्वारा विभागीय जांच के अंतिम आदेश क. पुअ/स्टेनो/वि.जा./05-सी/2025 दिनांक 22 जनवरी 2025 में शासन के पत्र कमांक एफ. 17-01/2017 दो/सी-2 भोपाल दिनांक 24 जुलाई 2018 का उल्लेख करते हुए अपचारी के विरूद्ध अधिरोपित आरोप प्रमाणित होने के बाद भी विभागीय जांच को नस्तीबद्ध किया गया है, जबकि उक्त शासन के परिपत्र में स्पष्ट लेख है कि उपरोक्त परिपत्र में वर्णित नियम जारी होने के दिनांक से शासन द्वारा पूर्व में जारी परिपत्र दिनांक 05 जून 2003 द्वारा जारी दिशा निर्देशों को निरस्त माना जावेगा ।
प्र०आर० 490 योगेश राजपूत वर्ष 1997 में आरक्षक पद पर भर्ती हुआ है
प्र०आर० 490 योगेश राजपूत वर्ष 1997 में आरक्षक पद पर भर्ती हुआ है, तथा शासन का उक्त आदेश वर्ष 2018 से लागू हैं। प्र०आर० 490 योगेश राजपूत द्वारा प्रस्तुत अनुप्रमाणन फार्म में उसके विरूद्ध पंजीबद्ध अपराध की जानकारी छिपाकर तत्समय लागू पुलिस मुख्यालय की जीओपी में चरित्र सत्यापन से संबंधित कण्डिकाओ का स्पष्ट उल्लघंन किया गया हैं। अतः उक्त परिस्थितियों में पुलिस अधीक्षक सिवनी के दण्डादेश कमांक पुअ/स्टेनो/वि.जा./05-सी/2025 दिनांक 22 जनवरी 2025 को त्रुटिपूर्ण पाते हुए निरस्त किया जाता है।
संबंधित अधिरोपित आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित पाए गए हैं
समग्र विश्लेषण में अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के विरूद्ध अनुप्रमाणन फार्म में आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाए जाने से संबंधित अधिरोपित आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित पाए गए हैं, साथ ही अपचारी के विरूद्ध विभाग में आने के बाद जिला सिवनी में 02 अपराध एवं जिला बालाघाट में 01 अपराध पंजीबद्ध हुए हैं जो वर्तमान में विवेचनाधीन / मान० न्यायालय में विचाराधीन है। पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में रहते हुए अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत के द्वारा पुलिस विभाग में भर्ती के समय अनुप्रमाणन फार्म में आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाना स्पष्ट रूप से जानबूझकर किया गया गंभीर कृत्य है जो अपचारी के संदिग्ध आचरण को प्रदर्शित करता है। अतः विभागीय जांच में प्रमाणित आरोप के लिए अपचारी प्र०आर० 490 योगेश राजपूत को सेवा से पृथक किया जाता है।
सबंधित सभी अधिकारियों को जानकारी प्रेषित की जा चुकी है
यह आदेश (राकेश कुमार सिंह) पुलिस उप महानिरीक्षक, छिन्दवाड़ा रेंज, छिन्दवाडा दिनांक 30 मई 2026 को जारी किया गया है जिसकी सूचना संबंधित सभी अधिकारियों के पास भेजी जा चुकी है।