सिवनी – पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में सिवनी पुलिस द्वारा बेजुबान पशुओं के साथ हो रही क्रूरता के विरुद्ध की गई कार्रवाई अत्यंत प्रशंसनीय एवं स्वागतयोग्य है। पशुओं को भूखा-प्यासा रखना, अमानवीय परिस्थितियों में बांधकर रखना तथा उनके साथ किसी भी प्रकार का अत्याचार करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।श्

बेजुबान पशुओ के साथ की जा रही इस कू्ररता को अल्लाह ईश्वर भी मांफ नही करेगा,
’इस्लाम में कुर्बानी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण, करुणा और अल्लाह की आज्ञाकारिता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य दिखावा, व्यापार या आर्थिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि हजरत इब्राहीम (अ.स.) के बलिदान और समर्पण की भावना को जीवित रखना है। इसलिए पशुओं के साथ प्रेम, देखभाल और संवेदनशील व्यवहार करना प्रत्येक इंसान की नैतिक एवं धार्मिक जिम्मेदारी है।’
बेजुबान पशुओ के साथ की जा रही इस कू्ररता को अल्लाह ईश्वर भी मांफ नही करेगा, ठेका कुर्बानी की इस्लाम मे कोई जगह नही, चंद रूपये की खातिर ऐसा घोर पाप गुनाह करने वाले लोग पूरे समाज को बदनाम करते है!
’’कुर्बानी का असल मकसद समझने की जरूरत’’
’दरअसल, समाज में कई लोग ऐसे हैं जो कुर्बानी की वास्तविक भावना और उसके धार्मिक उद्देश्य को सही रूप से नहीं समझ पाए हैं। इस्लाम में कुर्बानी केवल एक रस्म या परंपरा का नाम नहीं है, बल्कि यह हजरत इब्राहीम (अ.स.) की आज्ञाकारिता, त्याग, समर्पण और अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्रिय चीज को कुर्बान करने के जज्बे की याद दिलाती है और यही दीन ए इब्राहिम इस्लाम का तरीका मोहम्मद रसूल्लाह ने हमे सिखाया है!’

किसी भी बेजुबान जानवर के साथ क्रूरता, लापरवाही या अमानवीय व्यवहार का धर्म में कोई स्थान नहीं है।
कुर्बानी का संदेश यह है कि इंसान अपने भीतर की बुराइयों, लालच, अहंकार और स्वार्थ को त्यागकर ईश्वर की इच्छा के आगे सिर झुकाए। पशुओं के साथ दया, प्रेम और अच्छा व्यवहार करना भी इस्लाम की महत्वपूर्ण शिक्षाओं में शामिल है। इसलिए किसी भी बेजुबान जानवर के साथ क्रूरता, लापरवाही या अमानवीय व्यवहार का धर्म में कोई स्थान नहीं है।
दुर्भाग्यवश, जब कुर्बानी के पीछे छिपे त्याग, करुणा और जिम्मेदारी के संदेश को भुला दिया जाता है, तब उसका वास्तविक उद्देश्य भी धुंधला पड़ जाता है। इसलिए आवश्यक है कि लोग धार्मिक शिक्षाओं का सही ज्ञान प्राप्त करें और कुर्बानी की भावना को उसके वास्तविक स्वरूप में समझें।
’’कुर्बानी केवल पशु की नहीं, बल्कि अपने अहंकार, लालच और स्वार्थ की भी होनी चाहिए। यही उसका असली संदेश है।’’
चंद रुपयों के लालच में बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करने वाले लोग न केवल कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि धर्म और पूरे समाज की छवि को भी धूमिल करते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है ताकि पशु क्रूरता पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और समाज में मानवीय मूल्यों को बढ़ावा मिले।
’सिवनी पुलिस, पुलिस अधीक्षक महोदय एवं संपूर्ण पुलिस टीम इस मानवीय और कानूनसम्मत पहल के लिए हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद की पात्र है।’
’धर्म हमें दया, करुणा और जिम्मेदारी का संदेश देता है, क्रूरता का नहीं।’